हिंसा से हुनर तक… बस्तर के 2,323 पुनर्वासितों ने थामा आत्मनिर्भरता का रास्ता
नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से रोजगार और स्वरोजगार को मिल रहा बढ़ावा; 50,053 युवाओं को मिला नियोजन, छह पुनर्वास केंद्र बने व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता

रायपुर/नारायणपुर। कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर संभाग में अब कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास के जरिए नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के युवाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आजीविका से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और क्षेत्र में शांति एवं विकास की प्रक्रिया को मजबूती देना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों के तहत अब तक 2,323 पुनर्वासितों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के माध्यम से युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण और नियोजन के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
7,567 आत्मसमर्पितों में से 2,323 को मिला कौशल प्रशिक्षण
राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से अब तक 2,323 को विभिन्न रोजगारपरक व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया गया है।
इनमें असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर यानी सूर्यमित्र, दोपहिया एवं चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन और सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन कौशलों के जरिए प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के साथ स्वयं का काम शुरू करने के अवसर भी मिल सकते हैं।
नियद नेल्ला नार योजना 2.0 से 50,053 युवाओं का नियोजन
बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित नियद नेल्ला नार योजना 2.0 को विकास और रोजगार से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक 1,11,165 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 50,053 युवाओं का नियोजन किया गया है।
योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों में से 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है और 461 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, नक्सल हिंसा से प्रभावित 779 हितग्राहियों को प्रशिक्षित किया गया है तथा 191 हितग्राही वर्तमान में प्रशिक्षणरत हैं।
ये प्रयास प्रभावित परिवारों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
कहीं गारमेंट फैक्ट्री तो कहीं सुरक्षा और निर्माण कार्यों में रोजगार
कौशल प्रशिक्षण के बाद युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुसार रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बीजापुर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री कार्य और सिलाई के स्वरोजगार से जोड़ा गया है।
वहीं, बस्तर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और श्रम आधारित कार्यों में अवसर मिले हैं। इसका उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को आय का साधन उपलब्ध कराने के साथ सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ने में सहयोग देना है।
छह पुनर्वास केंद्रों को मिली प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में मान्यता
पुनर्वास प्रक्रिया को रोजगार से जोड़ने के लिए बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (वीटीपी) के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर जिले के केंद्र शामिल हैं।
इस व्यवस्था से पुनर्वास केंद्रों में रह रहे युवाओं को व्यवस्थित और रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में भी विशेष शिथिलता दी गई है। प्रशिक्षण पूर्व पंजीयन के समय आधार की अनिवार्यता शिथिल रखी गई है, जबकि मूल्यांकन से पहले इसे अनिवार्य किया गया है। इसका उद्देश्य दस्तावेजों की कमी के कारण पात्र युवाओं को प्रशिक्षण से वंचित होने से बचाना है।
हर विकासखंड तक कौशल प्रशिक्षण पहुंचाने की तैयारी
बस्तर संभाग के दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर (एसडीसी) स्थापित करने की दिशा में कार्यवाही की जा रही है।
बीजापुर जिले में स्किल डेवलपमेंट सेंटर के तहत असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम में 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसके अलावा, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए नवीन मद में 780 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे दूरस्थ अंचलों के युवाओं को प्रशिक्षण केंद्रों तक पहुंचने और रोजगारपरक कौशल हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कौशल, रोजगार और पुनर्वास से बदलेगी क्षेत्र की तस्वीर
बस्तर में कौशल विकास की पहल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराना, युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
प्रशिक्षण, स्वरोजगार, नियोजन और पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से क्षेत्र में विकास के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षित युवाओं को आगे भी नियमित रोजगार, बाजार और आजीविका के पर्याप्त अवसर मिलते रहें।



