छोटेडोंगर में डेयरी से बदलेगी आदिवासी पशुपालकों की तकदीर!
25 पशुपालकों को छह माह का प्रशिक्षण, फिर मिलेंगे दो-दो दुधारू पशु; दूध की बिक्री के लिए दुग्ध महासंघ से जोड़ने की योजना

नारायणपुर। छोटेडोंगर क्षेत्र के आदिवासी पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करने की दिशा में डेयरी विकास परियोजना की पहल की जा रही है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने इस परियोजना का पायलट प्रोजेक्ट मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत किया है। परियोजना के तहत पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से डेयरी संचालन का प्रशिक्षण देने, दुधारू पशु उपलब्ध कराने और उत्पादित दूध के विपणन की व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
छह माह का प्रशिक्षण, फिर हर पशुपालक को दो दुधारू पशु
प्रस्तावित योजना के तहत छोटेडोंगर क्षेत्र के 25 आदिवासी पशुपालकों का चयन किया जाएगा। इन्हें छह माह तक वैज्ञानिक तरीके से दुधारू पशुओं के पालन-पोषण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें पशुओं की देखभाल, संतुलित आहार, स्वास्थ्य प्रबंधन, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय के संचालन की व्यावहारिक जानकारी शामिल होगी।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रत्येक चयनित पशुपालक को दो-दो दुधारू पशु उपलब्ध कराने की योजना है। इससे पशुपालक स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे और दूध उत्पादन के जरिए नियमित आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
प्रशिक्षण केंद्र के लिए दो एकड़, चारागाह के लिए 25 एकड़ जमीन की जरूरत
परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना हेतु दो एकड़ भूमि और चारागाह विकास के लिए 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता बताई है।
प्रशिक्षण केंद्र में पशुपालकों को डेयरी प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। वहीं, चारागाह विकसित होने से पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने और पशुपालन की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
दूध की बिक्री के लिए दुग्ध महासंघ से जोड़ने की तैयारी
डेयरी व्यवसाय को टिकाऊ बनाने के लिए केवल पशु उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उत्पादित दूध की बिक्री की व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से परियोजना के अंतर्गत उत्पादित दूध के विपणन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध महासंघ का सहयोग लेने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था से पशुपालकों को दूध बेचने के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय को स्थायी आधार देने में मदद मिलने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर डेयरी गतिविधियों का विस्तार होने से रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
कलेक्टर ने दिए डीपीआर की समीक्षा के निर्देश
कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने समय-सीमा की बैठक में प्रस्तावित डेयरी विकास परियोजना की समीक्षा की। उन्होंने पशुधन विकास विभाग के उपसंचालक को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का अवलोकन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों और हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित कर परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की उम्मीद
छोटेडोंगर क्षेत्र में प्रस्तावित यह परियोजना आदिवासी पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन, प्रशिक्षण, पशु संसाधन और विपणन सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। योजना के क्रियान्वयन से पशुपालकों की आय बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की संभावनाएं हैं।
फिलहाल परियोजना प्रस्तावित चरण में है। इसके वास्तविक लाभ प्रशिक्षण केंद्र के लिए भूमि की उपलब्धता, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की समीक्षा और योजना के क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।



