चार दिन बाद जला रावण, ट्रैक्टर से बना हेलीकॉप्टर बना आकर्षण
एक महीने की मेहनत से ग्रामीणों ने तैयार किया इंडियन एयरफोर्स का मॉडल, 10 हजार से अधिक लोग पहुंचे मेले में; बिच्छू-मगरमच्छ की झांकियों ने भी खींचा ध्यान

(कैलाश सोनी) मैनपुर/नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में दशहरा भले ही विजयादशमी के दिन मनाया जाता हो, लेकिन कोंडागांव जिले के अंतिम छोर पर बसे मैनपुर गांव में चार दिन बाद दशहरा मनाने की अनूठी परंपरा आज भी कायम है। इस बार मेले में ग्रामीणों की रचनात्मकता ने ऐसा आकर्षण पैदा किया कि हेलीकॉप्टर देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई। ट्रैक्टर से तैयार किए गए इंडियन एयरफोर्स के प्रतीकात्मक मॉडल ने पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं।
ट्रैक्टर को बना दिया हेलीकॉप्टर
मैनपुर के दशहरा मेले में इस बार युवाओं ने देसी जुगाड़ और अपनी कल्पनाशीलता से ट्रैक्टर को हेलीकॉप्टर का रूप दिया। करीब एक महीने की मेहनत और ग्रामीणों से जुटाए गए चंदे से तैयार इस मॉडल पर ‘INDIAN AIR FORCE’, ‘BHARAT’ और तिरंगे के निशान बनाए गए। युवाओं के अनुसार, इस झांकी के जरिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर आगमन का प्रतीकात्मक दृश्य प्रस्तुत किया गया।

हेलीकॉप्टर का अनूठा स्वरूप लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना रहा। बड़ी संख्या में लोग इसके साथ तस्वीरें लेते नजर आए। सीमित संसाधनों में तैयार इस मॉडल ने ग्रामीणों की मेहनत और रचनात्मक सोच को सामने रखा।

बिच्छू, मगरमच्छ और राक्षसों की टोली ने भी चौंकाया
मेले में हेलीकॉप्टर के अलावा मगरमच्छ, बिच्छू और ट्रैक्टर से तैयार किए गए अन्य आकर्षक रथ भी प्रदर्शित किए गए। मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर पर सवार राक्षसों की टोली जब मेले में निकली, तो उसे देखने के लिए सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जमा हो गई। रंग-बिरंगी झांकियों और पारंपरिक उत्साह ने पूरे आयोजन को खास बना दिया।

आयोजकों के अनुसार, मैनपुर के इस अनोखे दशहरे को देखने के लिए कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिले से 10 हजार से अधिक दर्शक पहुंचे। दिनभर चले आयोजन के बाद रावण दहन के साथ मेले का समापन हुआ।

घर-घर से चंदा, ग्रामीण खुद करते हैं पूरा आयोजन
मैनपुर के दशहरे की सबसे बड़ी विशेषता इसका जनसहयोग है। यहां आयोजन की तैयारियां ग्रामीण स्वयं करते हैं। आयोजन समिति के अनुसार, गांव में घर-घर जाकर 100 से 1,000 रुपए तक चंदा एकत्र किया जाता है। इसी राशि से झांकियों, रथों और रावण दहन की व्यवस्था की जाती है।
ग्रामीणों की भागीदारी से तैयार होने वाला यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामूहिक एकजुटता और स्थानीय हुनर का भी उदाहरण है। हर साल झांकियों में कुछ नया प्रस्तुत करने का प्रयास इस मेले को आसपास के क्षेत्रों में अलग पहचान दिलाता है।
सांसद और विधायक भी हुए शामिल
इस वर्ष दशहरा उत्सव में कांकेर सांसद भोजराज नाग, बस्तर सांसद महेश कश्यप और केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम भी शामिल हुए। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के प्रयासों और परंपरा को जीवित रखने की पहल की सराहना की। आयोजन को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में प्रयासों की बात भी कही गई।

चार दिन बाद दशहरा मनाने की परंपरा बनी पहचान
मैनपुर में विजयादशमी के चार दिन बाद दशहरा मनाने की परंपरा इस आयोजन को दूसरे स्थानों से अलग बनाती है। यहां ग्रामीण अपनी मेहनत, सामूहिक सहयोग और कल्पनाशीलता से हर साल मेले को नया स्वरूप देते हैं। इस बार ट्रैक्टर से बने हेलीकॉप्टर ने खास आकर्षण पैदा किया, वहीं अन्य झांकियों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
मैनपुर का यह दशहरा एक बार फिर बस्तर की जीवंत लोक परंपराओं और ग्रामीणों की रचनात्मकता की मिसाल बनकर सामने आया।



