बाल विवाह, शोषण और साइबर ठगी से कैसे बचें? सुलेगा में बच्चों को बताए सुरक्षा के अधिकार
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता शिविर; न्यायिक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने समझाए कानून, हेल्पलाइन नंबर 1098 और 1930 की दी जानकारी

नारायणपुर। बाल विवाह, बाल शोषण और ऑनलाइन अपराधों से बच्चों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, सुलेगा में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’ थीम पर आयोजित इस शिविर में विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों और किसी भी संकट की स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बच्चों को संदेश दिया कि शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति अथवा संबंधित अधिकारियों से मदद मांगना जरूरी है।

बाल विवाह रोकने के लिए कानून की जानकारी
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोंडागांव के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी तथा तालुका विधिक सेवा समिति, नारायणपुर के अध्यक्ष जितेन्द्र कुमार ठाकुर के आदेशानुसार आयोजित शिविर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती बरखा रानी वर्मा ने विद्यार्थियों को बाल अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के बारे में बताते हुए बाल विवाह को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि बच्चों के साथ हिंसा, उत्पीड़न या अधिकारों का उल्लंघन होने पर इसकी जानकारी अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।
निःशुल्क कानूनी सहायता के बारे में बताया
पैनल अधिवक्ता जितेन्द्र कुमार शुक्ला ने शोषण के विरुद्ध अधिकार, बाल विवाह प्रतिषेध कानून और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और जरूरत पड़ने पर कानूनी सहायता लेने के लिए प्रेरित किया।
पॉक्सो कानून और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग, नारायणपुर की संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत) सरिता वंजारी ने बाल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं और बच्चों के हित में संचालित उपायों की जानकारी दी। उन्होंने लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो), 2012 के प्रावधानों को समझाते हुए कहा कि किसी अनुचित घटना की स्थिति में बच्चों को स्वयं को दोषी नहीं समझना चाहिए, बल्कि तत्काल किसी विश्वसनीय व्यक्ति से मदद लेनी चाहिए।
उन्होंने अभिभावक, शिक्षक या पुलिस को घटना की जानकारी देने तथा जरूरत पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क करने की जानकारी भी दी।
ऑनलाइन दोस्ती और निजी जानकारी साझा करने से बचें
शिविर में उप निरीक्षक नरेश रावटे ने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। उन्होंने अनजान व्यक्तियों से ऑनलाइन दोस्ती करने, निजी फोटो साझा करने और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी। साथ ही ओटीपी और पासवर्ड किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की समझाइश दी।
उन्होंने बताया कि साइबर अपराध या ऑनलाइन धमकी की स्थिति में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यमों का सावधानीपूर्वक उपयोग करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी जिम्मेदार व्यक्ति को देने के लिए प्रेरित किया गया।
बच्चों को सुरक्षित और जागरूक बनाना उद्देश्य
सुरक्षित बचपन अभियान के तहत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को बाल विवाह, बाल शोषण और साइबर अपराधों से बचाव के उपायों की जानकारी देना तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना रहा।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती कोता गार्डी, समस्त शिक्षकगण तथा अधिकार मित्र सुश्री रोशनी करंगा और सुश्री अर्चना बघेल उपस्थित रहीं। शिविर के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि जागरूकता, समय पर सूचना और उचित सहायता से वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं तथा सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ सकते हैं।



