मोहरी की गूंज के बीच गूंजा सगा जोहार, महिमागवाड़ी में उमड़ा अंदकुरी गांडा समाज
जिला स्तरीय नवा खाई समारोह में नए अन्न का पारंपरिक विधि-विधान से किया स्वागत, देवी-देवताओं की पूजा के बाद गले मिलकर दी पर्व की शुभकामनाएं; संस्कृति संरक्षण और सामाजिक एकता का दिया संदेश

नारायणपुर। मोहरी की मधुर धुन, पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक और सगा जोहार के आत्मीय मिलन के बीच महिमागवाड़ी मंडल में अंदकुरी गांडा समाज का जिला स्तरीय नवा खाई सगा जोहार भेंट समारोह हर्षोल्लास के साथ आयोजित हुआ। समारोह में समाज के सैकड़ों लोग जुटे। नए अन्न के स्वागत के साथ यहां सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक विरासत और पुरखों से चली आ रही परंपराओं के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

नए अन्न के स्वागत से शुरू हुआ पर्व, निभाई सदियों पुरानी परंपरा
नवा खाई अंदकुरी गांडा समाज का महत्वपूर्ण पारंपरिक एवं सांस्कृतिक पर्व है। नए अन्न के आगमन की खुशी में मनाए जाने वाले इस त्योहार में समाज की आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक जीवन की झलक देखने को मिली।
समारोह की शुरुआत परंपरागत विधि-विधान के अनुसार देवी-देवताओं की अगवानी और पूजा-अर्चना से हुई। इस दौरान शीतला माता, जिम्मेदारी, बुढ़ादेव, डूमा और डायना की पूजा की गई। समाज के नाईक, पाइप, सगा और सियान की उपस्थिति में विधिवत सेवा-पूजा संपन्न हुई।
पूजा-अर्चना के बाद कुढ़ाई पान में नए चावल से तैयार चिवड़ा प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। समाज के लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर नवा खाई की परंपरा निभाई। इसके बाद शुरू हुई सगा जोहार भेंट की रस्म, जिसमें लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने की परंपरा ने आयोजन को आत्मीयता और पारिवारिक जुड़ाव से भर दिया।
मोहरी की धुन और पारंपरिक पगड़ी से अतिथियों का सम्मान
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम और जिला पंचायत सदस्य लता कोर्राम शामिल हुए। इनके साथ जनपद सदस्य महेश मानिकपुरी, सरपंच रामेश्वर सलाम और उपसरपंच गौतम पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
समाज की परंपरा के अनुरूप अतिथियों का मोहरी की धुन के बीच पुष्प तिलक लगाकर स्वागत किया गया। मंच पर समाज के प्रमुखों और अतिथियों को तिलक एवं गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया गया। पारंपरिक पगड़ी बांधकर अतिथियों का अभिनंदन भी किया गया। स्वागत की इस परंपरा ने स्थानीय संस्कृति, सामाजिक सम्मान और सामुदायिक गौरव की विशिष्ट झलक प्रस्तुत की।
सगा जोहार में दिखी एकता, नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने की पहल
समारोह का मुख्य आकर्षण समाज के लोगों का एक मंच पर एकत्रित होना रहा। सगा जोहार की परंपरा केवल पर्व की शुभकामनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी संबंधों को मजबूत करने, बुजुर्गों के प्रति सम्मान प्रकट करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का माध्यम भी है।
एक-दूसरे से गले मिलना, बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और मिल-जुलकर पर्व मनाना समाज की एकजुटता का प्रतीक बना। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा पुरखों से मिली परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।
वरिष्ठ पदाधिकारी और समाजजन बड़ी संख्या में हुए शामिल
जिला स्तरीय समारोह में समाज के वरिष्ठ सलाहकार सनउ राम नाग, जिला अध्यक्ष बाजारु राम शोरी सहित जिला, ब्लॉक एवं मंडल स्तर के पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य और वरिष्ठजन शामिल हुए।
कार्यक्रम में कृष्णा मंडावी, मनोज कोर्राम, चंदन बघेल, लालसिंह बघेल, ललित पोयाम, कमल कोर्राम, गुड़ बघेल, रमेश मंडावी, सोहन, जोहरु, रमेश बघेल, कालेश्वर, रघुनाथ और रोहित सहित समाज के अनेक लोगों ने सहभागिता निभाई। युवा, महिलाएं और कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संस्कृति और एकजुटता का संदेश देकर संपन्न हुआ समारोह
महिमागवाड़ी में आयोजित नवा खाई सगा जोहार भेंट समारोह नए अन्न के स्वागत के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बना। पारंपरिक पूजा-अर्चना, मोहरी की गूंज और आत्मीय सगा जोहार के बीच आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज की असली ताकत उसकी एकता, सांस्कृतिक पहचान और पुरखों की परंपराओं को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में निहित है।



