रेबीज के खिलाफ एकजुट हुआ नारायणपुर, जागरूकता का दिया संदेश
कृषि महाविद्यालय में ‘मजबूती से साथ-साथ’ थीम पर कार्यक्रम, विद्यार्थियों को बताए संक्रमण, बचाव और उपचार के उपाय

नारायणपुर। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर 28 सितंबर को लिंगो मुदीयाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर में ‘मजबूती से साथ-साथ’ (Strong Together) थीम पर रेबीज जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र तथा जिला पशु चिकित्सा विभाग, नारायणपुर के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इसमें विद्यार्थियों को रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के संक्रमण, लक्षण, बचाव और उपचार के संबंध में वैज्ञानिक जानकारी दी गई।

PPT के जरिए समझाया संक्रमण का खतरा
अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीने के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. नरेंद्र नाग के स्वागत वक्तव्य से हुई। उन्होंने कहा कि रेबीज एक गंभीर बीमारी है, जिसके प्रति समय रहते जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं जागरूक रहने के साथ-साथ रेबीज से बचाव की जानकारी परिवार और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।
जिला पशु चिकित्सा विभाग से डॉ. दीपेश रावटे ने PPT के माध्यम से विद्यार्थियों को रेबीज की गंभीरता, संक्रमण के कारण, पशुओं में दिखाई देने वाले लक्षण, मनुष्यों में संक्रमण के संभावित मार्ग और बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि रेबीज संक्रमित पशु की लार के संपर्क, विशेषकर काटने या खरोंच लगने के माध्यम से मनुष्यों में फैल सकता है। ऐसी स्थिति में घाव को तत्काल साबुन एवं बहते पानी से अच्छी तरह धोना और बिना विलंब चिकित्सा केंद्र पहुंचना आवश्यक है। उन्होंने एंटी-रेबीज टीकाकरण के साथ पशुओं के नियमित टीकाकरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
घबराने के बजाय तत्काल उपचार जरूरी
राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पुष्पराज दीवान ने मंच संचालन करते हुए विद्यार्थियों को रेबीज संक्रमण के तरीकों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने कहा कि पशु के काटने या खरोंच लगने की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल प्राथमिक सावधानी बरतना और चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से रेबीज जागरूकता का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. मदन लाल कुर्रे, डॉ. होमेंद्र सिवाना, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. विवेक कुमार विश्वकर्मा एवं मिस उमा साहू सहित महाविद्यालय का स्टाफ तथा जिला पशु चिकित्सा विभाग के तकनीकी अधिकारी कमल किशोर उपस्थित रहे।
सामूहिक प्रयास से ही प्रभावी रोकथाम
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को रेबीज से बचाव के प्रति जागरूक रहने और प्राप्त जानकारी को अपने परिवार एवं समुदाय तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि रेबीज की रोकथाम सामूहिक जिम्मेदारी है। पशु चिकित्सा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शैक्षणिक संस्थानों और समाज के समन्वित प्रयासों से ही इसके प्रति प्रभावी जागरूकता और रोकथाम सुनिश्चित की जा सकती है।
विश्व रेबीज दिवस की ‘मजबूती से साथ-साथ’ थीम भी इसी एकजुटता और सामूहिक प्रयास का संदेश देती है।




