अबूझमाड़

अबूझमाड़ के गांव से राष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंची रंजिता, बस्तर ओलंपिक से जगी नई उम्मीदें

तीन बार राज्य स्तरीय और दो बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दिखा चुकी हैं दमखम, ग्राम हिकपाड़ की बेटी की उपलब्धियों ने बढ़ाया नारायणपुर का मान; बोलीं— दूरस्थ अंचलों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का सशक्त मंच है बस्तर ओलंपिक

नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम वनांचल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत है तो उन्हें सही अवसर और मंच मिलने की। इस बात को सच साबित कर रही हैं ग्राम हिकपाड़ की प्रतिभाशाली खिलाड़ी रंजिता जुर्री। सीमित संसाधनों और दूरस्थ ग्रामीण परिवेश से निकलकर रंजिता ने खेल के मैदान में अपनी मेहनत और लगन से अलग पहचान बनाई है। अब तक तीन बार राज्य स्तरीय और दो बार राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल परिवार और गांव, बल्कि पूरे नारायणपुर जिले के लिए गौरव की बात हैं।

बचपन का शौक बना सफलता का जुनून

रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर में अध्ययनरत रंजिता को बचपन से ही खेलों के प्रति विशेष रुचि रही है। धीरे-धीरे यही रुचि उनके जीवन का जुनून बन गई। पढ़ाई के साथ नियमित अभ्यास और खेल के प्रति समर्पण ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। लगातार मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

दूरस्थ वनांचल के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचना उनकी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। उनकी यह यात्रा क्षेत्र के उन बच्चों और युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है, जो खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।

बस्तर ओलंपिक को लेकर उत्साहित, बताया प्रतिभाओं के लिए बड़ा मंच

जिले में आयोजित बस्तर ओलंपिक को लेकर रंजिता काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि ऐसे आयोजन ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। पहले गांवों में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता दिखाने के लिए पर्याप्त मंच नहीं मिल पाता था, लेकिन अब बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं।

उनके अनुसार, यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, मेहनत और आपसी सहयोग की भावना विकसित करने का भी माध्यम है।

राज्य और राष्ट्रीय स्तर के अनुभव ने बढ़ाया आत्मविश्वास

रंजिता का मानना है कि खेलों में सफलता पाने के लिए केवल प्रतिभा होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए नियमित अभ्यास, धैर्य, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति भी जरूरी है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और नई चीजें सीखने का अवसर मिला। इन अनुभवों ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया और खेल के प्रति उनका उत्साह बढ़ाया।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग और जिला प्रशासन का जताया आभार

बस्तर ओलंपिक के आयोजन को लेकर रंजिता ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से अबूझमाड़ सहित जिले के सुदूर गांवों में रहने वाले युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा और वे भविष्य में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे।

गांवों से निकलेंगी नई खेल प्रतिभाएं, देश में रोशन होगा बस्तर का नाम

रंजिता को उम्मीद है कि बस्तर ओलंपिक के माध्यम से जिले के अनेक नए खिलाड़ी सामने आएंगे और अपनी मेहनत के दम पर प्रदेश एवं देश में नारायणपुर का नाम रोशन करेंगे। ग्राम हिकपाड़ की इस खिलाड़ी की उपलब्धियां यह संदेश देती हैं कि प्रतिभा किसी भौगोलिक सीमा या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। जरूरत है अवसर, सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास की। यदि प्रतिभाओं को उचित मंच मिले तो अबूझमाड़ के सुदूर गांवों से निकले खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

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