छत्तीसगढ़

कर्रेगुट्टा के जंगलों में माओवादियों का बड़ा हथियार डंप उजागर, 711 बीजीएल ग्रेनेड बरामद

सुरक्षा बलों के सर्च ऑपरेशन में मिली बड़ी कामयाबी, जंगल में छिपाकर रखे गए ग्रेनेड लॉन्चर के गोले बरामद; बीजापुर पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त कार्रवाई से माओवादी नेटवर्क पर बढ़ा दबाव

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों का अभियान लगातार तेज होता जा रहा है। इसी बीच बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा पहाड़ी क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियारों और विस्फोटक सामग्री का बड़ा जखीरा मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने 711 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) के गोले बरामद किए हैं। जंगलों में छिपाकर रखे गए इस जखीरे की बरामदगी को माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, खुफिया सूचनाओं के आधार पर बीजापुर जिला पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 196वीं बटालियन तथा कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन (कोबरा) की 204वीं बटालियन की संयुक्त टीम ने इलाके में सघन तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा पहाड़ियों के आसपास के जंगलों को खंगाला। अभियान के दौरान माओवादियों द्वारा छिपाकर रखे गए 711 बीजीएल के गोले बरामद हुए।

ताड़ापल्ला गांव के जंगलों में मिला विस्फोटक सामग्री का जखीरा

तलाशी अभियान के दौरान उसूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत ताड़ापल्ला गांव में सुरक्षा बलों के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (एफओबी) के आसपास के वन क्षेत्र की सघन तलाशी ली गई। इस दौरान केजी हिल्स के पास जंगल में छिपाकर रखे गए बीजीएल के गोले सामने आए। बताया गया है कि केजी हिल्स, ताड़ापल्ला एफओबी से लगभग डेढ़ किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। बरामद विस्फोटक सामग्री को निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित किया गया।

जंगलों में बढ़ी निगरानी, नक्सली नेटवर्क पर दबाव

कर्रेगुट्टा पहाड़ियां छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित दुर्गम क्षेत्र हैं। यह इलाका लंबे समय से माओवादी गतिविधियों और उनके सुरक्षित ठिकानों के लिए जाना जाता रहा है। सुरक्षा बलों की लगातार सर्चिंग और रणनीतिक अभियानों से अब इस क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

अधिकारियों ने नागरिकों को कर्रेगुट्टा और आसपास की पहाड़ियों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। आशंका जताई गई है कि जंगलों में अन्य विस्फोटक सामग्री या आईईडी भी छिपाकर रखे जा सकते हैं। सुरक्षा बल योजनाबद्ध तरीके से तलाशी अभियान जारी रखेंगे।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई से माओवादी रणनीति को झटका

विशेषज्ञों के अनुसार, बीजीएल जैसे हथियारों और उनसे जुड़े गोला-बारूद का इस्तेमाल सुरक्षा बलों के खिलाफ हमलों में किया जा सकता है। ऐसे में बड़ी संख्या में गोले बरामद होना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण सफलता है। इससे न केवल संभावित हमलों का खतरा कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि माओवादियों की हथियार आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

बस्तर के दुर्गम जंगलों में लगातार चल रहे अभियानों के बीच यह बरामदगी सुरक्षा बलों की सतर्कता और संयुक्त रणनीति का परिणाम मानी जा रही है।

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