नारायणपुर

जहां कभी गूंजती थी ‘जन अदालत’ की दहशत, अब वहीं ग्रामीण तय कर रहे गांव का भविष्य

कच्चापाल में पेड़ की छांव तले सजी ग्राम सभा, बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने लिया हिस्सा; लोकतंत्र की जमीनी तस्वीर आई सामने

गांधी जयंती पर प्रदेशभर में विशेष ग्राम सभाएं, विकसित ग्राम पंचायत प्लान के लिए ग्रामीणों से लिए गए सुझाव

नारायणपुर, 2 अक्टूबर। गांधी जयंती के अवसर पर शुक्रवार को प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों में आयोजित विशेष ग्राम सभाओं के बीच नारायणपुर जिले के दूरस्थ एवं कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे ओरछा विकासखंड की ग्राम पंचायत कच्चापाल से लोकतंत्र की एक अलग तस्वीर सामने आई। यहां बड़ी संख्या में ग्रामीण एक पेड़ की छांव तले एकत्र हुए और ग्राम सभा में अपने गांव की जरूरतों, विकास प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

कच्चापाल की यह ग्राम सभा इसलिए भी खास रही कि बस्तर के जिन इलाकों में कभी नक्सली हिंसा और तथाकथित ‘जन अदालतों’ का भय रहा, उन्हीं क्षेत्रों में अब ग्रामीण संवैधानिक ग्राम सभा के मंच पर बैठकर अपनी बात रख रहे हैं। ग्रामीणों की सहभागिता और सामूहिक संवाद ने लोकतांत्रिक व्यवस्था की जमीनी पहुंच को सामने रखा।

पेड़ की छांव तले हुआ लोकतांत्रिक संवाद

कच्चापाल में ग्राम सभा के लिए किसी बड़े सभागार या विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ी। गांव के लोग पेड़ के नीचे ही एकत्र हुए और सामूहिक रूप से स्थानीय जरूरतों एवं विकास कार्यों पर चर्चा की। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी से ग्राम सभा जीवंत नजर आई। महिलाओं सहित ग्रामीणों ने भी चर्चा में भाग लेकर गांव से जुड़े विभिन्न विषय सामने रखे।

प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों में भी विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को अपने गांव की विकास प्राथमिकताएं तय करने की प्रक्रिया से जोड़ा गया। ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजनांतर्गत विकसित ग्राम पंचायत प्लान (वीजीपीपी) तैयार करने के लिए स्थानीय आवश्यकताओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों से सुझाव लिए गए।

गांव की जरूरतों से तय होगा विकास का रोडमैप

विशेष ग्राम सभाओं में जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की स्थानीय जरूरत के अनुसार पहचान पर जोर दिया गया। रिफॉर्म उत्सव के तहत ग्रामीणों को 125 दिवस रोजगार की वैधानिक गारंटी, समय पर रोजगार एवं मजदूरी भुगतान तथा योजना के तहत अनुमेय 375 प्रकार के कार्यों की जानकारी भी दी गई।

ग्राम सभाओं से प्राप्त सुझावों को विकसित ग्राम पंचायत प्लान का आधार बनाया जाएगा। आगामी चरण में गांव के उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय आवश्यकताओं का आकलन कर विकास योजना का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

कच्चापाल ने दिखाई बदलते बस्तर की तस्वीर

नारायणपुर के दूरस्थ कच्चापाल में पेड़ की छांव के नीचे हुई यह ग्राम सभा महज एक बैठक नहीं रही। कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीणों का एक साथ बैठना, अपनी बात रखना और गांव के विकास की प्राथमिकताओं पर चर्चा करना बदलते बस्तर की तस्वीर सामने लाता है।

जहां कभी भय और हिंसा के बीच तथाकथित ‘जन अदालतों’ की चर्चा होती थी, वहीं अब ग्रामीण ग्राम सभा के संवैधानिक मंच पर बैठकर अपने गांव की जरूरतों और विकास के भविष्य पर संवाद कर रहे हैं। यही तस्वीर ग्रामीण लोकतंत्र की जमीनी मजबूती और भागीदारी का संदेश देती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button