एक सप्ताह भी नहीं टिका लाखों का जिम पार्क! उखड़ने लगे उपकरण, टूटने लगा सीमेंट
स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल सिंगोड़ीतराई के सामने बने पार्क की निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, शुरुआती दिनों में ही सामने आई खामियां; स्थानीय लोगों ने तकनीकी जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की उठाई मांग

नारायणपुर। सरकारी राशि से विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर निगरानी कितनी प्रभावी है, इसका सवाल नारायणपुर में बने एक जिम पार्क की स्थिति ने खड़ा कर दिया है। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल सिंगोड़ीतराई के सामने लाखों रुपये की लागत से निर्मित जिम पार्क को अभी एक सप्ताह भी पूरा नहीं हुआ है और यहां लगाए गए व्यायाम उपकरण हिलने लगे हैं। उपकरणों के आसपास किया गया सीमेंट निर्माण भी जगह-जगह से टूटने लगा है। निर्माण के शुरुआती दिनों में ही सामने आई इस स्थिति ने कार्य की गुणवत्ता और संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपकरणों के आधार कमजोर, सीमेंट भी दे रहा जवाब
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों में जिम पार्क के उपकरणों के आधार कमजोर और क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहे हैं। कई जगह उपकरणों के आसपास का सीमेंट टूटता नजर आ रहा है। इसके अलावा पार्क परिसर में प्लास्टिक और निर्माण सामग्री के अवशेष भी बिखरे पड़े हैं। जिस पार्क को लोगों के स्वास्थ्य और नियमित व्यायाम की सुविधा के उद्देश्य से तैयार किया गया है, उसकी शुरुआती हालत ही निर्माण की मजबूती को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
सुबह व्यायाम करने आने वालों ने उठाए सवाल
पार्क में सुबह व्यायाम करने पहुंचने वाले लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान ही कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे थे। उनका आरोप है कि यदि निर्धारित निर्माण मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो महज कुछ दिनों में उपकरणों का हिलना और सीमेंट का टूटना जैसी स्थिति सामने नहीं आती।
लोगों का कहना है कि जिम पार्क केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुविधा और स्वास्थ्य के लिए बनाया गया है। ऐसे में उपकरणों का कमजोर होना उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर चिंता का विषय है।
लाखों की लागत, फिर गुणवत्ता की जांच किसने की?
जिम पार्क के निर्माण में लाखों रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किस अधिकारी को सौंपी गई थी? क्या कार्य पूरा होने के बाद संबंधित विभाग के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था? क्या उपकरणों की मजबूती और सीमेंट निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच की गई थी? यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप पूरा हुआ था, तो इतनी कम अवधि में यह स्थिति कैसे बन गई?
स्थानीय लोगों के आरोपों और सामने आई तस्वीरों ने सरकारी राशि के उपयोग तथा निर्माण कार्य की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, फिलहाल निर्माण में भ्रष्टाचार अथवा सरकारी राशि के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी मानी जा रही है।
तकनीकी जांच के साथ जिम्मेदारी तय करने की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से जिम पार्क के निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, उपकरणों के आधार, सीमेंट की गुणवत्ता और निर्धारित मापदंडों की जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।
यदि जांच में निर्माण संबंधी अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और आवश्यक सुधार कार्य कराया जाए, ताकि सरकारी राशि का वास्तविक लाभ आम नागरिकों को मिल सके।
अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें
एक ओर शहर में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर निर्माण के कुछ ही दिनों में ऐसी खामियां सामने आना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम पार्क की गुणवत्ता की जांच कराकर जवाबदेही तय करने की दिशा में क्या कदम उठाता है।
बड़ा सवाल : जब लाखों रुपये की लागत से बना जिम पार्क एक सप्ताह भी अपनी मजबूती नहीं दिखा पा रहा, तो निर्माण की गुणवत्ता जांचने और सरकारी राशि की जवाबदेही तय करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?



