तीन साल से चल रही कंप्यूटर संस्था की मान्यता पर सवाल! विद्यार्थियों के डिप्लोमा की वैधता जांचने कलेक्टर-एसपी से गुहार
विजय सलाम ने माँ कंप्यूटर संस्था के पंजीयन, संबद्धता और प्रमाणपत्रों की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग; बोले—बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

नारायणपुर। जिले में पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित माँ कंप्यूटर संस्था की मान्यता और विद्यार्थियों को जारी किए जा रहे कंप्यूटर डिप्लोमा की वैधता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। संस्था किस विश्वविद्यालय अथवा सक्षम प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त है और उसके प्रमाणपत्र किन सरकारी एवं शैक्षणिक कार्यों में मान्य हैं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने का मामला अब जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। इस संबंध में विजय सलाम ने जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन सौंपकर संस्था की कार्यप्रणाली और मान्यता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

पान ठेले के लिए अनुमति जरूरी, फिर शिक्षा संस्था के संचालन पर सवाल क्यों?
विजय सलाम ने अपने आवेदन में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि पान ठेला जैसे छोटे व्यवसाय के संचालन के लिए भी नगर पालिका से एनओसी और आवश्यक अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन जिले में तीन वर्षों से संचालित कंप्यूटर संस्था की मान्यता को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ रही है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि संस्था किस आधार पर संचालित हो रही है और संबंधित विभागों ने अब तक इसकी मान्यता एवं संचालन संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया?
गरीब परिवारों की मेहनत की कमाई दांव पर
विजय सलाम ने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और रोजगार दिलाने की उम्मीद में कंप्यूटर संस्थानों में दाखिला कराते हैं। इसके लिए वे अपनी मेहनत की कमाई फीस के रूप में खर्च करते हैं। यदि किसी संस्था के पास वैध मान्यता नहीं है अथवा उसके द्वारा जारी प्रमाणपत्र सरकारी और शैक्षणिक स्तर पर मान्य नहीं हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में विद्यार्थियों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय संबंधित संस्था और उसकी जवाबदेही की जांच होनी चाहिए।
पंचायत सचिव भर्ती के दस्तावेजों का मामला भी आया सामने
मामले में ग्राम पंचायत सचिव भर्ती 2026-27 के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों का विषय भी उठाया गया है। विजय सलाम ने जिला पंचायत नारायणपुर द्वारा जारी उस पत्र का हवाला दिया है, जिसमें दस्तावेजों के परीक्षण के दौरान कुछ त्रुटियों एवं कमियों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में संबंधित कंप्यूटर डिप्लोमा और उसे जारी करने वाली संस्था की मान्यता का आधिकारिक स्तर पर सत्यापन कराया जाना आवश्यक बताया गया है।
प्रशासन से पांच बिंदुओं पर जांच की मांग
विजय सलाम ने जिला प्रशासन से मांग की है कि माँ कंप्यूटर संस्था के पंजीयन, विश्वविद्यालय अथवा सक्षम प्राधिकरण से संबद्धता, संचालन की अनुमति और विद्यार्थियों को अब तक जारी किए गए डिप्लोमा की विस्तृत जांच कराई जाए। इसके साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाए कि संस्था के प्रमाणपत्र किन-किन सरकारी नौकरियों, भर्ती प्रक्रियाओं और शैक्षणिक कार्यों में मान्य हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में मान्यता संबंधी अनियमितता, फर्जी दस्तावेज या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संस्था के जिम्मेदार संचालकों एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
‘यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, विद्यार्थियों के भविष्य के लिए’
विजय सलाम ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष के विरोध का नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अधिकारों और उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि संस्था के पास वैध मान्यता और आवश्यक अनुमति है, तो उसके प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में किसी प्रकार का संदेह न रहे। वहीं, यदि मान्यता नहीं है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है और संस्था की मान्यता एवं प्रमाणपत्रों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद क्या सामने आती है।




