बस्तर

लिंगेश्वरी माता के दरबार में आस्था का महासैलाब

साल में सिर्फ एक दिन खुली गुफा, संतान की कामना लेकर पहुंचे हजारों दंपति; एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

फरसगांव/कोंडागांव। कोंडागांव जिले के फरसगांव क्षेत्र स्थित आलोर-झाटीबन की पहाड़ी गुफा में विराजमान मां लिंगेश्वरी का दरबार बुधवार को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। साल में केवल एक दिन खुलने वाले इस गुफा मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मां के दर्शन, मनोकामना पूर्ति और विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना लेकर छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। बुधवार सुबह से लेकर रात तक मंदिर परिसर और दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

मन्नत पूरी होने पर बच्चों को साथ लेकर पहुंचे दंपति

मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष 1500 से अधिक ऐसे दंपतियों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया, जिन्होंने वर्ष 2025 में मां लिंगेश्वरी के दरबार में संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने के बाद ये दंपति वर्ष 2026 में अपनी संतान को साथ लेकर मां के दर्शन और आभार प्रकट करने पहुंचे।

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मां लिंगेश्वरी के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष गुफा मंदिर के खुलने के अवसर पर बड़ी संख्या में दंपति यहां पहुंचते हैं।

तीन दिन पहले से ही पहुंचने लगे थे श्रद्धालु

मां लिंगेश्वरी के दर्शन के लिए गुफा खुलने से करीब तीन दिन पहले से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कई श्रद्धालु दो दिन पहले ही मंदिर क्षेत्र में पहुंचकर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। बुधवार सुबह गुफा के द्वार खुलने के बाद दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं।

मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां लिंगेश्वरी के दर्शन किए। भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए प्रशासन और पुलिस की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे।

गुफा के भीतर मिले शेर के पदचिह्न

मंदिर के पुजारी के अनुसार गुफा के भीतर प्रवेश करने पर सबसे पहले शेर के पदचिह्न दिखाई देते हैं। स्थानीय मान्यता में इन पदचिह्नों को अच्छी बारिश, बेहतर फसल और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मां लिंगेश्वरी के दरबार में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पूजा-अर्चना करते हैं।

बस्तर महाराजा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने किए दर्शन

मां लिंगेश्वरी के दर्शन करने वालों में बस्तर महाराजा कमलचंद भंजदेव भी अपनी धर्मपत्नी के साथ शामिल रहे। उन्होंने गुफा में प्रवेश कर विधिवत पूजा-अर्चना की और मां से आशीर्वाद लिया।

इसके अलावा केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, दंतेवाड़ा विधायक चैतराम अटामी, पूर्व सांसद मोहन मंडावी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मंदिर पहुंचकर मां लिंगेश्वरी के दर्शन किए।

380 जवानों ने संभाली सुरक्षा व्यवस्था

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था में एक एडिशनल एसपी, पांच डीएसपी, आठ निरीक्षक सहित करीब 380 जवान तैनात रहे। एसपी पंकज चन्द्रा स्वयं सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे थे।

मंदिर परिसर से लेकर प्रवेश मार्ग तक पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए स्वास्थ्य सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं।

रात 12 बजे बंद हुए गुफा के द्वार

मां लिंगेश्वरी के दर्शन के लिए गुफा के द्वार बुधवार को केवल एक दिन के लिए खोले गए थे। मंदिर समिति के अनुसार श्रद्धालुओं को रात 12 बजे तक दर्शन की अनुमति दी गई। इसके बाद श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद गुफा के द्वार पुनः बंद कर दिए गए।

साल में केवल एक दिन मां लिंगेश्वरी के दर्शन का अवसर मिलने के कारण बुधवार को पूरे दिन मंदिर परिसर में आस्था और श्रद्धा का अद्भुत नजारा देखने को मिला। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु दर्शन के बाद अपनी मनोकामना और आस्था के साथ वापस लौटे।

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