रेशम से खुलेगी समृद्धि की राह
बस्तर में टसर कीट पालन और धागाकरण को मिलेगा बढ़ावा, हितग्राहियों को बांटे प्रोत्साहन चेक

प्रशिक्षण सह अलंकरण समारोह में ग्रामीण आजीविका और आत्मनिर्भरता पर जोर, धागाकरण इकाई में महिलाओं के कौशल की सराहना
जगदलपुर, 2 अक्टूबर। बस्तर के ग्रामीण अंचलों में रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में टसर रेशम उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में ग्रामोद्योग विभाग के रेशम प्रभाग एवं जिला प्रशासन बस्तर के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को कालीपुर रोड, धरमपुरा स्थित रेशम धागाकरण इकाई में टसर रेशम कीट पालन एवं रेशम धागाकरण प्रशिक्षण सह अलंकरण समारोह आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप ने टसर रेशम उत्पादन और कीट पालन से जुड़े स्व-सहायता समूहों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों से संवाद किया। उन्होंने समूहों से उनकी आजीविका गतिविधियों, मैदानी अनुभवों और रेशम उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी ली।
प्रोत्साहन चेक से बढ़ा हौसला
रेशम उत्पादन को प्रोत्साहित करने और हितग्राहियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से जिला पंचायत अध्यक्ष ने संबंधित स्व-सहायता समूहों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहन चेक वितरित किए। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों को रोजगार के साधन में बदलकर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में टसर रेशम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कोकून से धागे तक देखी पूरी प्रक्रिया
चेक वितरण के बाद श्रीमती कश्यप ने रेशम धागाकरण इकाई का अवलोकन किया। उन्होंने कोकून से रेशम का धागा तैयार करने की संपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया को करीब से देखा और इकाई में कार्यरत महिला कामगारों के कौशल की सराहना की। उन्होंने प्रशिक्षण और तकनीकी दक्षता के माध्यम से रेशम क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को आजीविका के नए अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया।
वनांचल में रोजगार की बड़ी संभावनाएं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप ने कहा कि बस्तर की उर्वरा मिट्टी और वनांचल में रोजगार एवं आत्मनिर्भरता की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि टसर रेशम से जुड़े ग्रामीणों और स्व-सहायता समूहों को आधुनिक प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन और वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराकर स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को मजबूत करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि रेशम उत्पादन से जुड़े समूहों को लगातार प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था
समारोह में टसर कीट पालन, रेशम उत्पादन और धागाकरण से जुड़ी गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। रेशम धागाकरण इकाई में महिला कामगारों द्वारा किए जा रहे कार्यों को आजीविका के साथ कौशल विकास से जोड़कर देखा गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री बलदेव मंडावी, उप संचालक (रेशम) श्री रोशन चंद्राकर, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

