नारायणपुर

खनन क्षेत्र में तेंदुए की दस्तक, जंगल के बदलते मिजाज ने बढ़ाई चिंता

रावघाट ब्लॉक-ए में वाहन के सामने बेखौफ बैठा तेंदुआ, अंजरेल के बाद दूसरी घटना; मशीनों की बढ़ती आवाजाही के बीच वन्यजीवों के आवास और कॉरिडोर पर उठे सवाल

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। रावघाट के घने जंगलों में लगातार बढ़ रही खनन गतिविधियों के बीच वन्यजीवों की मौजूदगी अब माइनिंग क्षेत्र के भीतर तक दिखाई देने लगी है। रावघाट माइंस के ब्लॉक-ए क्षेत्र में दो दिन पहले रात के समय एक तेंदुआ अचानक एक वाहन के सामने आकर बैठ गया। माइनिंग क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों ने तेंदुए को देखा और उसकी तस्वीरें एवं वीडियो कैमरे में कैद किए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेंदुआ कुछ समय तक वाहन के सामने ही बैठा रहा। वाहन की रोशनी में उसका पूरा शरीर साफ दिखाई दे रहा था। कुछ देर बाद तेंदुआ वहां से जंगल की ओर चला गया।

तेंदुए के माइनिंग जोन तक पहुंचने की इस घटना ने एक बार फिर रावघाट क्षेत्र में खनन गतिविधियों और वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेपर कटिंग में भी घटना को रावघाट ब्लॉक-ए में तेंदुए की मौजूदगी और अंजरेल की पूर्व घटना के संदर्भ में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है।

अंजरेल के बाद दूसरी बड़ी घटना

रावघाट क्षेत्र में माइनिंग गतिविधियों के बीच तेंदुए की मौजूदगी का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अंजरेल माइंस क्षेत्र में मादा तेंदुआ और उसके शावकों की मौजूदगी सामने आ चुकी है। उस समय भी तेंदुए की मौजूदगी ने क्षेत्र में वन्यजीवों के आवागमन और उनके प्राकृतिक आवास को लेकर ध्यान खींचा था।

अब ब्लॉक-ए में रात के समय तेंदुए के वाहन के सामने आ जाने की घटना ने इस सवाल को और गंभीर कर दिया है कि क्या जंगल के भीतर वन्यजीवों के पारंपरिक आवागमन वाले क्षेत्र अब मानवीय गतिविधियों के दायरे में आ रहे हैं?

मशीनों की गूंज के बीच वन्यजीवों की दस्तक

रावघाट की पहाड़ियों और घने जंगलों में लंबे समय से वन्यजीवों की मौजूदगी रही है। लेकिन खनन गतिविधियों के बढ़ते दायरे के बीच तेंदुए का माइनिंग क्षेत्र तक पहुंचना जंगल और वन्यजीवों की बदलती परिस्थितियों की ओर ध्यान खींच रहा है।

माइनिंग क्षेत्र में लगातार भारी मशीनों, वाहनों और अन्य गतिविधियों की आवाजाही होती है। ऐसे में रात के समय काम करने वाले कर्मचारियों के सामने अचानक वन्यजीव आ जाने की घटनाएं सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। पेपर में भी रात में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष सतर्कता की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है।

सिकुड़ते जंगल, बदलता वन्यजीव कॉरिडोर?

तेंदुए का माइनिंग क्षेत्र तक पहुंचना केवल एक रोमांचक दृश्य नहीं है। यह वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, आवाजाही के रास्तों और संभावित कॉरिडोर पर भी ध्यान देने की जरूरत बताता है।

खनन गतिविधियों के साथ जंगल के भीतर मानवीय गतिविधियों का दायरा बढ़ता है तो वन्यजीवों के आवागमन वाले क्षेत्रों में भी बदलाव की संभावना रहती है। ऐसे में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, नियमित निगरानी और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।

वन विभाग और परियोजना प्रबंधन के सामने चुनौती

ब्लॉक-ए और अंजरेल क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी सामने आने के बाद वन विभाग और परियोजना प्रबंधन के सामने चुनौती यह है कि खनन गतिविधियों के साथ वन्यजीवों के आवागमन वाले क्षेत्रों की भी नियमित निगरानी हो।

रात के समय माइनिंग क्षेत्र में आवाजाही, संवेदनशील स्थानों पर निगरानी और कर्मचारियों को वन्यजीवों की मौजूदगी के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी देना जरूरी होगा। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संभावित टकराव की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।

अब सवाल सिर्फ तेंदुए के दिखने का नहीं

ब्लॉक-ए में वाहन के सामने बैठा तेंदुआ कैमरे में कैद हुआ तो यह दृश्य तेजी से चर्चा में आ गया। लेकिन इस घटना के पीछे बड़ा सवाल यह है कि रावघाट के जंगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्र और बढ़ती खनन गतिविधियों के बीच संतुलन कैसे कायम रखा जाए।

अंजरेल में मादा तेंदुआ और शावकों की मौजूदगी के बाद अब ब्लॉक-ए में तेंदुए की दस्तक यह संकेत देती है कि रावघाट क्षेत्र में वन्यजीवों की गतिविधियों को लेकर निगरानी और सतर्कता को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। जंगल, खनन और वन्यजीव—तीनों के बीच संतुलन ही आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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