धान में सफेद माहू का बढ़ा प्रकोप, किसानों को सतर्क रहने की सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र ने जारी की एडवाइजरी, एक कल्ले पर औसतन 2 माहू मिलें तो तत्काल नियंत्रण जरूरी

नारायणपुर। जिले में इन दिनों धान की फसल में विभिन्न कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में धान की फसल पर सफेद माहू (सोगाटेला फुर्सिफेरा) का प्रकोप भी सामने आया है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणपुर ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और प्रारंभिक स्तर पर ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
खड़े पानी और अधिक नत्रजन से बढ़ सकता है प्रकोप
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की रोपाई के बाद खेत में लगातार पानी खड़ा रहने, आवश्यकता से अधिक नत्रजनयुक्त उर्वरक के इस्तेमाल तथा अत्यधिक सघन फसल की स्थिति में सफेद माहू का प्रकोप बढ़ सकता है। गर्म तापमान, अधिक आर्द्रता, बादल छाए रहने अथवा लंबे समय तक तेज धूप रहने पर भी इसकी संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना रहती है।
सफेद माहू के शिशु एवं वयस्क मुख्य रूप से पौधे के ऊपरी हिस्से, विशेषकर पत्ती और तने के जोड़ के आसपास पाए जाते हैं। ये पौधों का रस चूसकर फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके साथ ही पौधों पर चिपचिपा मधुरस छोड़ते हैं।
काली फफूंद से घट सकता है प्रकाश संश्लेषण
माहू द्वारा छोड़े गए मधुरस के कारण पत्तियों की सतह पर काली कालिख जैसी सूटी मोल्ड फफूंद विकसित हो सकती है। इससे पत्तियों की प्रकाश अवशोषण क्षमता प्रभावित होती है और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कम होने से पौधों की वृद्धि एवं उपज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अधिक प्रकोप होने पर धान की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं और बाद में ‘हॉपर बर्न’ जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खेत में अलग-अलग स्थानों पर पैच के रूप में पौधों का सूखना भी अधिक प्रकोप का संकेत माना जा सकता है।
एक कल्ले पर 2 माहू मिलें तो नियंत्रण जरूरी
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि वे नियमित रूप से खेतों का निरीक्षण करें और पत्ती-तने के जोड़ के आसपास सफेद माहू की मौजूदगी पर विशेष नजर रखें। एक कल्ले पर औसतन 2 सफेद माहू मिलने पर इसे आर्थिक नुकसान स्तर (ETL) माना गया है। ऐसी स्थिति में तत्काल नियंत्रण उपाय अपनाना आवश्यक है।
प्रारंभिक अवस्था में प्रबंधन के लिए नीम तेल 3 प्रतिशत की 15 लीटर प्रति हेक्टेयर अथवा नीम बीज गिरी अर्क 5 प्रतिशत की 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा के उपयोग की सलाह दी गई है।
ETL से अधिक प्रकोप पर अनुशंसित कीटनाशक
अधिक प्रकोप की स्थिति में कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार 200 लीटर पानी प्रति एकड़ में अनुशंसित कीटनाशक का घोल तैयार कर छिड़काव किया जा सकता है। विकल्प के तौर पर—
- पाइमेट्रोजिन 50 WG – 120 ग्राम प्रति एकड़
- डाइनोटेफ्यूरान 20 SG – 80 ग्राम प्रति एकड़
- ऐसीटामिप्रिड 20 SP – 60 ग्राम प्रति एकड़
का उपयोग अनुशंसा के अनुसार किया जा सकता है।
एक समय में एक ही कीटनाशक का करें प्रयोग
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को स्पष्ट सलाह दी है कि एक समय में केवल एक ही अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग करें। अनावश्यक रूप से कीटनाशकों का छिड़काव नहीं करें तथा दवा का उपयोग करते समय उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों और सुरक्षा सावधानियों का अनिवार्य रूप से पालन करें।
कृषि विज्ञान केंद्र, नारायणपुर ने किसानों से अपील की है कि धान की फसल में सफेद माहू के लक्षण दिखाई देने पर नियमित निगरानी रखें और प्रकोप की स्थिति में कृषि विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।



