दर्द से कराहते ग्रामीण के लिए फरिश्ता बने जवान, बाइक से पहुंचाया अस्पताल
अबूझमाड़ में सड़क संपर्क बाधित होने के बावजूद 38वीं वाहिनी का त्वरित रेस्क्यू; पहले दी प्राथमिक चिकित्सा, फिर मोटरसाइकिल से CHC ओरछा भेजा

नारायणपुर/ओरछा, 30 सितंबर। अबूझमाड़ के दुर्गम इलाके में सड़क संपर्क बाधित होने के कारण जब एक 55 वर्षीय ग्रामीण को अस्पताल पहुंचाने के लिए सामान्य वाहन तक उपलब्ध नहीं हो सका, तब 38वीं वाहिनी के जवानों ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए उसे समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। कमर में अत्यधिक दर्द से परेशान ग्रामीण को पहले सीओबी आदेर में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए मोटरसाइकिल से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ओरछा पहुंचाया गया।

कमर के तेज दर्द से परेशान होकर पहुंचा था सीओबी
जानकारी के अनुसार मासा राम गोटा, पिता/केयर ऑफ गुड्डी राम गोटा, निवासी ग्राम कुडमेल, तहसील ओरछा, जिला नारायणपुर, उम्र करीब 55 वर्ष, 29 सितंबर को कमर में अत्यधिक दर्द की समस्या के चलते चिकित्सा सहायता के लिए 38वीं वाहिनी के सीओबी आदेर पहुंचे।
मरीज की स्थिति को देखते हुए वहां मौजूद जवानों ने तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई और उसे आगे बेहतर उपचार दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था शुरू की।
सड़क बाधित, एंबुलेंस की आवाजाही मुश्किल
अबूझमाड़ के इस क्षेत्र में सड़क मार्ग बाधित होने के कारण फोर-व्हीलर और एंबुलेंस की आवाजाही संभव नहीं थी। ऐसे में मरीज को सुरक्षित रूप से आगे पहुंचाना जवानों के सामने बड़ी चुनौती थी।
सीओबी आदेर और सीओबी एडजूम के जवानों ने आपसी समन्वय से मरीज को पहले सुरक्षित रूप से आगे पहुंचाने की व्यवस्था की। विषम परिस्थितियों में उपलब्ध साधनों का उपयोग करते हुए उसे सीओबी एडजूम तक पहुंचाया गया।
दर्द बढ़ा तो तत्काल दिया उपचार
सीओबी एडजूम पहुंचने के दौरान मरीज का दर्द और बढ़ गया। जवानों ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वहां तत्काल प्राथमिक चिकित्सीय उपचार उपलब्ध कराया। इसके बाद मरीज को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता को देखते हुए उसे जल्द से जल्द CHC ओरछा भेजने का निर्णय लिया गया।
मोटरसाइकिल बनी सहारा, जवान लेकर पहुंचे अस्पताल
सड़क मार्ग की चुनौती के बीच जवानों ने समय गंवाए बिना मोटरसाइकिल से मरीज को CHC ओरछा पहुंचाने की व्यवस्था की। जवानों की मदद से ग्रामीण को सुरक्षित रूप से मोटरसाइकिल पर बैठाकर आगे ले जाया गया।
दुर्गम इलाके में सामान्य वाहन और एंबुलेंस की पहुंच नहीं होने के बावजूद जवानों के त्वरित प्रयास से मरीज को उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा सका।
सुरक्षा के साथ सेवा का भी संदेश
38वीं वाहिनी की यह पहल अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में सुरक्षा बलों की मानवीय भूमिका को भी सामने लाती है। विषम भौगोलिक परिस्थितियों और बाधित सड़क संपर्क के बीच स्थानीय ग्रामीण को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में जवानों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
38वीं वाहिनी की ओर से स्थानीय ग्रामीणों की सहायता और मानवीय सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर प्राथमिकता देने की बात कही गई है।




