नारायणपुर

अबूझमाड़ में गूंजी स्कूल की घंटी, बदली तस्वीर

नक्सलवाद की छाया से निकलकर ज्ञान की रोशनी तक पहुंच रहे बच्चे; 47 विद्यालयों के जरिए करीब 941 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े

नारायणपुर, 1 अक्टूबर। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों, नदी-नालों और कठिन पगडंडियों के बीच बसे अबूझमाड़ में शिक्षा की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों और भौगोलिक दुर्गमता के कारण जिन इलाकों में विद्यालयों का संचालन चुनौती बना रहा, वहां अब फिर से बच्चों की आवाजें सुनाई देने लगी हैं। स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई है और बच्चे किताब-कॉपी लेकर अपने भविष्य की नई इबारत लिख रहे हैं।

अबूझमाड़ में शिक्षा की यह वापसी केवल विद्यालयों के भवनों में कक्षाएं शुरू होने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से शिक्षा से दूर रहे बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम भी सामने आने लगा है।

10 बंद विद्यालय फिर शुरू, 243 बच्चों ने लौटकर थामी किताबें

विकासखंड अबूझमाड़-ओरछा में नक्सली गतिविधियों के कारण बंद कराए गए 10 विद्यालयों को पुन: प्रारंभ किया गया है। इन विद्यालयों में वर्तमान में 243 बच्चे अध्ययनरत हैं।

कभी इन स्कूलों में सन्नाटा पसरा रहता था, लेकिन परिस्थितियों में बदलाव के साथ यहां फिर से पढ़ाई का माहौल बन रहा है। विद्यालयों का पुन: संचालन उन इलाकों में शिक्षा की पहुंच बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नियद नेल्लांर योजना से दुर्गम इलाकों तक पहुंची शिक्षा

अबूझमाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में नियद नेल्लांर योजना के अंतर्गत चार प्राथमिक शालाओं का संचालन शुरू किया गया है। इनमें प्राथमिक शाला जड़ड़ा, ताड़ोबेडा, इरकभट्टी और एनमेटा शामिल हैं।

इन चार विद्यालयों में 115 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच इन विद्यालयों का संचालन शुरू होने से ऐसे क्षेत्रों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर शिक्षा का अवसर मिल रहा है।

‘स्कूल केईंता’ ने खोजे स्कूल से दूर हुए बच्चे

शिक्षा से वंचित बच्चों को चिन्हांकित करने के लिए चलाए गए ‘स्कूल केईंता’ अभियान के तहत पूरे अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वे किया गया। अभियान के दौरान शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को चिन्हांकित किया गया।

इन बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए 33 वैकल्पिक शालाओं का संचालन शुरू किया गया है। इन वैकल्पिक शालाओं में करीब 583 बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों को शिक्षा के साथ शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

कुल 941 बच्चों तक पहुंची शिक्षा की रोशनी

अबूझमाड़ में शिक्षा की इस पहल का आंकड़ा देखें तो तस्वीर काफी स्पष्ट होती है—

  • 10 पुन: प्रारंभ विद्यालय — 243 बच्चे
  • नियद नेल्लांर योजना के 4 विद्यालय — 115 बच्चे
  • 33 वैकल्पिक शालाएं — करीब 583 बच्चे
  • कुल — करीब 941 बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े

दुर्गम पगडंडियों से स्कूल तक पहुंची उम्मीद

अबूझमाड़ की बदलती तस्वीर में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बच्चों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी जंगल, पहाड़, नदी-नाले और दुर्गम रास्ते शिक्षा की राह में बड़ी चुनौती थे, वहीं अब विद्यालयों का संचालन हो रहा है।

शिक्षा की यह पहल बच्चों को केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं करती, बल्कि उन्हें भविष्य के बेहतर अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। विद्यालयों में लौटे बच्चे अब किताबों के साथ अपने सपनों को आकार देने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

शिक्षा की लौ बनी बदलाव की पहचान

अबूझमाड़ में विद्यालयों का पुन: संचालन और वैकल्पिक शालाओं की शुरुआत क्षेत्र में बदलते वातावरण की एक तस्वीर प्रस्तुत करती है। करीब 941 बच्चों का शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ना इस बदलाव का महत्वपूर्ण आंकड़ा है।

दुर्गम भूगोल के बीच शिक्षा की यह लौ अब केवल स्कूल भवनों तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य और उनके सपनों तक पहुंच रही है। अबूझमाड़ में गूंजती स्कूल की घंटी और बच्चों की पढ़ाई की आवाज उस नई उम्मीद की पहचान बन रही है, जहां शिक्षा धीरे-धीरे हर बच्चे तक पहुंचने की राह बना रही है।

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