नदी-तालाब नहीं, घर के आंगन में हुआ बप्पा का विसर्जन
सोनी स्वीट्स संचालक और उनके पुत्र ने पेश की मिसाल, ‘मिट्टी के गणेश, घर पर ही विसर्जन’ का दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

नारायणपुर। गणेशोत्सव की आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पुराना बस स्टैंड स्थित सोनी स्वीट्स के संचालक और उनके पुत्र ने अनंत चतुर्दशी पर अनूठी पहल की। परिवार ने गणेश प्रतिमा के विसर्जन के लिए नदी, तालाब या किसी अन्य जलस्रोत का रुख करने के बजाय घर के आंगन में ही मिट्टी के गणेश का विसर्जन किया। पिता-पुत्र की इस पहल ने धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी का संदेश दिया।
परिवार ने इस वर्ष प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिमा के स्थान पर शुद्ध मिट्टी से निर्मित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित की थी। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद परिवार ने प्रतिमा को बाहर ले जाने के बजाय घर में ही विसर्जित करने का निर्णय लिया।

फूलों से सजे जलपात्र में किया विसर्जन
विसर्जन के लिए घर में ही एक बड़े बर्तन में स्वच्छ जल भरा गया। जल में गुलाब और गेंदे के फूल अर्पित किए गए। पारंपरिक परिधान में सोनी स्वीट्स संचालक और भगवा फेटा पहने उनके पुत्र ने परिवार के साथ मिलकर गणपति बप्पा की पूजा की। इसके बाद ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष के बीच मिट्टी की प्रतिमा को उसी जलपात्र में विसर्जित किया गया।
मिट्टी की प्रतिमा कुछ ही समय में जल में घुलकर विलीन हो गई। इसके बाद विसर्जन के जल को नाली या किसी जलस्रोत में बहाने के बजाय घर की तुलसी और बगीचे के पौधों में समर्पित किया गया। इस तरह धार्मिक परंपरा निभाने के साथ परिवार ने जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने का भी प्रयास किया।
पिता-पुत्र ने दिया साफ संदेश
सोनी स्वीट्स संचालक एवं उनके पुत्र ने कहा कि गणेशोत्सव आस्था और श्रद्धा का पर्व है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की गणेश प्रतिमा का घर पर विसर्जन करने से नदी-तालाबों में प्रतिमा विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि “मिट्टी के गणेश लाएं और घर पर ही विसर्जन करें। इससे हमारी आस्था भी बनी रहेगी और नदी-तालाब भी स्वच्छ रहेंगे।”
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
पिता-पुत्र की यह पहल केवल गणेश प्रतिमा के विसर्जन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने समाज को यह संदेश दिया कि परंपराओं को निभाते हुए भी पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में परिवार की इस पहल की सराहना हो रही है। गणपति विसर्जन के अवसर पर अपनाया गया यह तरीका अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।





