नारायणपुर

रावघाट में बिछी उम्मीदों की पटरी, अब दौड़ेगी यात्री ट्रेन!

240 किमी लंबी दल्लीराजहरा–रावघाट–जगदलपुर रेल परियोजना के प्रथम चरण का अंतिम स्टेशन तैयार; 95 किमी के पहले फेज की बड़ी उपलब्धि, 22 सितंबर को सुरक्षा निरीक्षण के बाद अक्टूबर में यात्री सेवा शुरू होने की उम्मीद

33 साल का इंतजार खत्म होने की ओर… रावघाट स्टेशन का निर्माण अंतिम चरण में, फिनिशिंग कार्य ने पकड़ी रफ्तार

(कैलाश सोनी) नारायणपुर/रावघाट। बस्तर के लिए लंबे समय से देखे जा रहे रेल कनेक्टिविटी के सपने को अब रफ्तार मिलने लगी है। दल्लीराजहरा–रावघाट–जगदलपुर की करीब 240 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना के प्रथम चरण के अंतिम रेलवे स्टेशन रावघाट का निर्माण कार्य अंतिम दौर में पहुंच गया है। स्टेशन परिसर में फिनिशिंग और यात्री सुविधाओं से जुड़े कार्य तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। ऐसे में अब रावघाट तक यात्री ट्रेन पहुंचने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।

करीब 95 किलोमीटर के प्रथम चरण में ताड़ोकी के बाद अब रावघाट इस रेल परियोजना का महत्वपूर्ण अंतिम पड़ाव है। रावघाट रेलवे स्टेशन के तैयार होने के बाद इस क्षेत्र को केवल रेल लाइन ही नहीं, बल्कि नियमित यात्री रेल सेवा से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम पूरा होगा।

रेलवे से जुड़ी जानकारी के अनुसार 22 सितंबर को सुरक्षा मानकों से संबंधित महत्वपूर्ण निरीक्षण किया जाना है। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की जांच और आवश्यक स्वीकृति के बाद यात्री ट्रेन संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सब कुछ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रहा तो अक्टूबर में रावघाट तक यात्री ट्रेन शुरू होने की संभावना है।


रावघाट : 240 किमी की परियोजना में पहले फेज का आखिरी स्टेशन

दल्लीराजहरा से रावघाट होते हुए जगदलपुर तक प्रस्तावित रेल परियोजना की कुल लंबाई करीब 240 किलोमीटर है। परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके प्रथम चरण में लगभग 95 किलोमीटर रेल लाइन का काम शामिल है, जिसका अंतिम रेलवे स्टेशन रावघाट है।

ताड़ोकी तक यात्री ट्रेन पहुंचने के बाद अब रावघाट तक रेल सेवा विस्तार की तैयारियां चल रही हैं। इसलिए रावघाट स्टेशन का महत्व केवल एक नए रेलवे स्टेशन के रूप में नहीं, बल्कि परियोजना के पहले चरण के अंतिम स्टेशन और आगे की रेल कनेक्टिविटी के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है।


22 सितंबर को होगी सुरक्षा की बड़ी परीक्षा

रावघाट स्टेशन का निर्माण लगभग पूरा होने के बाद अब यात्री ट्रेन संचालन से पहले सबसे महत्वपूर्ण चरण सुरक्षा निरीक्षण का है। 22 सितंबर को सुरक्षा मानकों की जांच प्रस्तावित है।

निरीक्षण के दौरान रेल लाइन, ट्रैक, स्टेशन से जुड़ी संरचनाएं, सिग्नलिंग, संचालन व्यवस्था और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मानकों को देखा जाएगा। सीआरएस से आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद ही यात्री ट्रेन संचालन की अंतिम प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

यानी अब रावघाट में ट्रेन पहुंचने की राह निर्माण से ज्यादा सुरक्षा मंजूरी के चरण में प्रवेश कर चुकी है।


अक्टूबर में रावघाट से सुनाई दे सकती है यात्री ट्रेन की सीटी

वर्तमान में यात्री ट्रेन सेवा दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक संचालित हो रही है। सुरक्षा कारणों के चलते ट्रेन ताड़ोकी पहुंचने के बाद वापस अंतागढ़ लौटकर रात में रुकती है।

रावघाट स्टेशन तैयार होने और सुरक्षा मंजूरी मिलने के बाद इस यात्री ट्रेन को रावघाट तक विस्तारित करने की योजना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ट्रेन रायपुर से रावघाट तक पहुंच सकती है और वापसी में रावघाट से रायपुर की ओर रवाना होगी। रावघाट स्टेशन पर रात में ट्रेन के ठहराव की व्यवस्था भी किए जाने की संभावना है।

यदि प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो अक्टूबर में रावघाट स्टेशन पर यात्री ट्रेन की सीटी सुनाई देने का इंतजार खत्म हो सकता है।


रावघाट स्टेशन नहीं, क्षेत्र के लिए नई कनेक्टिविटी का दरवाजा

रावघाट रेलवे स्टेशन इस पूरे इलाके के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी की प्रतीक्षा कर रहा है। सड़क मार्ग पर निर्भरता वाले इस क्षेत्र में रेल सेवा की शुरुआत होने से आवागमन का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा।

इसका लाभ नारायणपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों, विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और दूसरे शहरों में आने-जाने वाले लोगों को मिल सकता है।

रायपुर और अन्य प्रमुख शहरों तक रेल संपर्क उपलब्ध होने से यात्रियों के लिए लंबी दूरी की यात्रा का विकल्प बढ़ेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से जुड़ी गतिविधियों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।


दुर्ग के बाद बड़ा स्टेशन होने का दावा

रेलवे अधिकारियों के अनुसार रावघाट रेलवे स्टेशन का निर्माण बड़े क्षेत्र में किया गया है। स्टेशन से संबंधित निर्माण कार्य करीब डेढ़ किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है।

स्टेशन को आधुनिक रेल संचालन की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने के साथ उसके स्वरूप में पुराने दौर के रेलवे स्टेशनों की झलक देने का प्रयास भी किया गया है।

स्टेशन परिसर के आसपास रेलवे कर्मचारियों के लिए आवासीय कॉलोनी का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वहीं रेलवे पुलिस थाना भवन का निर्माण भी पूरा होने की जानकारी दी गई है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार रावघाट स्टेशन को बिलासपुर रेल जोन के बड़े स्टेशनों में शामिल किया जा रहा है।


33 साल पहले देखी गई थी रेल परियोजना की तस्वीर

रावघाट तक रेल पहुंचने की कहानी कोई एक-दो साल पुरानी नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस रेल परियोजना की योजना को वर्ष 1993 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी। इसके बाद परियोजना कई वर्षों तक विभिन्न प्रक्रियाओं में आगे बढ़ती रही।

वर्ष 2007 में रेलवे, एनएमडीसी और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच समझौता हुआ। इसके बाद वर्ष 2010-11 में निर्माण कार्य शुरू हुआ।

निर्माण के अलग-अलग चरण पूरे होने के साथ रेल सेवा भी क्रमश: आगे बढ़ती गई। दल्लीराजहरा से गुदुम, गुदुम से भानुप्रतापपुर, भानुप्रतापपुर से केवटी, केवटी से अंतागढ़ और अंतागढ़ से ताड़ोकी तक यात्री सेवा शुरू हो चुकी है।

अब अगला पड़ाव रावघाट है।


रावघाट तक ट्रेन पहुंची तो बदलेगा नारायणपुर का रेल नक्शा

रावघाट तक यात्री ट्रेन पहुंचने का सबसे बड़ा प्रभाव क्षेत्र की कनेक्टिविटी पर पड़ने की उम्मीद है। नारायणपुर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को वर्तमान में लंबी दूरी की यात्रा के लिए सड़क परिवहन पर काफी निर्भर रहना पड़ता है।

रेल सेवा शुरू होने के बाद रायपुर सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़ने का वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध होगा। इससे विशेष रूप से उन यात्रियों को सुविधा मिल सकती है जिन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए जिले से बाहर जाना पड़ता है।

रावघाट स्टेशन के शुरू होने के साथ क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। रेल के जरिए माल परिवहन और यात्री परिवहन दोनों के विस्तार से इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी का स्वरूप बदलने की उम्मीद है।


लौह अयस्क परिवहन के साथ यात्री सुविधा भी

दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना का महत्व केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है। परियोजना क्षेत्र के लौह अयस्क परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों से भी जुड़ी है।

रेल नेटवर्क के विस्तार से लौह अयस्क परिवहन को बेहतर माध्यम मिलने के साथ क्षेत्र के लोगों के लिए यात्री रेल सुविधा भी विकसित होगी। इससे परियोजना का महत्व आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बढ़ जाता है।


अब नजर 22 सितंबर पर…

रावघाट रेलवे स्टेशन का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। फिनिशिंग कार्य तेजी से चल रहा है। स्टेशन परिसर में आवश्यक सुविधाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

अब पूरे क्षेत्र की नजर 22 सितंबर के सुरक्षा निरीक्षण पर है। निरीक्षण के बाद आवश्यक स्वीकृति मिलती है तो यात्री ट्रेन संचालन की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।

33 वर्षों से अधिक समय से जिस रेल कनेक्टिविटी का इंतजार था, वह अब रावघाट की पटरी तक पहुंच चुका है। ताड़ोकी के बाद रावघाट तक यात्री ट्रेन पहुंचना इस परियोजना के प्रथम चरण की एक बड़ी उपलब्धि होगी और नारायणपुर-बस्तर क्षेत्र के लिए रेल कनेक्टिविटी के नए अध्याय की शुरुआत भी।


फैक्ट फाइल | रावघाट रेल परियोजना

  • कुल परियोजना: दल्लीराजहरा–रावघाट–जगदलपुर
  • कुल लंबाई: करीब 240 किलोमीटर
  • प्रथम चरण: करीब 95 किलोमीटर
  • प्रथम चरण का अंतिम स्टेशन: रावघाट
  • वर्तमान यात्री सेवा: ताड़ोकी तक
  • रावघाट स्टेशन: निर्माण अंतिम चरण में
  • सुरक्षा निरीक्षण: 22 सितंबर 2026
  • यात्री सेवा की संभावना: अक्टूबर 2026
  • स्टेशन क्षेत्र: करीब डेढ़ किलोमीटर में निर्माण
  • अन्य निर्माण: रेलवे आवासीय कॉलोनी व रेलवे पुलिस थाना
  • परियोजना की प्रारंभिक सैद्धांतिक मंजूरी: 1993
  • निर्माण कार्य की शुरुआत: 2010-11

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