चूजा पालन से बसंती नाग ने संवारी आजीविका
स्व-सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया काम, अब 14 से 15 हजार रुपए तक की आय

नारायणपुर। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित आजीविका गतिविधियों का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। विकासखंड नारायणपुर की ग्राम पंचायत बेनूर निवासी बसंती नाग ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर चूजा पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया और मेहनत व लगन से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
समूह की बैठक में मिली चूजा पालन की जानकारी
बसंती नाग ‘रिद्धी सिद्धी स्व-सहायता समूह’ की सदस्य हैं। समूह की बैठक के दौरान उन्हें IFC परियोजना के अंतर्गत समूह की दीदियों से आय बढ़ाने के लिए चूजा पालन गतिविधि की जानकारी मिली। इस जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने चूजा पालन शुरू करने का निर्णय लिया।
IFC परियोजना के सहयोग से उन्होंने 30 दिन के लिए 90 रुपए प्रति चूजा की दर से 30 चूजे खरीदे, जिस पर कुल 2,700 रुपए खर्च हुए। चूजों की नियमित देखभाल, पालन-पोषण और पोषण पर ध्यान देते हुए उन्होंने इस गतिविधि को आगे बढ़ाया।
मेहनत का मिला आर्थिक लाभ
चूजा पालन गतिविधि को आगे बढ़ाते हुए बसंती नाग ने बाद में करीब 500 से 600 चूजों का विक्रय किया। इससे उन्हें लगभग 14 से 15 हजार रुपए की आय प्राप्त हुई। अतिरिक्त आय से परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा मिला और बसंती को अपना छोटा व्यवसाय आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला।
अब दोबारा चूजा पालन, आय बढ़ाने की उम्मीद
बसंती नाग बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने तथा IFC परियोजना के माध्यम से मिली जानकारी और सहयोग से उन्हें आजीविका को नए तरीके से आगे बढ़ाने का अवसर मिला। अब वे अपनी आय में और वृद्धि के उद्देश्य से पुनः चूजा पालन कर रही हैं। बेहतर देखभाल और पालन-पोषण के जरिए अधिक आय अर्जित करने की उम्मीद है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी मिसाल
बसंती नाग की कहानी बताती है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से मिलने वाला मार्गदर्शन और आजीविका के अवसर ग्रामीण महिलाओं को अपनी पारिवारिक आय बढ़ाने में सहयोग दे सकते हैं। मेहनत, नियमित देखभाल और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से महिलाएं छोटे स्तर के व्यवसाय को आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं।



