नारायणपुर

नारायणपुर के इस गांव में बच्चों ने दिखाया ऐसा हुनर कि केंद्रीय उप सचिव भी हुए प्रभावित! फिर पहुंचे बागवानी के बीच…

माड़िया में कहानी, हिंदी में सीखने का अनूठा तरीका… दूरस्थ अंचल में शिक्षा से लेकर किसानों की आजीविका तक, प्रशांत एम.एस. और कलेक्टर नम्रता जैन के दौरे में सामने आईं कई अहम तस्वीरें

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। कहीं बच्चे पहाड़े सुना रहे थे, तो कहीं रंग-बिरंगे चित्रों के जरिए अपनी कल्पनाशीलता दिखा रहे थे। एक कक्षा में माड़िया भाषा में कहानी सुनाई जा रही थी और फिर उसी कहानी को हिंदी में समझाया जा रहा था। नारायणपुर के दूरस्थ अंचल की इस शाला में बच्चों की सीखने की प्रक्रिया ने केंद्रीय उप सचिव प्रशांत एम.एस. का ध्यान खींचा। इसके बाद उनका दौरा गुमियाबेड़ा पहुंचा, जहां पौधरोपण और बागवानी के जरिए ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के प्रयासों का जायजा लिया गया।

आखिर दूरस्थ गांव की इस शाला में क्या हो रहा है खास?

भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के उप सचिव प्रशांत एम.एस. ने कलेक्टर नम्रता जैन के साथ स्कूल केइन्ता अभियान के अंतर्गत संचालित वैकल्पिक शाला मुसेर का निरीक्षण किया। यहां बच्चों की पढ़ाई, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया और कक्षा में उनकी सहभागिता को करीब से देखा गया।

बच्चों ने अपना परिचय दिया, पहाड़े सुनाए, कहानियां सुनाईं और अक्षर ज्ञान का प्रदर्शन किया। पेड़-पौधों, पक्षियों और पर्वतों पर बनाए गए रंगीन चित्रों के माध्यम से भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। बच्चों के उत्साह और सक्रिय भागीदारी को देखकर केंद्रीय उप सचिव ने उनका हौसला बढ़ाया तथा नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया।

माड़िया की कहानी से हिंदी सीखने का तरीका बना चर्चा का विषय

इस निरीक्षण का खास पहलू रहा स्थानीय भाषा के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का तरीका। शिक्षक ने बच्चों को माड़िया भाषा में खरगोश और सियार की कहानी सुनाई। इसके बाद कहानी का हिंदी में अनुवाद कर बच्चों को समझाया गया।

इस पद्धति से बच्चे अपनी परिचित भाषा में कहानी का अर्थ समझने के साथ हिंदी से भी जुड़ रहे हैं। स्थानीय भाषा और हिंदी के इस समन्वय से शिक्षण को अधिक सहज, रोचक और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशांत एम.एस. ने शिक्षक की शिक्षण पद्धति और बच्चों के साथ संवाद की सराहना की। उन्होंने बच्चों की जिज्ञासा, समझ और सहभागिता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताया।

शाला के बाद गुमियाबेड़ा में किस बात का लिया जायजा?

दौरे के अगले पड़ाव में प्रशांत एम.एस. और कलेक्टर नम्रता जैन ने गुमियाबेड़ा में पौधरोपण एवं बागवानी गतिविधियों का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने स्थानीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और कृषकों से सीधे बातचीत कर उनके अनुभवों तथा खेती से जुड़े प्रयासों को समझा।

चर्चा में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित करने की संभावनाओं पर जानकारी ली गई।

शिक्षा और आजीविका—दूरस्थ अंचल के विकास की दो अहम कड़ियां

मुसेर की वैकल्पिक शाला में बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों और गुमियाबेड़ा में बागवानी गतिविधियों के निरीक्षण के जरिए जिले में शिक्षा तथा आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को समझा गया।

इस अवसर पर कच्चापाल की सरपंच रजमा नुरेटी, जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र नाथ पांडे, महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी लुपेंद्र महिनाग, डीएमसी दीनबंधु रावटे, खंड शिक्षा अधिकारी संतु नुरुटी, स्कूल समन्वयक लक्ष्मीकांत सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

नारायणपुर के इस दौरे में एक ओर स्थानीय भाषा के सहारे बच्चों को पढ़ाने की पहल सामने आई, तो दूसरी ओर बागवानी के जरिए ग्रामीण आजीविका मजबूत करने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित रहा। अब इन पहलों को आगे बढ़ाने में निरंतरता और उनके जमीनी परिणाम महत्वपूर्ण होंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button