RAWE विद्यार्थियों ने सीखी एयर लेयरिंग तकनीक, पौध प्रवर्धन के फायदे भी जाने
व्यावहारिक प्रशिक्षण में विद्यार्थियों ने खुद किया पौध की शाखा पर प्रयोग, वानस्पतिक प्रवर्धन की उपयोगिता समझी

नारायणपुर। कृषि शिक्षा को कक्षा से खेत और प्रयोग तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, केरलापाल, नारायणपुर में RAWE (Rural Agricultural Work Experience) कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को पौध प्रवर्धन की एयर लेयरिंग तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। गतिविधि महाविद्यालय की डीन डॉ. रत्ना नाशिने एवं डॉ. पुष्पेंद्र सिंह पईकरा की उपस्थिति में आयोजित हुई।

विद्यार्थियों ने खुद किया प्रयोग
प्रशिक्षण के दौरान RAWE विद्यार्थी तुषार सैमसन एवं नवीन सिंह ने स्वयं एयर लेयरिंग की प्रक्रिया करके सीखी। विद्यार्थियों ने उपयुक्त शाखा का चयन करने से लेकर उसकी छाल हटाने, आवश्यक माध्यम लगाने तथा नमी बनाए रखने के लिए उसे उचित तरीके से बांधने की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
मातृ पौधे से जुड़े रहते तैयार होते हैं नए पौधे
विद्यार्थियों को बताया गया कि एयर लेयरिंग वानस्पतिक प्रवर्धन की उपयोगी विधि है। इसमें मातृ पौधे से जुड़ी शाखा पर ही जड़ें विकसित कर नए पौधे तैयार किए जाते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन पौधों के लिए उपयोगी है, जिनमें बीज से पौधा तैयार करने में अधिक समय लगता है। इसके अलावा जिन पौधों के वांछित गुणों को बनाए रखना जरूरी होता है, वहां भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
कृषि शिक्षा में प्रयोगात्मक ज्ञान पर जोर
गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों ने एयर लेयरिंग की प्रक्रिया, उपयोगिता और लाभ को प्रत्यक्ष रूप से समझा। RAWE कार्यक्रम के तहत इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को कृषि की तकनीकों को केवल सैद्धांतिक रूप से पढ़ने के बजाय उन्हें स्वयं करके सीखने का अवसर मिल रहा है।
महाविद्यालय में आयोजित यह गतिविधि विद्यार्थियों के कृषि संबंधी व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी समझ और कौशल विकास की दिशा में उपयोगी रही।
