डेढ़ माह से ओवरब्रिज के नीचे बैठा था बेसहारा युवक, कलेक्टर के निर्देश पर मिला इलाज और आश्रय
राहगीर की नजर पड़ी तो सामने आई युवक की पीड़ा, सूचना मिलते ही प्रशासन ने दिखाई संवेदनशीलता

समाज कल्याण विभाग और वरदान परमार्थ सेवा संस्था की टीम ने पहुंचाया जिला अस्पताल, स्वास्थ्य जांच के बाद सुरक्षित आश्रय गृह में कराया दाखिला
शिव प्रधान, धमतरी। इंसानियत और संवेदनशीलता की एक पहल ने सड़क किनारे बेसहारा बैठे एक युवक को इलाज और सुरक्षित आश्रय तक पहुंचाने का रास्ता खोल दिया। मुजगहन ओवरब्रिज के नीचे करीब डेढ़ महीने से अकेले बैठे युवक की ओर जब एक राहगीर की नजर गई तो उसने उसकी स्थिति को समझने का प्रयास किया। युवक अपना नाम-पता और घर-परिवार के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। इसके बाद मामले की जानकारी कलेक्टर को दी गई। कलेक्टर के तत्काल संज्ञान के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और युवक को उपचार के बाद सुरक्षित आश्रय गृह पहुंचाया गया।

डेढ़ माह से बैठा था एक ही जगह
जानकारी के अनुसार, युवक पिछले करीब डेढ़ महीने से मुजगहन ओवरब्रिज के नीचे अकेला रह रहा था। उसकी स्थिति देखकर राहगीरों को उसके मानसिक रूप से परेशान होने का अंदेशा था। वह अपने घर, गांव अथवा परिजनों के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ में भी युवक के परिवार अथवा मूल निवास के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई।
रास्ते से गुजर रहे शिवा प्रधान की पड़ी नजर
बताया गया कि शिवा प्रधान अपने बड़े भाई के घर अर्जुंदा जा रहे थे। इसी दौरान मुजगहन ओवरब्रिज के नीचे उनकी नजर युवक पर पड़ी। उन्होंने वाहन रोककर युवक से बातचीत करने और उसके बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन युवक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया।
इसके बाद शिवा प्रधान ने आसपास के ग्रामीणों से जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि युवक काफी समय से वहीं बैठा हुआ है और उसके घर-परिवार के बारे में किसी को जानकारी नहीं है।
कलेक्टर को दी सूचना, तत्काल हरकत में आया प्रशासन
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिवा प्रधान ने ग्रुप के माध्यम से कलेक्टर को सूचना दी। कलेक्टर ने मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
कलेक्टर के निर्देश के बाद समाज कल्याण विभाग एवं वरदान परमार्थ सेवा संस्था की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने युवक को सुरक्षित रूप से वहां से उठाकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी स्वास्थ्य जांच एवं आवश्यक चेकअप कराया गया।
इलाज के बाद सुरक्षित आश्रय गृह पहुंचाया
स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद युवक को सुरक्षित आश्रय गृह पहुंचाया गया। अब उसके उपचार, देखभाल और सुरक्षित रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। युवक के परिजनों की पहचान अथवा उसके घर तक पहुंचाने की दिशा में भी आगे की कार्रवाई संभव है।
एक छोटी पहल, किसी परिवार से मिला सकती है बिछड़ा सदस्य
यह पूरा घटनाक्रम समाज के लिए भी एक संदेश है कि मानसिक परेशानी अथवा किसी अन्य कारण से घर से दूर भटक रहे लोगों को सड़क पर बेसहारा छोड़ने के बजाय उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। सड़क किनारे अकेला बैठा व्यक्ति भी किसी का बेटा, भाई या परिवार का सदस्य हो सकता है।
शिवा प्रधान की पहल और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया कि समय पर दी गई एक सूचना किसी जरूरतमंद की जिंदगी बदल सकती है और उसे उसके परिवार तक पहुंचाने की शुरुआत बन सकती है।
मानवता की यही छोटी-छोटी पहल समाज में संवेदना और जिम्मेदारी की बड़ी तस्वीर पेश करती है।