नारायणपुर

रावघाट परियोजना की समस्याओं पर समिति मुखर, परिवहन भाड़ा ₹910 प्रति टन करने की मांग

100% स्थानीय भर्ती, जर्जर सड़कों और किसानों को ‘लालपानी’ से हुए नुकसान का उठाया मुद्दा; बस्तर कमिश्नर सहित नारायणपुर और कांकेर कलेक्टर को सौंपा संयुक्त ज्ञापन

नारायणपुर/जगदलपुर। रावघाट परियोजना क्षेत्र में खनन और लौह अयस्क परिवहन से जुड़े ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और वाहन मालिकों की समस्याओं को लेकर बूढ़ादेव अंजरेल माइंस श्रमिक विकास समिति ने प्रशासन के सामने मांगों का विस्तृत खाका रखा है। समिति ने 14 अक्टूबर को बस्तर संभाग के कमिश्नर तथा नारायणपुर और उत्तर बस्तर कांकेर के कलेक्टर को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर परिवहन भाड़े में वृद्धि, स्थानीय युवाओं को रोजगार, जर्जर सड़कों की मरम्मत और किसानों को मुआवजा देने सहित विभिन्न मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

₹707 का भाड़ा बढ़ाकर ₹910 प्रति टन करने की मांग

समिति ने कहा कि महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और वाहनों के रखरखाव पर बढ़ते खर्च को देखते हुए लौह अयस्क परिवहन का वर्तमान निर्धारित भाड़ा ₹707 प्रति टन अपर्याप्त है। इसे बढ़ाकर ₹910 प्रति टन किया जाना चाहिए। समिति के अनुसार, नारायणपुर-अंतागढ़ मार्ग की खराब स्थिति के कारण टिप्परों के गियर बॉक्स और महंगे कलपुर्जे बार-बार खराब हो रहे हैं। इससे वाहन मालिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है।

खदानों में स्थानीय युवाओं को मिले प्राथमिकता

समिति ने रावघाट खदानों से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए गैर-तकनीकी और अर्ध-तकनीकी पदों पर 100 प्रतिशत स्थानीय युवाओं की भर्ती की मांग की। समिति का कहना है कि खनन परियोजना से स्थानीय लोगों की कृषि भूमि और आजीविका प्रभावित हुई है, ऐसे में रोजगार के अवसरों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

24 घंटे की ड्यूटी से हादसों का खतरा

समिति ने वाहन चालकों की कार्यस्थितियों पर भी चिंता जताई। ज्ञापन के अनुसार, दिन में नो-एंट्री लागू रहने के कारण चालकों को रात में वाहन चलाना पड़ता है। सुबह लौटने के बाद भी लोडिंग पॉइंट पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इससे चालकों को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और थकान की स्थिति में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। समिति ने चालकों के लिए सुरक्षित और व्यावहारिक कार्य व्यवस्था बनाने की मांग की।

फाइनेंस एजेंटों की कथित धमकियों का मुद्दा

समिति ने आर्थिक तंगी और वाहन ऋण की किश्तें जमा नहीं कर पाने वाले वाहन मालिकों के परिवारों को कथित तौर पर फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों द्वारा धमकाए जाने का मुद्दा भी उठाया। समिति ने ऐसे मामलों की जांच कराते हुए वाहन मालिकों को मानसिक प्रताड़ना से राहत दिलाने की मांग की है।

‘लालपानी’ से फसल नुकसान, सर्वे कराकर मिले मुआवजा

खनन क्षेत्र से निकलने वाले दूषित ‘लालपानी’ के कारण खेतों की फसल प्रभावित होने और भूमि की उर्वरता घटने की शिकायत भी ज्ञापन में की गई है। समिति ने प्रभावित खेतों का संयुक्त सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और पात्र किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और बुनियादी सुविधाओं पर भी जोर

समिति ने शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग करते हुए कहा कि अंतागढ़ स्थित स्कूल तक आने-जाने में बच्चों को प्रतिदिन करीब 100 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है। स्कूल को नारायणपुर या भैंसगांव के पास स्थानांतरित करने की मांग रखी गई है। प्रभावित गांवों के स्कूलों में डीएमएफटी और सीएसआर मद से आरओ वाटर, इन्वर्टर तथा बेंच-टेबल उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

इसके अलावा नर्सिंग और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विद्यार्थियों को सहायता देने, अतिथि शिक्षकों का मानदेय प्राथमिक स्तर पर ₹20 हजार और मिडिल स्तर पर ₹25 हजार करने, बंद पड़ी सोलर लाइटों को चालू कराने तथा उप स्वास्थ्य केंद्रों का जीर्णोद्धार करने की मांग की गई है।

‘विकास के विरोध में नहीं, अधिकारों की रक्षा के लिए उठाई आवाज’

समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगें विकास कार्यों के विरोध में नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के अधिकारों, रोजगार और आजीविका की सुरक्षा से जुड़ी हैं। खनन परियोजना से प्रभावित स्थानीय युवाओं और किसानों को उनका हक मिलना चाहिए। समिति ने प्रशासन से सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की।

समिति ने उम्मीद जताई कि बस्तर संभाग के कमिश्नर और दोनों जिलों के कलेक्टर समस्याओं की संवेदनशीलता को देखते हुए शीघ्र कार्रवाई करेंगे, ताकि क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों, श्रमिकों और वाहन मालिकों को राहत मिल सके।

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