गांवों की मिट्टी से निकलेगा पर्यटन का नया मॉडल, ‘चेन्दरू’ पुरस्कार से मिलेगा सम्मान
ग्रामीण पर्यटन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपए और प्रशस्ति पत्र; होमस्टे, लोककला, हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर, 6 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के गांवों की संस्कृति, जनजातीय परंपरा, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने राज्य सरकार ने नई पहल की है। पर्यटन विभाग ने ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने के लिए ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ शुरू किया है। इसके लिए ‘चेन्दरू, राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार नियम, 2025’ लागू किए गए हैं।

पुरस्कार के तहत चयनित व्यक्ति या संस्था को एक लाख रुपए की नकद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। विजेता का सम्मान राज्योत्सव के अवसर पर किया जाएगा। साथ ही उसके कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी जारी की जाएगी।
पर्यटन से गांवों में रोजगार की नई राह
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गांव हमारी संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति की जीवंत विरासत हैं। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन का लाभ केवल प्रमुख पर्यटन स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंचे।
ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों, कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
होमस्टे से लेकर लोककला तक को बढ़ावा
पुरस्कार के जरिए होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, लोककला, लोकसंस्कृति, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर तथा समुदाय आधारित पर्यटन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे पर्यटक केवल किसी स्थान को देखने के बजाय वहां की संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली को करीब से अनुभव कर सकेंगे।
‘चेन्दरू’ नाम से बस्तर की पहचान को नया मंच
पुरस्कार का नाम ‘चेन्दरू’ रखा जाना भी छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान से जुड़ा है। बस्तर और यहां के सहज प्राकृतिक जीवन को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाली इस विरासत को अब ग्रामीण पर्यटन से जोड़ते हुए जमीनी स्तर पर बेहतर काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा।
छह सदस्यीय जूरी करेगी चयन
पुरस्कार के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन छह सदस्यीय निर्णायक मंडल करेगा। जूरी की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक करेंगे। चयन में ग्रामीण पर्यटन में किए गए कार्य, उसका प्रभाव, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन तथा संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण जैसे पहलुओं को महत्व दिया जाएगा।
समाचार पत्रों के जरिए मंगाई जाएंगी प्रविष्टियां
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कर पुरस्कार के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित करेगा। आवेदकों को प्रोफाइल, फोटोग्राफ, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड सहित ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में किए गए कार्यों और उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
राज्योत्सव में सम्मान, स्मारिका में दर्ज होगी कहानी
चयनित विजेता अथवा संस्था के प्रतिनिधि को राज्योत्सव में सम्मानित किया जाएगा। विजेता के नवाचार, कार्य और उपलब्धियों पर आधारित सचित्र स्मारिका भी जारी होगी। इसका उद्देश्य सफल प्रयासों को व्यापक पहचान देना और अन्य गांवों को भी पर्यटन आधारित विकास के लिए प्रेरित करना है।
बॉक्स | ग्रामीण पर्यटन से क्या बदलेगा?
- स्थानीय युवाओं और महिलाओं को रोजगार
- होमस्टे को मिलेगा विस्तार
- हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार
- लोककला व पारंपरिक व्यंजनों को पहचान
- जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण
- पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे गांवों तक पहुंचाने पर जोर
सरकार की सोच : पर्यटन बने गांवों की अर्थव्यवस्था का आधार
बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति से लेकर ग्रामीण अंचलों के पारंपरिक व्यंजन, लोककला, हस्तशिल्प, मेले, पर्व और प्राकृतिक स्थल ग्रामीण पर्यटन की बड़ी संभावनाएं हैं। ‘चेन्दरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार’ के जरिए सरकार इन संभावनाओं को रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास से जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।




