छत्तीसगढ़

रावघाट से रायपुर तक दौड़ेगी 12 बोगी वाली मेमू!

ताड़ोकी–रावघाट रेलखंड तैयार, सीआरएस का निरीक्षण व स्पीड ट्रायल पूरा; रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद यात्री सेवा विस्तार की तैयारी, बदलेगी ट्रेन की टाइमिंग

(कैलाश सोनी) रावघाट/नारायणपुर। दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचल के लिए रेल कनेक्टिविटी का इंतजार अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। रावघाट से रायपुर तक 12 बोगी वाली इलेक्ट्रिक मेमू ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है। रेलवे मंडल स्तर पर ताड़ोकी से रायपुर तक वर्तमान में चल रही यात्री सेवा को रावघाट तक विस्तार देने का खाका तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही ट्रेन की समय-सारिणी में भी बदलाव होगा।

रावघाट तक रेल पहुंचने के बाद कांकेर, नारायणपुर सहित दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ इलाकों के यात्रियों को रायपुर तक सीधी रेल सुविधा मिलने की राह खुल जाएगी। प्रस्तावित विस्तार से वर्तमान ताड़ोकी–रायपुर सेवा का रूट आगे रावघाट तक बढ़ेगा। रेलवे बोर्ड से आवश्यक अनुमति और परिचालन संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सेवा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

17.5 किमी की आखिरी कड़ी भी तैयार

दल्लीराजहरा–रावघाट नई रेल लाइन परियोजना की कुल लंबाई करीब 95 किलोमीटर है। इसका अंतिम 17.5 किलोमीटर लंबा ताड़ोकी–रावघाट रेलखंड अब तैयार हो चुका है। यह सिंगल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉडगेज सेक्शन है। भारतीय रेलवे ने 23 सितंबर को जारी जानकारी में बताया कि इस खंड का सीआरएस निरीक्षण और गति परीक्षण पूरा किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान ट्रैक, पुल-पुलियों, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच की गई।

22 सितंबर को हुआ था बड़ा टेस्ट

रावघाट रेल परियोजना के लिए 22 सितंबर 2026 अहम तारीख रही। रेल संरक्षा आयुक्त ने स्पेशल ट्रेन से ताड़ोकी से रावघाट तक रेलखंड का निरीक्षण किया और स्पीड ट्रायल किया। इस दौरान नए ट्रैक की तकनीकी एवं संरक्षा व्यवस्थाओं को परखा गया। यह प्रक्रिया रेलखंड को यात्री परिचालन के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण चरण है।

रिपोर्टों के अनुसार सीआरएस परीक्षण के बाद यात्री सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। यानी अब गेंद रेलवे बोर्ड की अनुमति और परिचालन संबंधी अंतिम प्रक्रिया के पाले में है।

रावघाट–रायपुर कनेक्टिविटी से पांच जिलों को राहत

रावघाट तक यात्री ट्रेन पहुंचने से केवल रावघाट क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के बड़े इलाके को फायदा मिलने की उम्मीद है। अखबार की रिपोर्ट के अनुसार रावघाट और अंतागढ़ से रायपुर तक तीन ट्रेनें संचालित होने से पांच जिलों के यात्रियों को राहत मिल सकती है।

विशेषकर कांकेर और नारायणपुर जिले के लोगों के लिए यह रेल सेवा सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने वाली साबित हो सकती है। रायपुर तक सीधा रेल संपर्क मिलने से इलाज, शिक्षा, रोजगार, व्यापार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आने-जाने में सुविधा बढ़ेगी।

ताड़ोकी से आगे बढ़ेगी ट्रेन, 10-15 मिनट बढ़ सकता है सफर

वर्तमान में ताड़ोकी से रायपुर के बीच चलने वाली मेमू ट्रेन को रावघाट तक विस्तार दिए जाने पर पूरे सफर की टाइमिंग में बदलाव होना तय माना जा रहा है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक रावघाट तक विस्तार होने के बाद ट्रेन करीब 10 से 15 मिनट अतिरिक्त समय लेकर रायपुर पहुंच सकती है।

वर्तमान समय-सारिणी के अनुसार ताड़ोकी से ट्रेन सुबह रवाना होकर अंतागढ़, कांकेर, भानुप्रतापपुर, गुदुम, दल्लीराजहरा, बालोद, लाटाबोड़, सिकसा, गुंडरदेही सहित विभिन्न स्टेशनों से होते हुए दुर्ग और फिर रायपुर पहुंचती है। रावघाट तक विस्तार के बाद इसी सेवा के परिचालन समय में फेरबदल किया जाएगा।

छह दिन ट्रेन चलने की संभावना

पेपर कटिंग में प्रकाशित रेलवे संबंधी जानकारी के अनुसार रावघाट तक मेमू सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को सप्ताह में छह दिन ट्रेन सुविधा मिल सकती है। वर्तमान में रायपुर से संबंधित मेमू सेवा के परिचालन दिवसों और समय में बदलाव कर रावघाट को जोड़ने की तैयारी की बात सामने आई है।

इससे रावघाट, अंतागढ़, कांकेर, भानुप्रतापपुर और नारायणपुर क्षेत्र के यात्रियों को रायपुर आने-जाने के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध होगा।

नई मेमू के लिए रैक की तैयारी

रावघाट तक नई यात्री सेवा संचालित करने के लिए 12 कोच वाली इलेक्ट्रिक मेमू रैक की व्यवस्था की दिशा में भी तैयारी की जानकारी सामने आई है। रेलवे मंडल द्वारा नई मेमू के लिए रैक उपलब्ध कराने के संबंध में संबंधित स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

हालांकि, ट्रेन का अंतिम समय, परिचालन के दिन और उद्घाटन/नियमित सेवा की तारीख रेलवे बोर्ड एवं रेलवे की अंतिम स्वीकृति के बाद ही आधिकारिक रूप से स्पष्ट होगी।

रावघाट स्टेशन भी तैयारियों के अंतिम दौर में

रावघाट स्टेशन को लेकर भी पूर्व में निर्माण एवं फिनिशिंग कार्य अंतिम चरण में पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। अब ताड़ोकी–रावघाट रेलखंड का कार्य पूरा होने और सीआरएस निरीक्षण के बाद स्टेशन पर यात्री परिचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

रावघाट को इस रेल परियोजना का महत्वपूर्ण स्टेशन माना जा रहा है। रेल लाइन के यहां तक पहुंचने से लंबे समय से रेल सुविधा से दूर रहे दक्षिण छत्तीसगढ़ के इलाकों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता खुला है।

सिर्फ यात्री ट्रेन नहीं, खनिज परिवहन के लिए भी अहम

दल्लीराजहरा–रावघाट रेल लाइन परियोजना का महत्व केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं है। भारतीय रेलवे के अनुसार इस रेल लाइन से भिलाई इस्पात संयंत्र तक लौह अयस्क के परिवहन को भी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा कृषि उत्पाद और स्थानीय वाणिज्यिक वस्तुओं की आवाजाही को भी बेहतर रेल नेटवर्क का लाभ मिल सकता है।

बेहतर रेल संपर्क से रायपुर और भिलाई जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों के अवसरों तक दूरस्थ क्षेत्रों की पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

1993 में मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी, 2010-11 में शुरू हुआ निर्माण

दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं में शामिल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 240 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा–रावघाट–जगदलपुर रेल परियोजना को 1993 में सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी, जबकि निर्माण कार्य 2010-11 में शुरू हुआ। दल्लीराजहरा–रावघाट का 95 किलोमीटर खंड इसी व्यापक परियोजना का हिस्सा है।

रावघाट से अब रायपुर की दूरी सिर्फ किलोमीटर की नहीं

रावघाट तक पटरी पहुंचना दक्षिण छत्तीसगढ़ के लिए महज एक नई रेल लाइन का निर्माण नहीं, बल्कि दूरस्थ इलाकों को मुख्यधारा की परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की बड़ी कड़ी है। ताड़ोकी–रावघाट खंड के तैयार होने और सीआरएस परीक्षण पूरा होने के बाद अब यात्रियों की नजर रेलवे बोर्ड की अनुमति और नियमित यात्री ट्रेन संचालन की घोषणा पर है।

यानी जिस रावघाट तक रेल पहुंचने का इंतजार वर्षों से था, वहां अब पटरी बिछने के बाद अगला इंतजार ट्रेन के नियमित पहियों का है।

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