नारायणपुर

करोड़ों का राजस्व देने वाले गोद गांव के हिस्से में बदहाल रास्ता

बारिश में बह जाता है एप्रोच मार्ग, पुलिया पार करना ग्रामीणों की मजबूरी; बच्चों की पढ़ाई और मरीजों की आवाजाही पर भी असर

नारायणपुर। जिले के दूरस्थ क्षेत्र स्थित ग्राम हुचाकोट में बारिश के साथ एक पुरानी समस्या फिर सामने आ गई है। तेज बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच पुलिया के दोनों ओर का एप्रोच मार्ग क्षतिग्रस्त होकर बह गया है। रास्ता खराब होने से ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल हो गई है और बरसात के दिनों में गांव के लोगों को आवागमन के लिए जोखिम उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ सड़क खराब होने तक सीमित नहीं है। पुलिया तक पहुंचने वाला एप्रोच मार्ग बार-बार क्षतिग्रस्त होना इस पूरे क्षेत्र की स्थायी समस्या बन चुका है। बारिश के दौरान तेज बहाव के कारण रास्ता बह जाता है और आवागमन प्रभावित होता है। इसके बाद अस्थायी व्यवस्था से रास्ता चलने लायक बनाया जाता है, लेकिन अगली बारिश में समस्या फिर खड़ी हो जाती है।

बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों की आवाजाही तक प्रभावित

रास्ते की बदहाली का सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। स्कूली बच्चों को बारिश के दौरान आवाजाही में परेशानी होती है। वहीं किसी ग्रामीण के बीमार होने या आपात स्थिति में उसे अस्पताल तक पहुंचाना चुनौती बन जाता है। तेज बहाव के बीच पुलिया और क्षतिग्रस्त रास्ते से गुजरना दुर्घटना का खतरा भी बढ़ाता है।

हर साल मरम्मत नहीं, चाहिए स्थायी समाधान

ग्रामीणों की समस्या का मूल कारण बार-बार होने वाली अस्थायी मरम्मत है। बारिश और नदी के तेज बहाव को देखते हुए केवल रास्ते को तत्काल दुरुस्त करना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। जरूरत ऐसे मजबूत एप्रोच रोड और पुलिया निर्माण की है, जो बरसात के तेज बहाव को झेल सके और वर्षभर सुरक्षित आवागमन उपलब्ध करा सके।

गोद गांव में सुविधाओं का सवाल

हुव्याकोट को रावघाट परियोजना के अंतर्गत बीएसपी द्वारा गोद लिए जाने का उल्लेख भी सामने आता है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए सड़क और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधा का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है। गांव का विकास केवल किसी परियोजना से जुड़ने तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई दे—यह जनहित की अपेक्षा है।

प्रशासन के सामने सीधा सवाल—कब मिलेगा स्थायी रास्ता?

बारिश में रास्ता बहने के बाद हर बार अस्थायी व्यवस्था करने के बजाय अब संबंधित विभागों को समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। स्थल का तकनीकी निरीक्षण कर पुलिया, एप्रोच रोड, जल निकासी और नदी के बहाव को ध्यान में रखते हुए स्थायी निर्माण की योजना तैयार की जा सकती है।

ग्रामीणों की मांग भी यही है कि समस्या को हर बरसात में दोहराने के बजाय एक बार ऐसा स्थायी समाधान किया जाए, जिससे बच्चों को स्कूल जाने, मरीजों को अस्पताल पहुंचने और आम ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन में परेशानी न हो।

जनहित में जरूरी पहल

बारिश के बाद रास्ता ठीक करना समाधान नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना जरूरी है जो अगली बारिश में फिर न बहे। हुचाकोट के ग्रामीणों को राहत के साथ-साथ स्थायी सड़क और सुरक्षित आवागमन का अधिकार मिलना चाहिए।

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