अब गांव की महिलाएं भी करेंगी डिजिटल लेन-देन… कच्चापाल में सीखीं बैंकिंग की बारीकियां
मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और क्यूआर कोड से भुगतान का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण; गोंडी और अबूझमाड़िया भाषा में समझाई गई साइबर ठगी से बचने की तकनीक

नारायणपुर। सुदूर वनांचल के गांवों में अब आर्थिक लेन-देन की तस्वीर बदलने की तैयारी है। बैंकिंग सुविधाओं से दूर रहने वाली ग्रामीण महिलाओं को अब मोबाइल के जरिए सुरक्षित लेन-देन और डिजिटल बैंकिंग से जोड़ने की पहल शुरू हुई है। इसी कड़ी में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत आने वाले गांवों की महिलाओं एवं स्व-सहायता समूहों को डिजिटल बैंकिंग का प्रशिक्षण देने के लिए ग्राम कच्चापाल में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहां महिलाओं ने न केवल डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया सीखी, बल्कि साइबर ठगी से बचने के तरीके भी समझे।

गोंडी-अबूझमाड़िया भाषा में समझाई डिजिटल बैंकिंग
छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CCOST), रायपुर द्वारा प्रायोजित तथा शासकीय स्वामी आत्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नारायणपुर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. आर. कुंजाम एवं रामकृष्ण मिशन विवेकानंद विद्या मंदिर आश्रम, कच्चापाल के प्राचार्य कमलेश शर्मा की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम में परियोजना समन्वयक एवं भौतिकशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. बी. डी. चांडक, सह-समन्वयक डॉ. हरि शंकर कुमार सहित महाविद्यालय के अतिथि व्याख्याता मौजूद रहे।
प्रशिक्षण के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, नारायणपुर के ऑनलाइन बैंकिंग विशेषज्ञ राशिद अंसारी ने मोबाइल बैंकिंग एप, यूपीआई भुगतान, क्यूआर कोड के माध्यम से लेन-देन तथा स्वयं क्यूआर कोड तैयार करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। खास बात यह रही कि स्थानीय महिलाओं को तकनीकी जानकारी आसानी से समझाने के लिए प्रदीप सलाम एवं देविका नेताम ने गोंडी और अबूझमाड़िया भाषाओं में द्विभाषिक व्याख्यान दिया। महिलाओं ने स्वयं डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया का अभ्यास भी किया।
एक गलती और खाली हो सकता है बैंक खाता
कार्यक्रम में डिजिटल बैंकिंग के फायदे बताने के साथ साइबर अपराधों से बचाव पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञ राशिद अंसारी ने बताया कि एटीएम पिन, यूपीआई पिन और ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल और धोखाधड़ी वाले संदेशों से सतर्क रहने की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को केवल डिजिटल भुगतान सिखाना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित बैंकिंग व्यवहार के प्रति जागरूक करना भी रहा।
महिलाओं को सम्मानित कर बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम के दौरान आश्रम के प्राचार्य कमलेश शर्मा का सम्मान डॉ. एस. आर. कुंजाम ने किया, जबकि ऑनलाइन बैंकिंग विशेषज्ञ राशिद अंसारी को प्रो. बी. डी. चांडक ने सम्मानित किया। ग्राम कच्चापाल की प्रतिभागी महिलाओं सरंगी उसेंडी एवं राजे वड्डे को शॉल एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
गांव-गांव तक पहुंचेगी डिजिटल बैंकिंग की पहल
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. आर. कुंजाम ने कहा कि डिजिटल बैंकिंग ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। आगामी चरणों में नियद नेल्लानार क्षेत्र के अन्य गांवों की महिलाओं के लिए भी व्यापक प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।
परियोजना समन्वयक प्रो. बी. डी. चांडक ने कहा कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा तथा गांव और शहर के बीच डिजिटल सुविधाओं की दूरी कम होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परियोजना बस्तर में डिजिटल जागरूकता, ग्रामीण विकास और तकनीकी सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनेगी।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, स्थानीय ग्रामीणों, महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में पहल
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर द्वारा प्रायोजित इस परियोजना का उद्देश्य नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) क्षेत्र की महिलाओं एवं स्व-सहायता समूहों को डिजिटल और मोबाइल बैंकिंग का प्रशिक्षण देकर सुरक्षित डिजिटल लेन-देन, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए सक्षम बनाना है।




