रेडियो की आवाज के पीछे का विज्ञान जानने पहुंचे 90 नन्हे इंजीनियर, स्टूडियो से ट्रांसमीटर तक समझी प्रसारण की पूरी कहानी
स्वामी आत्मानंद स्कूल के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों ने एफएम रेडियो स्टेशन का किया शैक्षणिक भ्रमण; ऑप्टिकल फाइबर, रेडियो तरंगों और प्रसारण तकनीक को लेकर पूछे सवाल, बोले- ऐसे भ्रमण बार-बार होने चाहिए

नारायणपुर। रेडियो पर सुनाई देने वाली आवाज आखिर स्टूडियो से निकलकर हजारों श्रोताओं तक कैसे पहुंचती है? आवाज को रेडियो तरंगों में बदलने की प्रक्रिया क्या है और इसमें ट्रांसमीटर से लेकर संचार एंटीना तक की क्या भूमिका होती है? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए मंगलवार को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय के 90 विद्यार्थी एफएम रेडियो स्टेशन नारायणपुर पहुंचे। यहां विद्यार्थियों ने न केवल प्रसारण की तकनीकी बारीकियों को करीब से समझा, बल्कि दूरसंचार की दुनिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का प्रत्यक्ष अनुभव भी हासिल किया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मंशा को मिला व्यावहारिक आधार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत कक्षा छठवीं से ही विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा और इंटर्नशिप से जोड़ने की परिकल्पना की गई है, ताकि वे किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता भी हासिल कर सकें। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए विद्यालय के टेलीकॉम ट्रेड (अप्लाइड लर्निंग विषय) के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के कुल 90 विद्यार्थियों का यह शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया।
स्टूडियो से एंटीना तक समझी तकनीक की पूरी कहानी
प्राचार्य मनोज कुमार बागडे के मार्गदर्शन तथा विषय प्रशिक्षक खिलेन्द्र देवांगन के नेतृत्व में पहुंचे विद्यार्थियों को स्टेशन प्रभारी ने रेडियो प्रसारण की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। विद्यार्थियों ने जाना कि स्टूडियो में तैयार होने वाली आवाज प्रसारण उपकरणों और ट्रांसमीटर के माध्यम से रेडियो तरंगों में परिवर्तित होकर संचार एंटीना के जरिए श्रोताओं तक कैसे पहुंचती है।
इस दौरान विद्यार्थियों ने प्रसारण कक्ष में लगे आधुनिक उपकरणों, तकनीकी व्यवस्थाओं और बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में काम आने वाली जनरेटर जैसी वैकल्पिक ऊर्जा व्यवस्था का भी प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उनके लिए यह अनुभव खास रहा, क्योंकि अब तक रेडियो पर सुनाई देने वाली आवाज के पीछे की तकनीक उनके लिए केवल किताबी जानकारी तक सीमित थी।
ऑप्टिकल फाइबर पर सवाल, विद्यार्थियों की जिज्ञासा ने खींचा ध्यान
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने केवल उपकरणों को देखा ही नहीं, बल्कि तकनीकी प्रक्रियाओं को समझने के लिए सवाल भी पूछे। कक्षा 12वीं की छात्रा टिकेश्वरी वैष्णव और कक्षा 11वीं के छात्र शेख आयान ने स्टेशन प्रभारी से प्रसारण व्यवस्था से जुड़े सवाल किए। इनमें विशेष रूप से यह जानने की जिज्ञासा रही कि पूरी संचार प्रणाली में ऑप्टिकल फाइबर किस प्रकार अपनी भूमिका निभाता है। स्टेशन प्रभारी ने विद्यार्थियों के सवालों का विस्तार से जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
किताबी ज्ञान से आगे रोजगार और कौशल की राह
स्टेशन प्रभारी ने विद्यार्थियों के अनुशासन, सक्रिय सहभागिता और तकनीकी विषयों के प्रति उनकी जिज्ञासा की सराहना की। वहीं, भ्रमण से उत्साहित विद्यार्थियों ने भविष्य में भी इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने की इच्छा जताई।
विषय प्रशिक्षक खिलेन्द्र देवांगन ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें कार्यक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराना भी है। ऐसे प्रायोगिक भ्रमण से विद्यार्थियों को दूरसंचार जैसे तकनीकी क्षेत्रों में कौशल, संभावनाओं और रोजगार के अवसरों को समझने का मौका मिलता है। उन्होंने अन्य विद्यार्थियों से भी व्यावसायिक शिक्षा से जुड़कर नई तकनीकों और कौशलों को सीखने का आह्वान किया।
कुल मिलाकर, एफएम रेडियो स्टेशन का यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक यात्रा नहीं, बल्कि तकनीक को करीब से समझने और भविष्य के संभावित करियर की दिशा पहचानने का अवसर बन गया।



