सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का 5 नवंबर को प्रदेशव्यापी आंदोलन, नारायणपुर में भी रहेगा एक दिवसीय आकस्मिक अवकाश
7-8 माह से लंबित प्रोत्साहन राशि सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय, नवा रायपुर का करेंगे घेराव; जिला इकाई ने कलेक्टर और सीएमएचओ को दी सूचना

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की लंबे समय से लंबित पांच सूत्रीय मांगों के निराकरण को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। संघ द्वारा जारी पत्र के अनुसार आगामी 5 नवंबर 2026 (गुरुवार) को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय, नवा रायपुर में घेराव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जिले के समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एक दिन का आकस्मिक अवकाश लेंगे।

संघ ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नारायणपुर को लिखित सूचना भी प्रेषित की है। पत्र में बताया गया है कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की विभिन्न समस्याओं का निराकरण नहीं होने के कारण संघ को आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा है।

ये हैं संघ की पांच प्रमुख मांगें
संघ ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के विरुद्ध जारी अनुचित एवं दमनात्मक आदेशों का निराकरण करने, पिछले 7-8 माह से लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने तथा प्रोत्साहन राशि को मूल वेतन में समायोजित करने की मांग उठाई है।
इसके साथ ही उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर कार्य-दायित्वों का स्पष्ट एवं न्यायसंगत निर्धारण करने, सुकमा जिले में पीएलपी (PLP) भुगतान संबंधी अनियमितताओं की जांच कर कार्रवाई करने तथा प्रोत्साहन राशि के भुगतान में विलंब और शासन के निर्देशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग भी शामिल है।
जिलेभर के अधिकारी लेंगे आकस्मिक अवकाश
छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ की नारायणपुर जिला इकाई ने स्पष्ट किया है कि 5 नवंबर को आयोजित घेराव कार्यक्रम में सहभागिता के लिए जिले के समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी एक दिवसीय आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे। इसकी सूचना जिला कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भेज दी गई है।
संघ के जिला अध्यक्ष प्रेरणा नायक तथा प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार के हस्ताक्षर से जारी पत्र में शासन-प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र निराकरण करने की अपेक्षा जताई गई है।
अब देखना होगा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की इन पांच सूत्रीय मांगों पर शासन स्तर से क्या पहल होती है और प्रस्तावित आंदोलन के बाद लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।




