अब स्कूल से दूर रहने वाले बच्चों की होगी पहचान! ड्रॉपआउट पर लगाम लगाने पालकों के साथ विद्यालय ने बनाई रणनीति
यू-डाईस डेटा के आधार पर बच्चों की स्थिति पर हुआ मंथन, घर-घर संपर्क और नियमित उपस्थिति की निगरानी पर जोर; शाला प्रबंधन समिति और पालकों की संयुक्त बैठक में लिया हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प

नारायणपुर। कोई बच्चा पढ़ाई से दूर क्यों है? कौन-से बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं और उन्हें दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से कैसे जोड़ा जाए? इन सवालों को लेकर अब विद्यालय स्तर पर पहल तेज होने लगी है। इसी कड़ी में स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय, महावीर चौक नारायणपुर में 31 अक्टूबर 2026 को शाला प्रबंधन समिति एवं पालकों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान से लेकर उन्हें दोबारा विद्यालय से जोड़ने तक की रणनीति पर गंभीर चर्चा हुई।
यू-डाईस डेटा से सामने आएगी बच्चों की स्थिति
जिला कार्यालय के निर्देशानुसार आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए यू-डाईस डेटा के आधार पर ड्रॉपआउट बच्चों की स्थिति की समीक्षा की गई। विशेष रूप से उन बच्चों को प्राथमिकता के साथ विद्यालय से जोड़ने पर जोर दिया गया, जिनकी अपार आईडी बन चुकी है।
बैठक में घर-घर संपर्क अभियान चलाने, पालकों को बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करने और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर निगरानी रखने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। साथ ही विद्यालय, परिवार और समाज के सामूहिक प्रयासों से बच्चों को फिर से पढ़ाई से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई।
जनप्रतिनिधियों से लेकर पालकों तक की रही सहभागिता
बैठक में वार्ड पार्षद श्री प्रवीण गोलछा, संस्था के प्राचार्य श्री मनोज कुमार बागड़े, शाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री सिगोराम सागर, उपाध्यक्ष श्री देवगन नाग, बड़ी संख्या में पालकगण, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने बच्चों की शिक्षा और विद्यालय में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अपनी सहभागिता का भरोसा दिलाया।
बैठक के बाद न्यौता भोज में दिखी सामाजिक एकजुटता
बैठक के समापन के बाद न्यौता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें अतिथियों, पालकों और शिक्षकों ने एक साथ बैठकर सहभोज किया। इस आयोजन ने विद्यालय और अभिभावकों के बीच आपसी संवाद, सहयोग और सौहार्द को मजबूत करने का संदेश दिया।
सिर्फ विद्यालय की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी
बैठक से यह संदेश उभरकर सामने आया कि बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी केवल विद्यालय या शिक्षकों तक सीमित नहीं है। इसमें पालकों और समाज की भी समान भूमिका है। सामूहिक प्रयासों से ही ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।
विद्यालय का संकल्प स्पष्ट है—हर बच्चा विद्यालय में हो और हर बच्चा प्रगति की राह पर आगे बढ़े।




