नारायणपुर

आपदा से मुकाबले की पहली ताकत- तैयारी, जागरूकता और युवा शक्ति

बाढ़ और कोविड-19 के अनुभवों से डॉ. रत्ना नशीने ने विद्यार्थियों को समझाया आपदा प्रबंधन का महत्व, कहा—संकट में सही निर्णय बचा सकता है जिंदगी

नारायणपुर। आपदा के समय कुछ मिनटों की जागरूकता और सही निर्णय किसी की जिंदगी बचा सकते हैं। इसी संदेश के साथ लिंगो मुदीयाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर में विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीने ने विद्यार्थियों को आपदा से पहले, दौरान और बाद में अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल राहत और बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि जोखिम की पहचान, रोकथाम, प्रभाव को कम करना, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया, राहत और पुनर्वास इसके महत्वपूर्ण चरण हैं।

बाढ़ और कोविड के अनुभवों से समझाया संकट प्रबंधन

डॉ. नशीने ने बाढ़ के दौरान किए गए राहत एवं सहायता कार्यों तथा कोविड-19 महामारी के समय किए गए सामुदायिक सेवा कार्यों के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि संकट की घड़ी में केवल संसाधन ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि लोगों का मनोबल बनाए रखना, जरूरतमंदों तक समय पर सहायता पहुंचाना, स्वयंसेवकों को संगठित करना और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग भी बेहद जरूरी होता है।

उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता में विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आपदा के समय सामूहिक प्रयास और मानवीय संवेदना बड़ी ताकत बनती है।

महामारी में जागरूकता और सामुदायिक सहयोग की अहम भूमिका

कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंद परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने, स्वास्थ्य एवं टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने और समुदाय के साथ मिलकर किए गए कार्यों के अनुभव भी विद्यार्थियों के साथ साझा किए गए। उन्होंने कहा कि महामारी जैसी आपदा में जागरूकता, अनुशासन, स्वास्थ्य सुरक्षा और सामुदायिक सहयोग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

आपदा का इंतजार नहीं, तैयारी आज से

डॉ. नशीने ने बाढ़, आग, भूकंप, आकाशीय बिजली, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना और महामारी जैसी विभिन्न आपदाओं के उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को संकट की स्थिति में घबराने के बजाय संयम बनाए रखने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में सबसे पहले स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके बाद सुरक्षित और प्रशिक्षित तरीके से दूसरों की सहायता, संबंधित प्रशासन अथवा आपातकालीन सेवाओं को सूचना तथा उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग किया जाना चाहिए।

युवा बन सकते हैं समुदाय की पहली ताकत

कार्यक्रम में डॉ. पुष्पराज, डॉ. पुष्पेंद्र एवं उमा साहू ने भी सहभागिता की और विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया। विद्यार्थियों को दल भावना, सामुदायिक सहयोग और संकट की स्थिति में जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।

डॉ. नशीने ने कहा कि विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को आपदा प्रबंधन की जानकारी और प्रशिक्षण देकर समुदाय की तैयारी को मजबूत किया जा सकता है। राष्ट्रीय सेवा योजना सहित अन्य युवा समूह प्राथमिक उपचार, सुरक्षा जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से आपदा के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राहत से पहले तैयारी जरूरी

डॉ. रत्ना नशीने ने कहा कि आपदा प्रबंधन को केवल आपदा के बाद किए जाने वाले राहत कार्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जोखिम की पहचान, रोकथाम, आपदा के प्रभाव को कम करना, पूर्व तैयारी, पूर्व चेतावनी और समुदाय की क्षमता बढ़ाना नुकसान को कम करने के महत्वपूर्ण उपाय हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि इसे परिवार, गांव और समुदाय तक भी पहुंचाएं।

“घबराहट नहीं, जागरूकता और सही निर्णय जीवन बचाते हैं”

डॉ. नशीने ने कहा, “आपदा के समय घबराहट नहीं, जागरूकता और सही निर्णय जीवन बचाते हैं। आज का जागरूक विद्यार्थी कल संकट की घड़ी में अपने परिवार और समुदाय के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है।”

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि आपदा आने के बाद केवल राहत की तलाश करने के बजाय उससे पहले तैयारी की संस्कृति विकसित करना जरूरी है। विशेषकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा आपदा के समय समुदाय की पहली सहायता शक्ति बन सकते हैं।

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