जंगलों की पगडंडियों पर दौड़ेगी विज्ञान की ‘सुपर बाइक’, नारायणपुर में ऐसा प्रयोग, जो बदल सकता है पढ़ाई का अंदाज
वन मंत्री केदार कश्यप ने खुद चलाए मॉडल, एयर और वाटर रॉकेट का किया प्रक्षेपण; अब दूरस्थ स्कूलों तक पहुंचेगा प्रयोगों का रोमांच, लेकिन असली परीक्षा पहुंच और निरंतरता की

नारायणपुर, 18 अक्टूबर। जंगलों के बीच बसे गांव… दुर्गम पहाड़ियां… और संसाधनों की सीमाओं के बीच पढ़ाई करते बच्चे। अब इन बच्चों तक विज्ञान पहुंचाने के लिए एक नई पहल शुरू हुई है। नारायणपुर में ‘माड़ विज्ञान दूत STEM बाइक’ को हरी झंडी दिखाते हुए ऐसी उम्मीद जगाई गई है कि विज्ञान अब सिर्फ किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहेगा। बच्चे मॉडल देखेंगे, प्रयोग करेंगे और वैज्ञानिक सिद्धांतों को अपनी आंखों से समझेंगे। लेकिन इस पहल का असली असर तब सामने आएगा, जब यह बाइक दुर्गम वनांचलों के स्कूलों तक नियमित रूप से पहुंचेगी।

मंत्री ने खुद चलाए मॉडल, हवा और पानी से छोड़े रॉकेट
परियोजना का शुभारंभ वन मंत्री केदार कश्यप ने किया। इस दौरान कलेक्टर नम्रता जैन और जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र नाथ पांडे भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मंत्री ने खुद विज्ञान के विभिन्न मॉडलों को आजमाया। स्टेथोस्कोप मॉडल का उपयोग किया, ट्रेन जैसी आवाज निकालने वाले मॉडल को चलाकर देखा और एयर रॉकेट व वाटर रॉकेट लॉन्चर का प्रक्षेपण किया।
मंत्री ने परियोजना की कार्यप्रणाली और उद्देश्यों की जानकारी लेते हुए टीम का उत्साहवर्धन किया। प्रयोगों के जरिए विज्ञान को आसान बनाने की इस पहल ने कार्यक्रम में खास आकर्षण पैदा किया।
अब प्रयोगशाला नहीं, बच्चों तक पहुंचेगा विज्ञान
नारायणपुर के दूरस्थ वनांचलों में बच्चों के लिए विज्ञान के व्यावहारिक प्रयोगों तक पहुंच आसान नहीं है। किताबों में सिद्धांत पढ़ने और उन्हें खुद करके समझने के बीच की यही दूरी कम करने के उद्देश्य से STEM बाइक शुरू की गई है।
इसके माध्यम से विज्ञान के मॉडल और गतिविधियां दूरस्थ विद्यालयों तक पहुंचाई जाएंगी। स्थानीय परिवेश में उपलब्ध सामान्य वस्तुओं की मदद से बच्चों को वैज्ञानिक सिद्धांत समझाने का प्रयास होगा। बच्चे केवल प्रयोग देखेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें खुद करके सीखने, सवाल पूछने और परिणामों को समझने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
ग्लिसरीन से दीप प्रज्वलन, विज्ञान से शुरुआत
कार्यक्रम में ग्लिसरीन की सहायता से दीप प्रज्वलित किया गया। इस गतिविधि ने विज्ञान को प्रयोगों के जरिए समझने की अवधारणा को रेखांकित किया। STEM यानी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित आधारित शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में जिज्ञासा, तार्किक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है।
स्थानीय संसाधनों से तैयार मॉडल कठिन सिद्धांतों को सरल बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को भी विज्ञान को करीब से समझने के अवसर मिलने की उम्मीद है।
असली चुनौती अब शुरू होगी
एक बाइक, विज्ञान के कई मॉडल और दूरस्थ बच्चों तक पहुंचने की बड़ी उम्मीद। लेकिन किसी भी पहल की सफलता उसके शुभारंभ से नहीं, जमीन पर उसके असर से तय होती है। दुर्गम रास्तों पर नियमित पहुंच, प्रयोग सामग्री की उपलब्धता और बच्चों को बार-बार अभ्यास का मौका मिलना इस परियोजना के लिए अहम होगा।
अब सवाल यही है—क्या ‘माड़ विज्ञान दूत STEM बाइक’ उन स्कूलों तक भी पहुंचेगी, जहां विज्ञान को प्रयोगों से समझने के अवसर सबसे कम हैं? नारायणपुर की इस पहल ने शुरुआत तो कर दी है, लेकिन इसकी असली उड़ान तब दिखेगी, जब जंगलों की पगडंडियों से गुजरकर विज्ञान हर बच्चे की जिज्ञासा तक पहुंचेगा।




