बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस को किया संवेदनशील, एक दिवसीय कार्यशाला में मिला प्रशिक्षण
बाल संरक्षण कानून, बच्चों के अधिकार और पुलिस की भूमिका पर हुई चर्चा; CWPO व SJPU के दायित्वों की दी जानकारी

नारायणपुर। बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और अधिकारों को लेकर नारायणपुर पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में एक दिवसीय बाल संरक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल (भापुसे.) के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPO) एवं अन्य पुलिस कर्मचारियों ने भाग लिया।

कार्यशाला में प्रशिक्षक रामनारायण वर्मा एवं सरवत हुसैन नकवी ने बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया। बच्चों से संबंधित मामलों में पुलिस की भूमिका, बाल संरक्षण कानूनों एवं प्रक्रियाओं, बच्चों के अधिकार तथा बाल अपराध से जुड़े प्रकरणों में की जाने वाली आवश्यक कार्रवाई के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
बाल हितैषी व्यवहार पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक संवेदनशील, त्वरित और विधिसम्मत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। प्रशिक्षकों ने कहा कि बाल संरक्षण से संबंधित मामलों में पुलिसकर्मियों का व्यवहार सम्मानजनक एवं बाल हितैषी होना आवश्यक है। साथ ही जरूरतमंद बच्चों को समय पर संरक्षण और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
CWPO और SJPU की भूमिका समझाई
कार्यशाला में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) तथा विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की भूमिका एवं दायित्वों पर भी चर्चा हुई। बच्चों से जुड़े प्रकरणों में संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करने तथा प्रकरणों के प्रभावी निराकरण के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई।
बाल अपराध की रोकथाम पर भी चर्चा
कार्यशाला में बाल अपराध की रोकथाम और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में पुलिस की भूमिका को और प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य जिले में बाल संरक्षण से जुड़े मामलों के बेहतर एवं प्रभावी निराकरण, पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा बच्चों के अधिकारों एवं सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
पुलिस के अनुसार प्रशिक्षण से विभिन्न थानों में पदस्थ बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों एवं संबंधित कर्मचारियों को बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और दक्षता के साथ कार्य करने में मदद मिलेगी। इससे जिले की बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने में भी सहयोग मिलेगा।