अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में बच्चों की सुविधाओं पर प्रशासन की नजर
पीड़ियाकोट बालक आश्रम में भोजन, पढ़ाई और स्वच्छता की व्यवस्था बेहतर मिली, कलेक्टर के निर्देश पर जिला खनि अधिकारी ने किया औचक निरीक्षण

(कैलाश सोनी) नारायणपुर. अबूझमाड़ के सुदूर और पहुंचविहीन अंचलों में संचालित आश्रम-छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुविधाओं को लेकर प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देश पर जिला स्तरीय अधिकारी लगातार इन संस्थानों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जान रहे हैं। इसी क्रम में जिला खनि अधिकारी दालेश्वर यदु ने 5 सितंबर को दुर्गम क्षेत्र स्थित शासकीय बालक आश्रम पीड़ियाकोट का औचक निरीक्षण किया।

बच्चों से पूछा- पढ़ाई कैसी चल रही है?
निरीक्षण के दौरान जिला खनि अधिकारी ने आश्रम में बच्चों के रहने, भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पढ़ाई से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने बच्चों के साथ सीधे संवाद कर उनकी दिनचर्या, पढ़ाई और उपलब्ध अध्ययन सामग्री की जानकारी ली। बच्चों से उनकी जरूरतों और समस्याओं के बारे में भी पूछा गया।
दुर्गम और पहुंचविहीन क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद आश्रम में बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन, स्वच्छ वातावरण, स्वास्थ्य देखभाल और अध्ययन की बेहतर व्यवस्था पाई गई। निरीक्षण के दौरान आश्रम प्रबंधन एवं कर्मचारियों की व्यवस्थाओं के प्रति सजगता की भी सराहना की गई।
मौजूदा व्यवस्थाएं बनाए रखने के निर्देश
जिला खनि अधिकारी ने आश्रम में उपलब्ध सुविधाओं को निरंतर बनाए रखने के साथ बच्चों की आवश्यकताओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों को भी पढ़ाई के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध होना चाहिए।
हर आश्रम-छात्रावास तक पहुंच रहे अधिकारी
कलेक्टर नम्रता जैन ने जिले के सभी आश्रम एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। अधिकारी इन संस्थानों का निरीक्षण कर भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति देख रहे हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों और आवश्यकताओं के त्वरित निराकरण पर भी प्रशासन का जोर है।
दूरस्थ बच्चों तक सुविधाएं पहुंचाने की पहल
प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य जिले के दूरस्थ अंचलों में रहकर अध्ययन करने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक और आवासीय वातावरण के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पीड़ियाकोट आश्रम का निरीक्षण इसी सतत निगरानी व्यवस्था की कड़ी के रूप में किया गया।