नारायणपुर

3.20 करोड़ की पंचायत राशि पर डाका! अबूझमाड़–नारायणपुर के 30 सचिवों पर जिला पंचायत का शिकंजा, 45 दिन में होगी वसूली

निर्माण कार्यों की राशि निकालकर अधूरे छोड़े गए काम, वित्तीय अनियमितता पर जिला पंचायत का बड़ा एक्शन। RRC जारी कर वसूली के निर्देश, आदिवासी अंचल की पंचायत व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

नारायणपुर। आदिवासी अंचल अबूझमाड़ और नारायणपुर की पंचायत व्यवस्था में वर्षों से चल रहे कथित ‘बंद दरबार’ पर आखिरकार प्रशासनिक कार्रवाई की मुहर लग गई है। जिला पंचायत नारायणपुर ने निर्माण कार्यों के नाम पर शासकीय राशि निकालने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं करने और वित्तीय अनियमितता के आरोपों में 30 ग्राम पंचायत सचिवों से कुल 3 करोड़ 19 लाख 67 हजार रुपये की वसूली का आदेश जारी कर दिया है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत नारायणपुर द्वारा 21 जुलाई 2026 को जारी आदेश में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नारायणपुर एवं ओरछा को निर्देशित किया गया है कि संबंधित सचिवों के विरुद्ध राजस्व वसूली प्रमाण पत्र (RRC) दर्ज कर 45 दिनों के भीतर पूरी राशि वसूल कर पंचायत खातों में जमा कराई जाए।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब लंबे समय से आदिवासी क्षेत्रों में पंचायत निर्माण कार्यों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय जवाबदेही की कार्रवाई मानी जा रही है।


निर्माण राशि निकाली, लेकिन काम अधूरे छोड़ दिए

जिला पंचायत के आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि कई ग्राम पंचायत सचिवों ने निर्माण कार्यों के लिए राशि आहरित कर ली, लेकिन कार्य पूर्ण नहीं किए। विभागीय जांच में कई मामलों में वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद यह कार्रवाई प्रारंभ की गई।

आदेश के अनुसार यह कृत्य—

  • शासकीय परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाला माना गया है।
  • छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
  • छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

45 दिन का अल्टीमेटम, हर महीने देनी होगी रिपोर्ट

CEO जिला पंचायत ने SDM नारायणपुर और ओरछा को निर्देश दिए हैं कि—

  • संबंधित सभी सचिवों के खिलाफ तत्काल RRC दर्ज किया जाए।
  • 45 दिनों के भीतर पूरी राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
  • वसूली गई राशि पंचायत खातों में जमा कराई जाए।
  • कार्रवाई एवं वसूली की मासिक प्रगति रिपोर्ट जिला पंचायत को भेजी जाए।

इन सचिवों पर सबसे ज्यादा वसूली

जारी सूची के अनुसार सबसे अधिक वसूली इन सचिवों से की जानी है—

सचिव वसूली राशि
रमेश विश्वकर्मा (ओरछा) ₹40.82 लाख
कार्तिक नंदी ₹40.32 लाख
विनोद गावड़े ₹31.22 लाख
विमल द्विवेदी ₹25.86 लाख
जितेन्द्र कुमेटी ₹22.73 लाख (सूची में एक अन्य प्रविष्टि ₹4.60 लाख की भी दर्ज है)
गुड्डी कश्यप ₹16.11 लाख
सुरेश साहू ₹12.00 लाख
संतुराम शोरी ₹11.32 लाख
मंगनी ध्रुव ₹11.19 लाख
विभूति राय ₹10.57 लाख

इसके अलावा श्रीमती हुलसी कावड़े, शांतु शोरी, जयराम नाग, कमलू कुमेटी, महावीर भोयर, बेलमती मांझी, मंगलराम सलाम, बलराम मरकाम सहित अन्य सचिवों के नाम भी सूची में शामिल हैं।


आदिवासी इलाकों की पंचायत व्यवस्था पर बड़ा सवाल

अबूझमाड़ और नारायणपुर के दूरस्थ पंचायत क्षेत्रों में वर्षों से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, अधूरे विकास कार्यों और शासकीय राशि के उपयोग को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई गांवों में सड़क, भवन, सामुदायिक संरचनाएं और अन्य निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरे रहने की शिकायतें स्थानीय स्तर पर उठती रही हैं।

जिला पंचायत की यह कार्रवाई इन शिकायतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि वसूली का आदेश वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर जारी प्रशासनिक कार्रवाई है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक दोष सिद्ध होना या अंतिम कानूनी निष्कर्ष अलग प्रक्रिया का विषय होता है।


प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप

करीब 3.20 करोड़ रुपये की वसूली संबंधी आदेश सामने आने के बाद पंचायत एवं प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। यदि निर्धारित समय-सीमा में वसूली नहीं होती है तो संबंधित अधिकारियों पर आगे की वैधानिक कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।

जिला पंचायत के इस फैसले को सरकारी योजनाओं में वित्तीय अनुशासन लागू करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।


खबर एक नजर में

  • 30 ग्राम पंचायत सचिवों पर कार्रवाई
  • ₹3.19 करोड़ (319.67 लाख) की वसूली का आदेश
  • नारायणपुर एवं ओरछा विकासखंड के मामले
  • 45 दिन में RRC के माध्यम से वसूली के निर्देश
  • निर्माण कार्य अधूरे छोड़ने एवं वित्तीय अनियमितता का मामला
  • हर माह जिला पंचायत को प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य

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