मशरूम की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, RAWE विद्यार्थियों ने सीखी वैज्ञानिक तकनीक
कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण: स्पॉन से लेकर तुड़ाई तक समझी उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रोजगार के अवसरों पर भी हुई चर्चा

नारायणपुर। कृषि की आधुनिक एवं लाभकारी तकनीकों से विद्यार्थियों को जोड़ने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र में RAWE (Rural Agricultural Work Experience) कार्यक्रम के तहत लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, नारायणपुर के विद्यार्थियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को नजदीक से समझा और इसके व्यावसायिक महत्व की जानकारी हासिल की।

कार्यक्रम में RAWE विद्यार्थी तुषार सैमसन एवं नवीन उपस्थित रहे। कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नशीने के मार्गदर्शन में आयोजित प्रशिक्षण में डॉ. विवेक विश्वकर्मा, सहायक प्राध्यापक (पादप रोग विज्ञान) एवं कृषि विज्ञान केंद्र के प्रोग्राम असिस्टेंट इन्द्र कुमार केमरो ने विद्यार्थियों को मशरूम उत्पादन के विभिन्न चरणों की विस्तार से जानकारी दी।
माध्यम तैयार करने से तुड़ाई तक समझे बारीकियां
डॉ. विवेक विश्वकर्मा ने बताया कि मशरूम उत्पादन में प्रत्येक चरण का वैज्ञानिक तरीके से पालन करना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को उत्पादन के लिए उपयुक्त माध्यम तैयार करने, स्पॉन डालने, बैग तैयार करने के साथ ही तापमान और नमी के उचित प्रबंधन की जानकारी दी। इसके बाद मशरूम की वृद्धि, देखभाल और सही समय पर तुड़ाई की प्रक्रिया भी समझाई गई।
पोषण के साथ आय का भी बेहतर जरिया
प्रशिक्षण के दौरान मशरूम के पोषण मूल्य और उपयोगिता पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों को बताया गया कि कम स्थान और अपेक्षाकृत कम संसाधनों में मशरूम उत्पादन किसानों के लिए अतिरिक्त आय और रोजगार का साधन बन सकता है। वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान इसे लाभकारी कृषि गतिविधि के रूप में विकसित कर सकते हैं।
इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के डॉ. नवीन मरकाम, डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, पुष्पराज दीवान, होमद्र सिवाना, सोमा बंछोर एवं उमा साहू उपस्थित रहे। RAWE विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण के दौरान मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया को समझते हुए आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों से व्यावहारिक रूप से जोड़ना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए उन्हें तैयार करना रहा।
