नारायणपुर

रोजगार के वादे पर घिरा बीएसपी प्रबंधन, स्थानीय युवाओं ने किया चक्काजाम

20 जून के लिखित आश्वासन के बाद भी भर्ती नहीं होने पर नाराजगी, सात दिन का अल्टीमेटम; 23 गोद गांवों के विकास का मुद्दा भी उठा

मनिष कुंजाम ने किया आंदोलन का समर्थन, प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद चक्काजाम स्थगित

नारायणपुर। रावघाट माइंस में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर युवाओं ने खोड़गांव चौक पर चक्काजाम कर विरोध जताया। युवा बेरोजगार संघ समिति के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में बस्तरिया राज मोर्चा के संस्थापक और सुकमा के पूर्व विधायक मनिष कुंजाम भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बीएसपी प्रबंधन पर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिखित आश्वासन के बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं करने का आरोप लगाया। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद आंदोलनकारियों ने प्रबंधन को सात दिन का समय देते हुए चक्काजाम स्थगित कर दिया। युवाओं ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में मांगों पर उचित निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा और इसे और तेज किया जा सकता है।

20 जून के लिखित आश्वासन पर उठाए सवाल

युवा बेरोजगार संघ समिति के अध्यक्ष मधेश्वर जैन ने आरोप लगाया कि 20 जून 2026 को बीएसपी अधिकारियों और प्रबंधन स्तर पर स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का लिखित आश्वासन दिया गया था। नारायणपुर कलेक्टर के माध्यम से प्रत्येक पंचायत से 10 बेरोजगार युवाओं को बूढ़ादेव अंजरेल माइंस में भर्ती करने का आश्वासन भी दिए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद तय समय में भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होने से युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है।

समिति का कहना है कि रावघाट माइंस के आसपास के गांवों के युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, जबकि खदान में बाहरी श्रमिकों को काम दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आंदोलनकारियों ने प्रबंधन से लिखित आश्वासन पूरा करने और भर्ती प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की।

23 गोद गांवों के विकास का मुद्दा भी उठाया

आंदोलनकारियों ने रावघाट माइंस के आसपास स्थित 23 गोद गांवों के विकास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि क्षेत्र के विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे हैं।

समिति ने आरोप लगाया कि ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार, नेपाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अन्य क्षेत्रों से आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से श्रमिकों को काम पर रखा जा रहा है, जबकि आसपास के गांवों के युवा रोजगार के लिए परेशान हैं। आंदोलनकारियों की मांग है कि भर्ती में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाए और क्षेत्र के लोगों को खनन परियोजना का लाभ मिले।

भारी वाहनों से जर्जर हो रहीं सड़कें

रोजगार के साथ आंदोलनकारियों ने क्षेत्र की सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि रावघाट माइंस से लौह अयस्क के परिवहन में लगे भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से कई सड़कें खराब हो गई हैं। इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है और स्कूली बच्चों के आवागमन पर भी असर पड़ रहा है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब क्षेत्र से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क का परिवहन हो रहा है, तो आसपास के गांवों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार होना चाहिए। खनन परियोजना से होने वाले विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने की मांग भी उठाई गई।

मनिष कुंजाम ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

आंदोलन में शामिल बस्तरिया राज मोर्चा के संस्थापक और सुकमा के पूर्व विधायक मनिष कुंजाम ने स्थानीय युवाओं की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रोजगार और विकास से जुड़े मुद्दों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बीएसपी प्रबंधन को चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र हो सकता है।

प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सात दिन का समय

खोड़गांव चौक पर जारी चक्काजाम को प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद स्थगित किया गया। आंदोलनकारियों ने प्रबंधन को मांगों पर निर्णय लेने के लिए सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। समिति ने स्पष्ट किया कि इस अवधि में भर्ती प्रक्रिया और अन्य मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।

अब बीएसपी प्रबंधन के अगले कदम पर नजर

फिलहाल युवाओं की प्रमुख मांगों में स्थानीय बेरोजगारों की भर्ती जल्द शुरू करना, 23 गोद गांवों को रोजगार और विकास में प्राथमिकता देना तथा खनन क्षेत्र से प्रभावित सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना शामिल है। अब देखना होगा कि बीएसपी प्रबंधन सात दिन की समय-सीमा में इन मांगों पर क्या निर्णय लेता है।

स्थानीय रोजगार, क्षेत्रीय विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े इन सवालों के बीच रावघाट माइंस प्रबंधन की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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