मानसून से पहले खेत संवारिए, धान की पैदावार बढ़ाइए
वैज्ञानिक तैयारी से घटेगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन; किसानों को डॉ. विवेक विश्वकर्मा की सलाह

गहरी जुताई, मेड़बंदी, मिट्टी परीक्षण, बीजोपचार और जल निकास पर विशेष जोर
नारायणपुर। खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान की खेती की वैज्ञानिक तैयारी अपनाने की सलाह दी है। लिंगो मुदियाल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन (आईजीकेवी) नारायणपुर के पादप रोग विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक विश्वकर्मा ने कहा कि यदि किसान मानसून पूर्व खेत की समुचित तैयारी और अनुशंसित कृषि तकनीकों का पालन करें तो धान की फसल में बेहतर अंकुरण, स्वस्थ वृद्धि और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे उत्पादन लागत भी कम होगी और फसल रोगों व कीटों के प्रकोप से सुरक्षित रहेगी।

डॉ. विश्वकर्मा ने बताया कि मानसून आने से पहले खेत की गहरी जुताई करना अत्यंत आवश्यक है। इससे मिट्टी में छिपे कीट, रोगजनक एवं खरपतवार नष्ट होते हैं। इसके बाद 2 से 3 बार हैरो अथवा कल्टीवेटर से जुताई कर खेत को भुरभुरा एवं समतल बनाया जाए। खेत की मजबूत मेड़बंदी करने से वर्षा जल का संरक्षण होता है और फसल को पर्याप्त नमी मिलती है।
उन्होंने किसानों से मिट्टी परीक्षण कराकर उसी के अनुरूप उर्वरकों का उपयोग करने की अपील की। अंतिम जुताई के दौरान अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या कम्पोस्ट डालने से मिट्टी की उर्वरता, जैविक गुण तथा जलधारण क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे फसल का विकास बेहतर होता है।
इन सावधानियों का रखें विशेष ध्यान
- प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीजों का ही चयन करें।
- बुवाई से पहले बीजोपचार अवश्य करें।
- खेत में जल निकास की समुचित व्यवस्था रखें।
- प्रारंभिक अवस्था में ही खरपतवार नियंत्रण करें।
- रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी करते रहें।
- अधिक वर्षा होने पर खेत में जलभराव नहीं होने दें।
- समय पर नर्सरी तैयार कर स्वस्थ पौध का ही उपयोग करें।
अभी से शुरू करें खरीफ की तैयारी
डॉ. विवेक विश्वकर्मा ने कहा कि खरीफ मौसम की सफलता खेत की प्रारंभिक तैयारी पर निर्भर करती है। समय रहते वैज्ञानिक पद्धति अपनाने से किसानों को अधिक उत्पादन के साथ बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा। उन्होंने किसानों से किसी भी तकनीकी जानकारी या कृषि संबंधी सलाह के लिए लिंगो मुदियाल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, नारायणपुर के कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करने की अपील की।
एक्सपर्ट
“मानसून से पहले खेत की वैज्ञानिक तैयारी धान उत्पादन की मजबूत नींव है। गहरी जुताई, मिट्टी परीक्षण और बीजोपचार जैसे छोटे कदम किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा दिला सकते हैं।”
— डॉ. विवेक विश्वकर्मा, सहायक प्राध्यापक, पादप रोग विज्ञान विभाग, लिंगो मुदियाल कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन, नारायणपुर।




