नारायणपुर

जहां कभी बंदूक का साया था, वहां अब तिरंगे की शान!

अबूझमाड़ के सुदूर गांवों में BSF का ‘हर घर तिरंगा’ अभियान; कोरोस्कोडो, हचेकोटी, अदनार, मरकाबेड़ा में घर-घर पहुंचा राष्ट्रध्वज, बच्चों से लेकर ग्रामीणों तक दिखा जबरदस्त उत्साह

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ की घनी पहाड़ियों और जंगलों में इस बार आजादी का पर्व एक नई तस्वीर के साथ दस्तक दे रहा है। जिन गांवों में कभी नक्सलवाद के साये के कारण बाहरी दुनिया की पहुंच बेहद सीमित थी, वहां अब तिरंगा घर-घर पहुंच रहा है। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 129वीं वाहिनी ने अबूझमाड़ के बेहद अंदरूनी इलाकों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान चलाकर ग्रामीणों के बीच राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए।

क्षेत्रीय मुख्यालय BSF रायपुर के अधीन चलाए गए इस अभियान में कोरोस्कोडो, हचेकोटी, अदनार, मरकाबेड़ा और आसपास के गांवों में जवानों ने ग्रामीणों और बच्चों के बीच तिरंगे वितरित किए। ग्रामीणों ने भी पूरे उत्साह और सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज थामा और अपने घरों पर तिरंगा फहराया।

चार दशक की दहशत के बीच पहली बार दिखा ऐसा उत्सव

अबूझमाड़ के ये इलाके लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के साथ नक्सली प्रभाव के कारण यहां सुरक्षा बलों और बाहरी लोगों की पहुंच भी सीमित रही। ऐसे में गांवों में राष्ट्रीय पर्व के दौरान तिरंगा लेकर ग्रामीणों का इस तरह सामने आना बदलते अबूझमाड़ की तस्वीर पेश कर रहा है।

कल तक जहां आजादी के पर्व पर भय का साया रहता था, आज वहीं बच्चे हाथों में तिरंगा लेकर मुस्कुराते नजर आ रहे हैं।

यह बदलाव केवल एक अभियान की तस्वीर नहीं, बल्कि उन इलाकों में बढ़ती पहुंच और ग्रामीणों के बीच बनते भरोसे का संकेत भी है।

जवान पहुंचे तो बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान

‘हर घर तिरंगा’ अभियान के दौरान BSF जवानों ने ग्रामीणों और बच्चों को राष्ट्रीय ध्वज के साथ चॉकलेट और बिस्किट भी वितरित किए। जवानों को अपने बीच देखकर ग्रामीणों और बच्चों में खासा उत्साह नजर आया।

कई बच्चों ने हाथों में छोटे-छोटे तिरंगे थामे। ग्रामीणों ने भी राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान के साथ अपने घरों पर लगाया। गांवों की कच्ची गलियों, पारंपरिक घरों और हरे-भरे जंगलों के बीच लहराते तिरंगे ने अबूझमाड़ की बदलती तस्वीर को जैसे एक नई पहचान दे दी।

तिरंगे के साथ बढ़ रहा भरोसा

BSF की यह पहल केवल राष्ट्रीय ध्वज वितरण तक सीमित नहीं रही। इसके जरिए सुरक्षा बलों ने ग्रामीणों के साथ संवाद और विश्वास को मजबूत करने का संदेश भी दिया।

अबूझमाड़ के अंदरूनी क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने के साथ सड़क, संपर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य जनसुविधाओं तक पहुंच का रास्ता भी धीरे-धीरे खुल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों की ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भागीदारी को सुरक्षा बल राष्ट्रीय एकता और मुख्यधारा से जुड़ाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

काले झंडों के दौर से तिरंगे के सम्मान तक

अबूझमाड़ में लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों का असर रहा है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व भी इस प्रभाव से अछूते नहीं रहे। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। नए सुरक्षा कैंपों के जरिए सुरक्षा बल अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं और प्रशासनिक तथा जनसुविधाओं का विस्तार भी हो रहा है।

ऐसे में हाथ में बंदूक के बजाय हाथ में तिरंगा और चेहरे पर डर के बजाय उत्साह की तस्वीर अपने आप में बड़ा बदलाव है।

अबूझमाड़ के गांवों से निकला बड़ा संदेश

कोरोस्कोडो, हचेकोटी, अदनार और मरकाबेड़ा जैसे गांवों में तिरंगा लेकर खड़े ग्रामीणों की तस्वीरें केवल स्वतंत्रता दिवस की तस्वीरें नहीं हैं। ये तस्वीरें बताती हैं कि अबूझमाड़ के दूरस्थ इलाकों में भी राष्ट्रीय एकता, विश्वास और लोकतांत्रिक जुड़ाव की भावना मजबूत हो रही है।

BSF के अनुसार अभियान का उद्देश्य देश के दुर्गम इलाकों तक पहुंचकर ग्रामीणों के साथ विश्वास का रिश्ता मजबूत करना तथा शांति, विकास और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाना है।

“नक्सलवाद के साये से तिरंगे की शान तक… अबूझमाड़ में बदल गई तस्वीर”

जहां कभी डर था, वहां अब तिरंगा है।
जहां अलगाव था, वहां अब विश्वास है।
और जहां राष्ट्रीय पर्व मनाना चुनौती था, वहां अब घर-घर आजादी का उत्सव है।

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