बीजापुर

कभी खौफ का गढ़, अब तिरंगे की शान!

नारायणपुर से करेगुट्टा की पहाड़ियों तक पहुंची बस्तर तिरंगा यात्रा; नक्सल प्रभाव वाले इलाके में लहराया राष्ट्रध्वज, शहीदों को नमन और ‘नए बस्तर’ का संकल्प

बीजापुर, 14 अगस्त। बस्तर की उन पहाड़ियों पर, जहां कभी नक्सल हिंसा और भय की चर्चा होती थी, अब तिरंगे की शान और राष्ट्रभक्ति का संदेश गूंज रहा है। शहीदों के सम्मान और राष्ट्र गौरव का संदेश लेकर निकली बस्तर तिरंगा यात्रा नारायणपुर से आगे बढ़ते हुए बीजापुर के ताड़पाल स्थित करेगुट्टा की पहाड़ियों तक पहुंची। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के नेतृत्व में निकली यात्रा ने बदलते बस्तर की नई तस्वीर पेश की।

करेगुट्टा की पहाड़ियों पर तिरंगे का पहुंचना महज एक यात्रा का पड़ाव नहीं, बल्कि शांति, सुरक्षा और बदलते बस्तर में बढ़ते विश्वास का प्रतीक बन गया। कभी नक्सल प्रभाव के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में राष्ट्रीय ध्वज का पूरे गौरव के साथ लहराना क्षेत्र में बदलते माहौल का बड़ा संदेश माना जा रहा है।

नारायणपुर से निकली यात्रा, शहीदों को नमन करते हुए करेगुट्टा पहुंची

बस्तर तिरंगा यात्रा के तीसरे दिन बीजापुर के सांस्कृतिक भवन मैदान से बाइक रैली निकाली गई। यात्रा के दौरान टी-पॉइंट शहीद द्वार पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद मुरकीनार में ‘एक पेड़ शहीद के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया और शहीद परिवारों से आत्मीय मुलाकात की गई।

आवापल्ली में जनचर्चा, उसूर में शहीद परिवारों और स्थानीय नागरिकों से संवाद तथा नंबी में स्थानीय सहभोज के बाद यात्रा ताड़पाल स्थित बेस कैंप पहुंची। यहां से यात्रा करेगुट्टा की पहाड़ियों तक पहुंची, जहां तिरंगे ने बस्तर के बदलते दौर की तस्वीर को और मजबूत किया।

पहाड़ियों पर तिरंगा, नीचे गूंजा राष्ट्रगौरव

करेगुट्टा की पहाड़ियों पर तिरंगा लहराते ही माहौल राष्ट्रभक्ति से भर उठा। यात्रा में शामिल लोगों के लिए यह क्षण भावुक और ऐतिहासिक रहा। जिन इलाकों में कभी हिंसा का साया था, वहां अब तिरंगा शांति और विश्वास का संदेश दे रहा है।

यात्रा के माध्यम से शहीद जवानों के बलिदान को याद करते हुए नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा, राष्ट्रीय एकता और देश के विकास से जोड़ने का संदेश दिया गया।

‘यह बदलते बस्तर की यात्रा है’—केदार कश्यप

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि नारायणपुर से करेगुट्टा की पहाड़ियों तक पहुंची बस्तर तिरंगा यात्रा बदलते बस्तर की यात्रा है। जिन क्षेत्रों में कभी नक्सल हिंसा का प्रभाव था, वहां आज राष्ट्रध्वज पूरे गौरव के साथ लहरा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप बस्तर भी शांति, सुरक्षा और विकास के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। तिरंगा यात्रा का उद्देश्य केवल राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान प्रकट करना नहीं, बल्कि बस्तर की शांति के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करना और नई पीढ़ी में राष्ट्रभावना को मजबूत करना भी है।

शहीद परिवारों से मुलाकात, ‘एक पेड़ शहीद के नाम’ का संदेश

यात्रा के दौरान शहीद परिवारों से मुलाकात को विशेष महत्व दिया गया। शहीदों के परिजनों से आत्मीय संवाद कर उनके त्याग और बलिदान को नमन किया गया। मुरकीनार में ‘एक पेड़ शहीद के नाम’ के तहत पौधरोपण कर बलिदान और प्रकृति संरक्षण को एक साथ जोड़ने का संदेश भी दिया गया।

आयोजकों के अनुसार, शहीदों का सम्मान, तिरंगे का अभिमान और विकसित बस्तर का संकल्प यात्रा की मूल भावना है।

नक्सल प्रभाव से राष्ट्रीय विश्वास तक… बदल रही बस्तर की तस्वीर

बस्तर लंबे समय तक नक्सल हिंसा के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन सुरक्षा, सड़क, संचार और विकास की बढ़ती पहुंच के बीच अब अंदरूनी इलाकों में राष्ट्रीय पर्व और तिरंगे से जुड़े आयोजन भी नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।

करेगुट्टा की पहाड़ियों पर लहराता तिरंगा इसी बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया। भय और हिंसा की जगह विश्वास, संवाद और विकास की बात हो रही है।

तिरंगा यात्रा ने इसी बदलाव को जनभावना से जोड़ते हुए यह संदेश दिया कि बस्तर की पहचान अब केवल संघर्ष से नहीं, बल्कि शांति, विकास, संस्कृति, बलिदान और राष्ट्रगौरव से भी होगी।

“जहां कभी नक्सलवाद का साया था, वहां अब तिरंगे की छांव!”

नारायणपुर से करेगुट्टा तक पहुंची तिरंगा यात्रा ने दिया संदेश—
शहीदों का सम्मान, तिरंगे का अभिमान और नए बस्तर का संकल्प।

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