समीक्षा बैठक में ‘अभद्रता’ के आरोप, नारायणपुर CHO संघ ने खोला मोर्चा
बेमेतरा सीएमएचओ पर महिला कर्मचारियों से कथित बदसलूकी के गंभीर आरोप; खंड चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन, जांच कर POSH Act के तहत कार्रवाई की मांग

नारायणपुर। बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की समीक्षा बैठकों में कथित अभद्र भाषा और कर्मचारियों के साथ अपमानजनक व्यवहार का मामला अब नारायणपुर तक पहुंच गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) संघ, नारायणपुर ने विरोध दर्ज कराते हुए खंड चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने समीक्षा बैठकों के दौरान महिला कर्मचारियों के साथ कथित अनुचित व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

संघ की ओर से दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बेमेतरा में आयोजित समीक्षा एवं सामूहिक बैठकों के दौरान कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल और सार्वजनिक रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। संघ ने विशेष रूप से महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ कथित व्यवहार को गंभीर बताते हुए इसकी जांच की मांग उठाई है।
महिला कर्मचारियों की गरिमा से जुड़े गंभीर आरोप
CHO संघ के अनुसार शिकायत में कुछ महिला कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर ऐसा व्यवहार किए जाने का उल्लेख है, जिससे वे स्वयं को असहज और अपमानित महसूस करती हैं।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि बैठकों के दौरान कथित रूप से महिला कर्मचारियों के कपड़े पकड़कर अपनी ओर खींचने, लेजर लाइट से शरीर के विशेष हिस्से की ओर संकेत करने तथा सार्वजनिक रूप से हंसी-मजाक करने जैसी घटनाएं हुईं।
संघ ने एक महिला कर्मचारी से कथित तौर पर “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तुम्हारा बॉयफ्रेंड है क्या?” जैसी व्यक्तिगत टिप्पणी किए जाने का भी आरोप लगाया है। संघ ने इन आरोपों को महिला कर्मचारियों की गरिमा और कार्यस्थल की मर्यादा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।
आरोप सही तो कार्यस्थल की गरिमा पर गंभीर सवाल
संघ का कहना है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अभद्र व्यवहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षित वातावरण के अधिकार से भी जुड़ जाएगा।
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और प्रतितोष के लिए 2013 का POSH कानून लागू है। इसके तहत शिकायतों के निवारण के लिए निर्धारित संस्थागत व्यवस्था का प्रावधान है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी विशाखा बनाम राजस्थान राज्य मामले में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम और शिकायत निवारण के लिए दिशा-निर्देश दिए थे, जो बाद में 2013 के कानून के लिए आधार बने।
‘विशाखा दिशा-निर्देशों’ के तहत जांच की मांग
CHO संघ ने मांग की है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच कराई जाए। संघ ने कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी कार्यस्थल पर गरिमापूर्ण और गैर-शत्रुतापूर्ण वातावरण को महत्वपूर्ण माना है तथा यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतों पर सक्षम स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया है।
ज्ञापन के बाद अब जांच पर नजर
नारायणपुर CHO संघ के प्रतिनिधियों और सदस्यों ने खंड चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। संघ का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत महिला कर्मचारियों को सम्मानजनक, सुरक्षित और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण मिलना चाहिए।
हालांकि, ये सभी आरोप संघ की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित अधिकारी का पक्ष इस जानकारी में उपलब्ध नहीं है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
संघ की प्रमुख मांगें
- शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
- महिला कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- कार्यस्थल पर महिलाओं से जुड़े कानूनों के प्रावधानों का पालन हो।
- आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
- भविष्य की समीक्षा बैठकों में कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।




