नक्सल स्मारक ढहा, भरोसे की नई इबारत लिख रहा माड़
उसेबेड़ा में ग्रामीणों के साथ सुरक्षा बलों की चौपाल, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं; पेयजल समस्या के समाधान का भरोसा

(कैलाश सोनी) नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम अंचल में कभी भय और बंदूक की छाया का प्रतीक रहे नक्सली प्रभाव वाले क्षेत्रों में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है। माड़ मैत्री अभियान के तहत गुरुवार को नारायणपुर जिले के ग्राम उसेबेड़ा में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जहां ग्रामीणों और सुरक्षा बलों ने मिलकर न केवल संवाद का नया अध्याय लिखा, बल्कि वर्षों से खड़े नक्सली स्मारक को भी आपसी सहमति और जनसहभागिता से ध्वस्त कर दिया। यह घटनाक्रम केवल एक ढांचे के हटाए जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे क्षेत्र में शांति, विकास और लोकतांत्रिक विश्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक रॉबिंसन गुड़िया तथा 41वीं वाहिनी आईटीबीपी के कमांडेंट बेनुधर नायक के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस और आईटीबीपी के जवान गांव पहुंचे। ग्रामीणों के बीच बैठक आयोजित कर उनकी समस्याएं सुनी गईं तथा शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच सहज संवाद का माहौल दिखाई दिया, जिसने लंबे समय से बने अविश्वास की दीवारों को कमजोर करने का संकेत दिया।

ग्रामीणों ने खुद बढ़ाया हाथ, हटाया नक्सलवाद का प्रतीक
उसेबेड़ा में वर्षों से मौजूद नक्सली स्मारक क्षेत्र के अतीत की याद दिलाता था। माड़ मैत्री अभियान के दौरान जब गांव में विकास, शांति और जनसहभागिता पर चर्चा हुई तो ग्रामीणों ने स्वयं स्मारक हटाने के पक्ष में सहमति जताई। इसके बाद ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से स्मारक को ध्वस्त किया गया।
मौके पर मौजूद तस्वीरों में ग्रामीणों और सुरक्षा बलों को एक साथ खड़े देखा जा सकता है। कुछ ग्रामीण स्वयं स्मारक को तोड़ने में सहयोग करते नजर आए। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि अब क्षेत्र की नई पीढ़ी हिंसा के बजाय विकास और मुख्यधारा के साथ जुड़ने को प्राथमिकता दे रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि स्मारक हटना केवल एक संरचना का हटना नहीं है, बल्कि यह उस दौर से बाहर निकलने का संकेत है जिसमें गांवों का विकास लंबे समय तक बाधित रहा। ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों के प्रयासों की सराहना करते हुए क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता भी बताई।
चौपाल में उठी पेयजल समस्या
जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं। घोटुलपारा के निवासियों ने पेयजल संकट को प्रमुख समस्या बताते हुए कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता चुनौती बन जाती है। ग्रामीणों की बात सुनने के बाद अधिकारियों ने संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।
सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने ग्रामीणों से कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और जनसमस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। बैठक में ग्रामीणों को विभिन्न विभागों की योजनाओं, पात्रता और लाभ लेने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई।
स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं गांव तक
माड़ क्षेत्र के कई गांव आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं। ऐसे में अभियान के दौरान स्वास्थ्य सेवा को भी प्रमुखता दी गई। जरूरतमंद ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया गया तथा आवश्यक दवाइयों का वितरण किया गया।
तस्वीरों में सुरक्षा बलों के जवान ग्रामीणों और बच्चों को दवाइयां देते दिखाई दे रहे हैं। एक जवान द्वारा छोटे बच्चे को दवा उपलब्ध कराते हुए दिखाई देना अभियान के मानवीय पक्ष को भी सामने लाता है। स्वास्थ्य परीक्षण और दवा वितरण से ग्रामीणों ने राहत महसूस की तथा भविष्य में ऐसे शिविरों की संख्या बढ़ाने की मांग की।
विश्वास की डोर हुई मजबूत
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच बढ़ता विश्वास रहा। गांव के बड़े पेड़ के नीचे आयोजित संवाद में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं बिना किसी संकोच के साझा कीं, वहीं सुरक्षा बलों ने भी उनकी बातों को गंभीरता से सुना।
ग्रामीणों का कहना था कि पहले सुरक्षा बलों और गांवों के बीच संवाद के अवसर सीमित थे, लेकिन अब नियमित जनसंपर्क कार्यक्रमों से स्थिति बदल रही है। इससे लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है और शासन की योजनाओं के प्रति जागरूकता भी आई है।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ता माड़
अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सल प्रभाव और भौगोलिक दुर्गमता के कारण विकास की मुख्यधारा से दूर रहा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के साथ स्थिति में बदलाव दिखाई दे रहा है। माड़ मैत्री अभियान इसी बदलाव को गति देने का प्रयास माना जा रहा है।
अभियान का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना नहीं, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझना, उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ना और विकास की प्रक्रिया में सहभागी बनाना है। उसेबेड़ा में आयोजित कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब स्थानीय समुदाय और सुरक्षा बल साथ खड़े होते हैं तो विकास की राह अधिक सुगम हो जाती है।
बदलाव की तस्वीरें दे रहीं नया संदेश
कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें भी क्षेत्र में बदलते माहौल की कहानी कहती हैं। एक ओर ग्रामीणों की सहभागिता से नक्सली स्मारक हटाया जा रहा है, तो दूसरी ओर जवान ग्रामीणों के साथ सहज बातचीत करते, बच्चों को दवाइयां देते और उनकी समस्याएं सुनते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं और बुजुर्गों की उपस्थिति भी बताती है कि अब संवाद का दायरा व्यापक हो रहा है।
उसेबेड़ा का यह आयोजन केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि माड़ में उभर रहे नए सामाजिक विश्वास का प्रतीक बनकर सामने आया है। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी, नक्सली स्मारक का हटना, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जनसमस्याओं पर खुला संवाद इस बात का संकेत है कि अबूझमाड़ का यह इलाका धीरे-धीरे भय की पहचान से निकलकर विकास, विश्वास और जनसहभागिता की नई पहचान गढ़ रहा है।




