क्राइम

पीएनबी घोटाले में पुलिस का शिकंजा कसता गया, तीन और गिरफ्तार

फर्जी केवाईसी, निष्क्रिय खातों और कूटरचित दस्तावेजों से 30.67 लाख की हेराफेरी का खुलासा

बैंक कर्मचारी, बीसी सेंटर संचालकों और सहयोगियों की मिलीभगत उजागर, सभी आरोपी न्यायिक रिमांड पर भेजे गए

नारायणपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) शाखा नारायणपुर में हुए करोड़ों की बैंकिंग व्यवस्था को झकझोर देने वाले बहुचर्चित धोखाधड़ी प्रकरण में नारायणपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फर्जी केवाईसी, निष्क्रिय खातों को दोबारा सक्रिय करने और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए 30 लाख 67 हजार 500 रुपये की हेराफेरी करने वाले गिरोह पर पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है।

पुलिस के अनुसार मामले में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नवीन कार्रवाई में अशोक जैन, सुनैना समुंद और रामकरण साहू को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। मामले की विवेचना अभी भी जारी है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है।

ऑडिट में खुला फर्जीवाड़े का राज

मामले का खुलासा तब हुआ जब पंजाब नेशनल बैंक शाखा नारायणपुर के शाखा प्रमुख मनीष कुमार सोनी ने 5 फरवरी 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई। बैंक की आंतरिक जांच और विशेष ऑडिट में सामने आया कि बैंक में पदस्थ कर्मचारी गोपाल सिंह समुंद ने रिकवरी एजेंट एवं बीसी सेंटर संचालकों तिलकराम मंडावी और रामकरण साहू के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से बैंक खातों में गड़बड़ी की।

जांच में पता चला कि वर्षों से निष्क्रिय पड़े खातों को पहले एक-एक रुपये जमा कर सक्रिय किया गया और बाद में खाताधारकों की जानकारी के बिना आधार लिंकिंग, फर्जी केवाईसी तथा अन्य दस्तावेज तैयार कर खातों से रकम निकाली गई।

18 खातों से लाखों रुपये निकाले

विशेष ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 17 अगस्त 2024 से शुरू हुई इस धोखाधड़ी के जरिए 18 खातों से करीब 8.92 लाख रुपये की फर्जी निकासी की गई। जांच आगे बढ़ने पर धनराशि के अन्य खातों और लेन-देन की परतें खुलती गईं, जिससे कुल धोखाधड़ी की राशि 30.67 लाख रुपये तक पहुंच गई।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी व्यक्तियों को विभिन्न बीसी सेंटरों में ले जाकर खातों से रकम निकाली गई। इनमें तिलकराम मंडावी के बीसी सेंटर से 6.27 लाख रुपये तथा रामकरण साहू के बीसी सेंटर से 15.47 लाख रुपये की निकासी दर्ज हुई। कई मामलों में रकम को आरोपियों एवं उनके परिचितों के खातों में भी स्थानांतरित किया गया।

सीसीटीवी फुटेज और बैंक दस्तावेज बने अहम साक्ष्य

विवेचना के दौरान पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड, खातों से संबंधित दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए हैं। संबंधित खाताधारकों और बैंक कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। संकलित साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

इससे पहले पुलिस गोपाल सिंह समुंद और तिलकराम मंडावी को गिरफ्तार कर चुकी है। अब तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में शामिल पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं।

आर्थिक अपराधियों पर सख्ती जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रकरण में शेष वित्तीय लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है। बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर आर्थिक अपराध करने वालों के खिलाफ साक्ष्य आधारित कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आने पर आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

कैसे हुआ बैंक घोटाले का खेल?

  • निष्क्रिय (डॉरमेंट) खातों को फिर से सक्रिय किया गया।
  • फर्जी केवाईसी और आधार लिंकिंग की गई।
  • खाताधारकों की जानकारी के बिना रकम निकाली गई।
  • बीसी सेंटरों के माध्यम से नकदी निकासी कराई गई।
  • धनराशि को परिचितों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया गया।
  • ऑडिट रिपोर्ट में अनियमितताओं का खुलासा होने पर मामला सामने आया।

अपराध क्रमांक 21/2026 के तहत दर्ज इस मामले को नारायणपुर के सबसे बड़े बैंकिंग फ्रॉड मामलों में माना जा रहा है, जिसकी जांच अभी जारी है।

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