नारायणपुर

गोटूल में रात 10 बजे तक चला ‘माड़ संवाद’, अबूझमाड़ में बदली तस्वीर

मसपुर गांव में कलेक्टर नम्रता जैन ने ग्रामीणों के साथ देखी ‘आई एम कलाम’, महिलाओं और युवाओं की समस्याएं सुनकर दिए त्वरित निर्देश, सामूहिक भोज के साथ समाप्त हुआ यादगार आयोजन

(कैलाश सोनी) मसपुर/नारायणपुर। कभी नक्सल भय के कारण जहां सूर्यास्त के बाद सरकारी अमला पहुंचने की कल्पना भी मुश्किल थी, वहीं अब अबूझमाड़ के ओरछा विकासखंड के ग्राम मसपुर में रात 10 बजे तक जिला प्रशासन और ग्रामीण एक साथ बैठकर संवाद करते दिखाई दिए। मंगलवार शाम 6 बजे से शुरू हुआ ‘माड़ संवाद’ कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं रहा, बल्कि अबूझमाड़ के बदलते सामाजिक परिवेश और शासन-प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच बढ़ते विश्वास का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

जिला प्रशासन नारायणपुर तथा सहयोगी संस्था शिक्षार्थ ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कलेक्टर नम्रता जैन ने अधिकारियों के साथ ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनीं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रेरणादायी फिल्म ‘आई एम कलाम’ के प्रदर्शन से हुई, जिसे ग्रामीणों और बच्चों ने देर रात तक बड़े उत्साह के साथ देखा। इसके बाद गोटूल में ही खुले वातावरण में संवाद का दौर शुरू हुआ।

गोटूल में बैठकर देखी फिल्म, फिर शुरू हुआ समस्याओं और समाधान का सिलसिला

कार्यक्रम के लिए जारी सूचना के अनुसार शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था। मुख्य आकर्षण में जिला कलेक्टर का ग्रामीणों के साथ संवाद, फिल्म ‘आई एम कलाम’ की स्क्रीनिंग और सामूहिक रात्रिभोज शामिल था। लेकिन ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के कारण संवाद का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।

कलेक्टर नम्रता जैन स्वयं ग्रामीणों और बच्चों के बीच बैठीं और उनके साथ फिल्म का आनंद लिया। फिल्म समाप्त होने के बाद ग्रामीणों से एक-एक कर बातचीत शुरू हुई। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएं और अपेक्षाएं सामने रखीं।

महिलाओं और किशोरियों ने उठाया मासिक स्वच्छता का मुद्दा

माड़ संवाद के दौरान युवतियों और महिला समूहों ने एक महत्वपूर्ण विषय उठाया। उन्होंने बताया कि स्कूल और आश्रम शालाओं में अध्ययन के दौरान पीरियड्स के समय उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और कई बार आवश्यक संसाधनों के अभाव में परेशानी बढ़ जाती है।

कलेक्टर नम्रता जैन ने इस विषय को गंभीरता से लिया और तत्काल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में आवश्यकतानुसार सेनेटरी पैड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्राओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण महिलाओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पहली बार उनकी व्यक्तिगत और संवेदनशील समस्याओं को इस प्रकार गंभीरता से सुना गया है।

12वीं के बाद पढ़ाई और रोजगार की चिंता भी सामने आई

संवाद के दौरान युवाओं ने उच्च शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए। ग्रामीण युवाओं ने बताया कि 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद कॉलेजों तक पहुंचना आसान नहीं होता और आर्थिक संसाधनों की कमी भी बड़ी चुनौती है।

कुछ युवाओं ने गांव में ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और सिलाई मशीन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर कलेक्टर नम्रता जैन ने आश्वस्त किया कि पात्र युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश दिलाने तथा आजीविका से जुड़ी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

शौचालय और स्वच्छता को लेकर दिखी नई जागरूकता

कार्यक्रम में दिखाई गई फिल्म का प्रभाव ग्रामीणों पर स्पष्ट दिखाई दिया। महिलाओं ने कहा कि स्वच्छता और शौचालय के महत्व को उन्होंने अब बेहतर तरीके से समझा है।

महिलाओं ने कहा कि घर में शौचालय होने से उन्हें बच्चों के साथ बाहर जाने की मजबूरी नहीं रहेगी और पूरा परिवार सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण में रह सकेगा। इससे अनेक बीमारियों से भी बचाव होगा।

ग्रामीणों का मानना था कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा भी मिलती है।

बिजली, पानी और सड़क से बदली तस्वीर, फिर भी जरूरतें बाकी

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में गांवों तक बिजली, पेयजल और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के पहुंचने से जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है। इन सुविधाओं ने गांवों में विकास की नई उम्मीद जगाई है।

हालांकि उन्होंने आंगनबाड़ी में पोषण आहार की नियमित उपलब्धता, युवाओं के लिए रोजगार, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी प्रशासन के सामने रखा।

कलेक्टर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवश्यकताओं और मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में देर रात तक प्रशासन की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय

मसपुर गांव में आयोजित यह कार्यक्रम इसलिए भी विशेष माना जा रहा है, क्योंकि एक समय ऐसा था जब नक्सल प्रभाव के कारण सूर्यास्त के बाद प्रशासनिक गतिविधियां लगभग असंभव मानी जाती थीं। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।

रात 10 बजे तक कलेक्टर सहित जिला प्रशासन, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, विकासखंड स्तर के अमले और स्थानीय ग्रामीण एक साथ मौजूद रहे। यह दृश्य अबूझमाड़ में सामान्य होते माहौल और बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी बातें रखीं और प्रशासन के सवालों का जवाब देते हुए अपने जीवन, संस्कृति और आवश्यकताओं से अवगत कराया।

सांस्कृतिक रंग में भी रंगा माड़ संवाद

संवाद कार्यक्रम के दौरान स्थानीय युवतियों और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दीं। आदिवासी संस्कृति और लोक जीवन की झलक ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।

गांव के गोटूल और पारंपरिक परिवेश में आयोजित यह आयोजन प्रशासन और ग्रामीणों के बीच औपचारिकता से अधिक आत्मीयता का प्रतीक बन गया।

एक साथ बैठकर किया रात्रिभोज

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों, ग्रामीणों, बच्चों, महिलाओं तथा जिला मुख्यालय से पहुंचे अतिथियों और पत्रकारों ने एक साथ बैठकर भोजन किया। सामूहिक भोजन ने सामाजिक समरसता और आपसी विश्वास के संदेश को और मजबूत किया।

पूरे जिले में चलेगा ‘माड़ संवाद’ अभियान

कलेक्टर नम्रता जैन ने संकेत दिए कि ‘माड़ संवाद’ केवल एक गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे जिले में नियमित रूप से संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशासन को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना, उनकी समस्याओं को समझना और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

बदलते अबूझमाड़ की नई तस्वीर

अबूझमाड़ लंबे समय तक नक्सलवाद की छाया में रहा। ऐसे में शासन-प्रशासन और ग्रामीण समाज के बीच दूरी स्वाभाविक थी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में तेजी से बदलते हालात एक नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं।

मसपुर में आयोजित ‘माड़ संवाद’ केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विश्वास, सहभागिता और विकास की नई यात्रा का प्रतीक बनकर उभरा है। जिस अबूझमाड़ में कभी शाम ढलने के बाद सन्नाटा और भय का माहौल होता था, वहीं अब रात के अंधेरे में गोटूल के बीच बैठकर बच्चे फिल्म देख रहे हैं, महिलाएं अपनी समस्याएं बता रही हैं, युवा भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर रहे हैं और प्रशासन समाधान का भरोसा दे रहा है।

यही दृश्य संकेत दे रहे हैं कि अबूझमाड़ में विकास की नई सुबह केवल दस्तावेजों में नहीं, बल्कि गांवों की चौपालों और गोटूलों तक पहुंचने लगी है।

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