अबूझमाड़ का अस्पताल दिन में तीन घंटे, रात में 50 किमी दूर जिला अस्पताल ही सहारा
गारपा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सुबह 11 से दोपहर 2-3 बजे तक ही रहती स्वास्थ्य टीम • भवन, सड़क, बिजली और आवास के बावजूद मुख्यालय में नहीं रुक रहे कर्मचारी • सीएचएमओ बोले- स्वयं निरीक्षण करूंगा, लापरवाही मिली तो वेतन कटेगा

नारायणपुर। दूरस्थ अबूझमाड़ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। नारायणपुर जिले के गारपा स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में तैनात स्वास्थ्य अमले पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में कर्मचारी प्रतिदिन सुबह करीब 11 बजे पहुंचते हैं और दोपहर 2 से 3 बजे के बीच वापस नारायणपुर लौट जाते हैं। इसके बाद अस्पताल पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसे में रात के समय किसी के बीमार पड़ने या आपात स्थिति बनने पर मरीजों को करीब 50 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल, नारायणपुर ले जाना पड़ता है।

सबसे अधिक परेशानी आश्रम शालाओं में अध्ययनरत बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को होती है। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारी और दुर्घटना समय देखकर नहीं आती, लेकिन गारपा अस्पताल की व्यवस्था घड़ी देखकर चल रही है।
सुविधाएं बढ़ीं, लेकिन सेवा अब भी अधूरी
ग्रामीणों का कहना है कि पहले कर्मचारियों के रुकने के लिए भवन, सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों के नहीं रुकने को लोग मजबूरी मानते थे। अब गारपा तक पक्की सड़क पहुंच चुकी है, नया अस्पताल भवन बन गया है और कर्मचारियों के ठहरने की व्यवस्था भी जिला प्रशासन ने कर दी है। इसके बावजूद अधिकांश कर्मचारी रात्रि प्रवास नहीं करते और प्रतिदिन वापस नारायणपुर लौट जाते हैं।
रात में बंद रहता है अस्पताल, बढ़ता है जान का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि रात के समय किसी की तबीयत बिगड़ जाए तो तत्काल इलाज मिलना लगभग असंभव हो जाता है। गंभीर मरीजों को खराब हालत में 50 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है, जिससे अनमोल समय बर्बाद होता है और मरीज की जान पर भी खतरा मंडराता है।
24 घंटे सेवा का दावा, लेकिन कागजों तक सीमित
सरकार दूरस्थ क्षेत्रों में चौबीसों घंटे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है, लेकिन गारपा की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में नियमित रूप से रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवाएं संचालित नहीं हो रही हैं, जिससे अबूझमाड़ के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा भी समय पर नहीं मिल पा रही है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि गारपा स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, रात्रिकालीन प्रवास अनिवार्य किया जाए तथा 24 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हों, ताकि दूरस्थ क्षेत्र के लोगों को समय पर इलाज मिल सके।
क्या कहते हैं ग्रामीण
“डॉक्टर दो-तीन घंटे रहकर लौट जाते हैं”
गारपा में स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी समस्या डॉक्टरों की अनुपलब्धता है। प्रतिदिन सुबह 11 बजे आने के बाद दोपहर 2-3 बजे तक डॉक्टर और कर्मचारी वापस नारायणपुर चले जाते हैं। जिला प्रशासन ने रहने की पूरी व्यवस्था कर दी है, लेकिन कोई रुकता नहीं। रात में मरीज बीमार पड़ जाए तो इलाज के अभाव में उसकी जान भी जा सकती है।

— प्रकाश नुरेटी, स्थानीय युवा
“समय पर डॉक्टर नहीं मिलने से मरीज भटकते हैं”
पहले रहने की सुविधा नहीं थी, इसलिए लोगों ने ज्यादा शिकायत नहीं की। अब भवन और अन्य व्यवस्थाएं होने के बावजूद डॉक्टर नहीं रुकते। शाम और रात में मरीजों को मजबूरी में नारायणपुर ले जाना पड़ता है।

— सागर नुरेटी, स्थानीय युवा
सरपंच बोले
“रात में अस्पताल बंद रहने से सबसे ज्यादा परेशानी”
पहले सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए स्थिति समझ में आती थी। अब सारी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, फिर भी कर्मचारी रात्रि प्रवास नहीं करते। प्रतिदिन सुबह 11 बजे आते हैं और शाम तक लौट जाते हैं। रात में कोई बीमार हो जाए तो ग्रामीणों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है।

— सन्नू ध्रुव, सरपंच, ग्राम पंचायत गारपा
स्वास्थ्य अधिकारी का बयान
“निरीक्षण करूंगा, दोषी मिले तो होगी कार्रवाई”
गारपा में पदस्थ कर्मचारियों को मुख्यालय में रुकने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। यदि इसके बावजूद कर्मचारी रात्रि प्रवास नहीं कर रहे हैं तो मैं स्वयं निरीक्षण करूंगा। निरीक्षण में अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ वेतन कटौती सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
— टी.आर. कुंवर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ), नारायणपुर




