भोंगापाल के बौद्ध चैत्यगृह से गूंजा शांति और मैत्री का संदेश
प्रदेश स्तरीय बुद्ध जयंती समारोह में अंतरराष्ट्रीय बुद्ध शांति पार्क व बौद्ध पर्यटन केंद्र विकसित करने की उठी मांग

भोंगापाल/नारायणपुर। बस्तर संभाग के कोंडागांव, कांकेर और नारायणपुर जिले की सीमाओं के संगम पर स्थित ऐतिहासिक भोंगापाल बौद्ध चैत्यगृह में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुद्ध जयंती एवं सम्मान समारोह में प्रज्ञा, शील, करुणा, मैत्री और शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। समारोह में उपस्थित बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से छठी शताब्दी के इस प्राचीन बौद्ध स्थल के संरक्षण-संवर्धन के साथ यहां अंतरराष्ट्रीय बुद्ध शांति पार्क और प्रमुख बौद्ध पर्यटन केंद्र विकसित करने की मांग उठाई।

प्राचीन बौद्ध चैत्यगृह में स्थापित भगवान बुद्ध की विशाल प्रतिमा के समक्ष केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, बौद्ध समाज के संरक्षक महादेव कावरे, पूर्व कमिश्नर दिलीप वासनीकर, डॉ. कृष्णमूर्ति कांबले, आलोक देव, छत्तीसगढ़ बौद्ध समाज के प्रदेश अध्यक्ष अनिल खोबरागड़े, सरपंच रामसाय नाग, जयंत वासनीकर एवं फूल सिंह कोर्राम सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे बौद्ध समाज के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर बुद्ध वंदना तथा त्रिशरण पंचशील का पाठ किया।

समारोह के दौरान डॉ. कृष्णमूर्ति कांबले के नेतृत्व में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुद्धदेव संरक्षण समिति के सदस्यों, पंचायत प्रतिनिधियों और विभिन्न जिलों से आए समाजसेवियों को मेडल, बौद्ध स्मृति चिह्न एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
भोंगापाल को मिले बेहतर सड़क और बुनियादी सुविधाएं
मुख्य अतिथि विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग से भोंगापाल तक पहुंच मार्ग को चिन्हित करने के लिए साइन बोर्ड लगाए जाने चाहिए तथा क्षेत्र में बेहतर सड़क निर्माण की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीणों की मांग के अनुरूप बुद्ध के नाम पर महाविद्यालय और उच्च स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे तीनों जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा।
बौद्ध समाज के संरक्षक महादेव कावरे ने चैत्यगृह के संरक्षण और पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर दिया। वहीं पूर्व कमिश्नर दिलीप वासनीकर ने कहा कि सामाजिक एकजुटता के साथ यहां बौद्ध धम्म से जुड़े आयोजन नियमित रूप से होते रहने चाहिए।
शांति, करुणा और सद्भाव का केंद्र बनेगा भोंगापाल
भोंगापाल बुद्ध जयंती आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं छत्तीसगढ़ बौद्ध समाज के प्रदेश अध्यक्ष अनिल खोबरागड़े ने कहा कि भोंगापाल बौद्ध चैत्यगृह से भगवान बुद्ध के प्रज्ञा, शील, करुणा, मैत्री और शांति का संदेश चारों दिशाओं में प्रसारित होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय आदिवासी समाज और सर्व समाज के सहयोग से यहां लगातार धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सरकार से की गईं प्रमुख मांगें
प्रदेश स्तरीय सम्मेलन में बौद्ध समाज ने राज्य सरकार से मांग की कि छत्तीसगढ़ के एकमात्र प्राचीन बौद्ध चैत्यगृह और विशाल बुद्ध प्रतिमा का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाए। साथ ही भोंगापाल में अंतरराष्ट्रीय बुद्ध शांति पार्क, सर्वसुविधायुक्त बौद्ध विहार, ध्यान एवं विपश्यना केंद्र का निर्माण कराया जाए। बौद्धकालीन संस्कृति और सभ्यता के अध्ययन के लिए व्यापक उत्खनन कार्य कराया जाए तथा कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर से भोंगापाल जाने वाले मार्गों पर साइन बोर्ड और गुणवत्तापूर्ण सड़कें बनाई जाएं।
समाज प्रतिनिधियों ने बताया कि इन मांगों को लेकर एक जून 2025 को आयोजित राज्य स्तरीय भोंगापाल बुद्ध महोत्सव में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को भी ज्ञापन सौंपा गया था।
आदिवासी संस्कृति की प्रस्तुति ने बांधा समां
समारोह में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कांकेर, जगदलपुर, बीजापुर, गरियाबंद, दल्लीराजहरा, मोहला-मानपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में बौद्ध उपासक एवं उपासिकाएं शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय आदिवासी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते मांदरी नृत्य ने अपनी पारंपरिक लय, ताल और आकर्षक वेशभूषा से उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भोंगापाल का बौद्ध चैत्यगृह छठी शताब्दी का माना जाता है और बस्तर अंचल में बौद्ध धम्म, आदिवासी परंपराओं तथा सांस्कृतिक विरासत के अद्वितीय संगम के रूप में अपनी विशेष पहचान रखता है।




