नारायणपुर

बस्तर का बढ़ा मान: नारायणपुर कृषि महाविद्यालय को मिला ‘पर्यावरण चैंपियन अवार्ड-2026’

जैविक खेती, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

देहरादून में होगा सम्मान समारोह, अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नाशिने ग्रहण करेंगी प्रतिष्ठित पुरस्कार

नारायणपुर। जनजातीय बहुल अबूझमाड़ और नारायणपुर अंचल में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने वाले लिंगो मुदियाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अधीनस्थ इस संस्थान को पर्यावरण संरक्षण, जैविक कृषि, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और जनजागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘पर्यावरण चैंपियन अवार्ड-2026’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।

यह सम्मान देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जाएगा। महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. रत्ना नाशिने संस्थान की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण करेंगी।

अबूझमाड़ की धरती से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची पर्यावरण की मुहिम

नारायणपुर जैसे दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्र में महाविद्यालय द्वारा वर्षों से पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि विकास को लेकर किए जा रहे प्रयासों को इस सम्मान के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है। संस्थान ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ किसानों को आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों से जोड़ने का निरंतर प्रयास किया है।

महाविद्यालय द्वारा वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में चलाए गए अभियान स्थानीय समुदायों के बीच सकारात्मक बदलाव का कारण बने हैं। इन पहलों से ग्रामीणों और किसानों में प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

किसानों और विद्यार्थियों को बनाया पर्यावरण संरक्षण का भागीदार

महाविद्यालय नियमित रूप से किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों के लिए प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से चलाए गए इन अभियानों ने संस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महाविद्यालय के प्रयास बस्तर क्षेत्र के लिए एक मॉडल के रूप में उभरे हैं।

बस्तर और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण

इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कर्मचारी, विद्यार्थी तथा कृषक समुदाय ने हर्ष व्यक्त किया है। सभी ने इसे केवल संस्थान की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे बस्तर अंचल और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय बताया।

महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि यह सम्मान संस्थान की सामूहिक प्रतिबद्धता, सतत परिश्रम और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का परिणाम है। भविष्य में भी प्रकृति संरक्षण, सतत कृषि विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रहेगा।

अबूझमाड़ और बस्तर की धरती से निकली पर्यावरण संरक्षण की यह पहल अब राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होने जा रही है। ‘पर्यावरण चैंपियन अवार्ड-2026’ केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि दूरस्थ अंचलों में किए गए सकारात्मक प्रयास भी देशभर में पहचान बना सकते हैं।

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़

अबूझमाड़ लाइव न्यूज़ पक्ष पर विपक्ष पर हर एक पक्ष पर निष्पक्ष बेबाक एवं धारदार पत्रकारिता के लिए संकल्पित है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page