वन संपदा से बदली तकदीर: डोंगनाला की आदिवासी महिलाओं ने रचा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
वन धन विकास केंद्र से जुड़कर 12 महिलाओं ने बनाई राष्ट्रीय पहचान, 2020 से 2026 तक 26.11 करोड़ की बिक्री

हर्बल उत्पादों के जरिए बढ़ी आय, हर सदस्य की सालाना आमदनी पहुंची 1.7 लाख रुपए; आयुष विभाग के ऑर्डर से मिला बड़ा बाजार
रायपुर। प्रदेश में वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने और आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संचालित वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) योजना उल्लेखनीय परिणाम दे रही है। कोरबा जिले के कटघोरा वन प्रभाग अंतर्गत डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सफल ग्रामीण उद्यमिता का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।

कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली 12 आदिवासी महिलाओं से गठित यह समूह आज अपने हर्बल उत्पादों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुका है। सीमित आय और रोजगार के अभाव के बीच जीवनयापन करने वाली इन महिलाओं ने वन धन विकास केंद्र से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति बदली, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी कायम की है।

वन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड के सहयोग से समूह की महिलाओं को हर्बल प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज का उपयोग कर विभिन्न हर्बल उत्पादों का निर्माण शुरू किया।
समूह द्वारा तैयार किए जा रहे त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, हर्बल फेस पैक, हर्बल हेयर पाउडर और हर्बल टूथ पाउडर जैसे उत्पादों को बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली। गुणवत्तापूर्ण उत्पादों और प्रभावी विपणन व्यवस्था के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ती गई और समूह को एक मजबूत बाजार पहचान प्राप्त हुई।
आयुष विभाग के ऑर्डर से मिली नई उड़ान
हरिबोल स्वयं सहायता समूह की उपलब्धियों को उस समय और मजबूती मिली, जब आयुष विभाग से उन्हें बड़े पैमाने पर हर्बल उत्पादों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला। इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपए का लाभ प्राप्त हुआ और नए बाजारों तक पहुंच का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। इससे महिलाओं के उत्पादों की विश्वसनीयता और मांग दोनों में वृद्धि हुई।
एक वर्ष में 38.90 लाख का लाभ
वित्तीय वर्ष 2024-25 में हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपए का लाभ एवं कमीशन अर्जित किया। इससे समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला।
छह वर्षों में 26.11 करोड़ की संचयी बिक्री
वन धन विकास केंद्र डोंगनाला ने वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक लगभग 26.11 करोड़ रुपए की संचयी बिक्री दर्ज कर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन, महिलाओं की मेहनत और वन विभाग के सतत मार्गदर्शन का परिणाम मानी जा रही है।
इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं की आय पर पड़ा है। समूह की प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1.7 लाख रुपए तक पहुंच गई है। आर्थिक मजबूती के साथ महिलाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक भागीदारी भी बढ़ी है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मिला सम्मान
हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हरिबोल स्वयं सहायता समूह को ट्रायफेड सहित राज्य स्तर के विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। समूह की सफलता इस बात का प्रमाण है कि वन आधारित आजीविका, कौशल विकास और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
प्रेरणा बना डोंगनाला मॉडल
डोंगनाला का वन धन विकास केंद्र आज प्रदेश के अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। यह मॉडल साबित करता है कि वन संपदा का वैज्ञानिक उपयोग, मूल्य संवर्धन और संगठित विपणन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के साथ-साथ आदिवासी महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव ला सकता है।
फैक्ट फाइल
- 12 आदिवासी महिलाओं का हरिबोल स्वयं सहायता समूह
- 2020 से मार्च 2026 तक 26.11 करोड़ रुपए की बिक्री
- वित्तीय वर्ष 2024-25 में 38.90 लाख रुपए का लाभ एवं कमीशन
- आयुष विभाग से मिला बड़े पैमाने पर उत्पाद आपूर्ति का ऑर्डर
- लगभग 20 लाख रुपए का अतिरिक्त लाभ
- प्रति सदस्य वार्षिक आय बढ़कर 1.7 लाख रुपए
- ट्रायफेड एवं राज्य स्तरीय मंचों पर सम्मानित समूह
- हर्बल उत्पादों के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल।




