अबूझमाड़ के स्वाद ने विधानसभा में जीता दिल, पारंपरिक व्यंजनों की महक से महका सदन
अरक चावल की सुगंधित खीर बनी आकर्षण का केंद्र, जनप्रतिनिधियों ने कहा– अबूझमाड़ की पाक विरासत छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर; स्थानीय महिलाओं के हुनर को मिला बड़ा मंच

नारायणपुर, 14 जुलाई। छत्तीसगढ़ विधानसभा परिसर मंगलवार को अबूझमाड़ की समृद्ध खानपान संस्कृति की अनूठी खुशबू से महक उठा। पहली बार अबूझमाड़ के पारंपरिक एवं स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों को प्रदेश के जनप्रतिनिधियों के समक्ष परोसा गया, जहां उनके विशिष्ट स्वाद, पौष्टिकता और पारंपरिक पहचान ने सभी का मन मोह लिया। खासकर अरक चावल से तैयार खीर ने अपनी भीनी-भीनी प्राकृतिक सुगंध और अद्वितीय स्वाद से जनप्रतिनिधियों का दिल जीत लिया।

इस विशेष पहल को सफल बनाने में वन मंत्री केदार कश्यप तथा नारायणपुर कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके मार्गदर्शन और प्रयासों से अबूझमाड़ के पारंपरिक व्यंजन प्रदेश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था तक पहुंचे, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं पाक विरासत को नई पहचान मिली।
अरक चावल बना सबसे बड़ा आकर्षण
प्रदर्शित व्यंजनों में अबूझमाड़ का पारंपरिक अरक चावल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। हल्के पीले रंग का यह सुगंधित पारंपरिक चावल अपनी प्राकृतिक खुशबू और विशिष्ट स्वाद के लिए जाना जाता है। इसी चावल से तैयार की गई खीर का स्वाद चखने के बाद उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इसकी मुक्त कंठ से सराहना की और इसे अबूझमाड़ की अमूल्य खाद्य विरासत बताया।
स्वाद के साथ मिली संस्कृति की पहचान
कार्यक्रम में परोसे गए सभी पारंपरिक एवं स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों की गुणवत्ता, शुद्धता और पारंपरिक स्वाद ने उपस्थित लोगों को नया अनुभव दिया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अबूझमाड़ की पाक परंपरा केवल भोजन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे व्यापक स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए।
महिला समूहों ने प्रस्तुत किया पारंपरिक हुनर
इस आयोजन को सफल बनाने में महिला एवं बाल विकास विभाग की आईसीडीएस परियोजना अधिकारी श्रीमती शर्मा का विशेष योगदान रहा। वहीं श्री अजय के नेतृत्व में रुद्राणी समूह एवं स्व-सहायता समूह की दीदियों ने पारंपरिक शैली में व्यंजनों की आकर्षक प्रस्तुति कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनके समर्पण, कौशल और पारंपरिक ज्ञान की भी सराहना की गई।
अबूझमाड़ की पहचान को मिला नया मंच
यह आयोजन केवल पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अबूझमाड़ की संस्कृति, परंपरा, स्थानीय कृषि उत्पादों और जनजातीय जीवन शैली को प्रदेश स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। साथ ही स्थानीय महिलाओं के कौशल, पारंपरिक ज्ञान और आत्मनिर्भरता को भी एक प्रभावी मंच मिला, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।




